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दमोह2 मिनट पहले
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गोविंद सिंह।
- सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी से मामला गरमाया
- उठते सवाल; रेड के बाद एसपी का तबादला नियम पालन पर जेल अधीक्षक को भी हटाया था
- आरोपियों का रसूख; हटा के न्यायाधीश ने भी जताई थी अपने साथ अप्रिय घटना की आशंका
हटा के कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड को 15 मार्च को दो साल पूरे हो जाएंगे। इसमें 28 आरोपी है, जिसमें पथरिया की बसपा विधायक रामबाई के पति गोविंद सिंह भी शामिल हैं। दो साल में प्रदेश सरकार बदल गई, लेकिन आरोपी गोविंद को संरक्षण मिलता रहा। अभी तक दो एसपी, 4 एसडीओपी, 4 टीआई के अलावा जेल अधीक्षक और जेलर को बदला जा चुका है।
चौरसिया के बेटे साेमेश के माध्यम से ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने प्रदेश शासन और पुलिस विभाग पर तल्ख टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिन के अंदर गोविंद सिंह की गिरफ्तारी, डीजीपी को उपस्थित होकर रिपोर्ट पेश करने और शासन को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। इधर, देवेंद्र चौरसिया के बेटे सोमेश का कहना है कि उन्हें न्याय दिलाने में न कांग्रेस सरकार ने साथ दिया, न भाजपा सरकार दे रही है। कांग्रेस सरकार के समय उनके पिता की हत्या हुई और गोविंद सिंह का नाम जांच के नाम पर हटा दिया गया। बीजेपी की सरकार आई तो उनके परिवार के चार सदस्यों पर धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया।
हत्याकांड के दो साल, नीचे से ऊपर तक इतने अफसर बदल चुके
1. हत्याकांड के दौरान दमोह एसपी आरएस बेलवंशी ने रामबाई के घर में गोविंद सिंह की तलाश में रेड कराई थी। इसके बाद उनका तबादला हो गया। एसपी विवेक सिंह आए। कुछ समय बाद उन्हें भी हटा दिया और हेमंत चौहान को भेजा।
2. वारदात के दौरान एसडीओपी कमल जैन हटा में पदस्थ थे। जल्द उनका तबादला कर दिया गया। इनके बाद सरिता उपाध्याय, नीतेश पटेल, प्रिया सिंधी आए और गए। अब भावना दांगी पदस्थ हैं लेकिन आरोपी को नहीं पकड़ पाए।
3. वारदात के समय हटा में धर्मेंद्र सिंह टीआई थे, उनके बाद विजय मिश्रा, राजेश बंजारा, दीपक खत्री आए और गए। अब प्रभारी श्याम बेन पदस्थ हैं।
3 उदाहरण; एफआईआर से नाम हटाया, पीड़ित परिवार पर केस
गोविंद का नाम हटाया
पुलिस ने अगस्त 2019 में गोविंद सिंह का एफआईआर से नाम हटा दिया। जबकि पहले 25 हजार इनाम घोषित किया था। गोविंद सिंह पर पहले से 25 मामले दर्ज हैं। जनवरी 2021 में हटा एडीजे कोर्ट ने गोविंद सिंह को फिर से आरोपी बनाया था। मामले में गोविंद सहित 5 आरोपी फरार हैं, बाकी जेल में हैं।
फायरिंग का केस दर्ज
24 जून 2020 की रात मगरोन थाना क्षेत्र में कमल और विद्यारानी नामक महिला ने चौरसिया परिवार के चार लोगों के खिलाफ फायरिंग और बम फेंकने सहित 8 धाराओं में मामला दर्ज कराया। जबकि पीड़ित परिवार का कहना है, उस दिन चारों लोग घर पर थे। सीसीटीवी फुटेज भी हैं।
जेल अफसर हटाए गए
हटा न्यायालय में जेलर एनएस राणा ने बयान दिया था कि आरोपी जेल नियमों का पालन नहीं करते हैं। इन्हें शिफ्ट करने के लिए तत्कालीन जेल अधीक्षक रामलाल सहलाम ने पत्र व्यवहार किया था, जिस पर उनका स्थानांतरण हो गया। बयान देने के बाद एनएस राणा को भी जबलपुर अटैच कर दिया गया।
हटा के जज ने लिखा था पत्र
हटा के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने जिला व सत्र न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा था कि दमोह में उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है। एसपी द्वारा अपने अधीनस्थों के साथ मिलकर उनके विरुद्ध झूठे आरोप लगाए जाने की भी आशंका जताई थी।
^गोविंद सिंह पर 10 हजार का इनाम घोषित कर दिया है। गिरफ्तारी की कोशिश जारी है।’
– हेमंत चौहान, एसपी, दमोह
^मुझे सम्मानीय कोर्ट पर पूरा भरोसा है। सीबीआई से जांच होनी चाहिए। सत्य सामने आ जाएगा।’
-रामबाई, विधायक, पथरिया