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ग्वालियर5 मिनट पहले
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- 8315 सैंपल की जांच में संक्रमण की दर 1.8 फीसदी
- पिछले साल मार्च के अंत व अप्रैल में लगभग 2400 सैंपल की जांच में सिर्फ 9 संक्रमित निकले थे
शहर में कोरोना वायरस का संक्रमण फिर से पैर पसार रहा है। फरवरी में जहां कुल 232 लोग संक्रमण की चपेट में आए थे और 144 लोग स्वस्थ्य हुए थे, लेकिन मार्च के शुरुआती 12 दिन में ही 152 लोग पॉजिटिव निकल चुके हैं। इस अवधि में केवल 55 लोग ही ठीक हुए। यानी कि जितने प्रतिशत मरीज ठीक हुए उससे 176 प्रतिशत ज्यादा संक्रमित हुए।
यही कारण है कि 1 मार्च को शहर में एक्टिव केसों की संख्या 49 थी, जो 12 मार्च को बढ़कर 143 पहुंच गई है। यानी इसमें ढाई गुना वृद्धि हुई। यह आंकड़ा इसलिए भी खतरनाक है, क्योंकि कोरोना संक्रमण के शुरुआती समय मार्च 2020 के अंत व अप्रैल में लगभग 2400 सैंपल की जांच की गई थी।
इनमें से केवल 9 लोग संक्रमित निकले थे। उस समय लॉकडाउन होने के बाद भी बाहर से आए लोगों के कारण संक्रमण तेजी से फैला था। इस कारण संक्रमितों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई। बता दें कि मई में कुल 12702 सैंपल में से 140 संक्रमित निकले थे।
काॅन्टेक्ट ट्रेसिंग फिर शुरू, जहां मरीज मिलेगा, वहां उसके संपर्क पता करेंगे
कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही काॅन्टेक्ट ट्रेसिंग भी शुरू हो गई है। जिला महामारी अधिकारी डॉ. महेंद्र पिपरौलिया ने बताया कि गुरुवार को मेडिकल ऑफिसर को फिर से इस काम का जिम्मा दे दिया गया है। प्रत्येक वार्ड का एक मेडिकल ऑफिसर रहता है। जिस भी वार्ड में संक्रमण का मामला सामने आएगा। संबंधित मेडिकल ऑफिसर उससे बात कर उसके संपर्क में आए लोगों की जानकारी लेगा ताकि संक्रमण के लक्षण उभरने पर उनके सैंपल लिए जा सकें।
संक्रमितों की व्यवस्था के लिए 41 इंसीडेंट कमांडर बनाए जहां ज्यादा मरीज मिलेंगे वहां बनाएंगे कंटेनमेंट जोन
कोरोना संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या के बाद प्रशासन पुरानी व्यवस्थाएं फिर बहाल करेगा। ऐसे लोग जो मास्क नहीं लगा रहे हैं, उनके जुर्माना वसूला जाएगा। व्यापार मेले में विशेष टीम तैनात रहेगी। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने 41 इंसीडेंट कमांडरों को फिर नियुक्त कर उन्हें सक्रिय होने का निर्देश दिया है। इनके साथ पुलिस और डॉक्टरों की टीम रहेगी। शनिवार को क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी की बैठक भी होगी।
काेराेना की राेकथाम के लिए प्रशासन की ये तैयारी
- जिस क्षेत्र या बिल्डिंग में एक से ज्यादा मरीज होंगे वहां पर बैरिकेट्स लगाकर कंटेनमेंट जाेन जैसी व्यवस्था फिर की जाएगी। संक्रमित मरीज के घर फिर से इंसीडेंट कमांडेंट सूचना चस्पा करेंगे। मरीज यदि चाहेगा तो उसे घर में ही आईसोलेट किया जाएगा। यदि वह गंभीर होगा तो उसे सुपर हॉस्पिटल या फिर निजी अस्पताल में उसकी इच्छा पर भेजा जाएगा।
- पहले की तरह 25 स्थानों पर फीवर क्लीनिक चालू होंगे। सर्वे और सैंपलिंग की प्रक्रिया तथा मरीज की कॉन्टेक्ट हिस्ट्री भी इंसीडेंट कमांडर तैयार करेंगे। बस स्टैंड व स्टेशन पर बहुत जल्द बाहर से आने वाले यात्रियों का तापमान देखा जाएगा।
- कलेक्टर ने जेएएच के मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डॉ. ओपी जाटव से कहा कि सुपर स्पेशिलिटी में पहले जैसी व्यवस्थाएं कर लें।
- स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर को पहले की तरह एक्टिव किया जाएगा ताकि संक्रमित व्यक्ति या उसके परिजन वीडियोकॉल कर डॉक्टर से बात कर सकें। वाट्सएप नंबर भी जारी होगा।