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- 178 Km Of Sewerage Reduced In 4 Years, Not A Single Intersection Will Be Built In Smart City
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रतलाम3 घंटे पहले
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फाइल फोटो।
- हवाई सर्वे से बनाईं योजनाएं, बीच में बदलने से जनता की परेशानी बढ़ी
- योजना बनाने में हुई लापरवाही, नगर निगम के अफसर चाहकर भी नहीं कर पा रहे ठेकेदार एजेंसियों पर कार्रवाई
शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का दावा करते हुए बनाई गई विकास की योजनाएं अधूरे में ही बदल गई हैं। डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाते समय जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। काम के दौरान कमियां सामने आने पर अब बार-बार बदलाव करना पड़ रहे हैं। बात चाहे बरसाती नालों को पक्का करने की हो या सीवरेज सिस्टम और मिनी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की।
चार साल में एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया है। नतीजा सड़कें खुदी होकर सारे काम अधूरे पड़े हैं जो जनता के लिए परेशानी बन गए हैं। नगर निगम के अफसर भी खिसियाए हुए हैं जो चाहकर भी सख्त कार्रवाई के बजाय सिर्फ नोटिस और चेतावनी देकर दिखावा कर रहे हैं। आइए जानें प्रमुख विकास योजनाओं की वास्तविकता और उससे उपजी शहर की जनता की परेशानी
पहली : नाले तीन अब सिर्फ दो बरसाती नाले ही पक्के बनेंगे
- यह बनी थी योजना : 2016 में 26 बरसाती नालों को 23.66 करोड़ से पक्का बनाने की योजना थी। स्टेट लेवल टेक्निकल कमेटी ने सिर्फ तीन नालों के लिए 11 करोड़ रुपए मंजूर किए। इनमें गोमदड़े की पुलिया से ऊंकाला गणपति मंदिर, आबकारी चौराहा से मराठों का वास व सुभाषनगर से अमृतसागर तालाब तक का नाला शामिल था।
- कितना बदलाव : आबकारी से मराठों का वास तक 550 मीटर लंबा नाला प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया गया है। इस पर 63.58 लाख रुपए खर्च होना था। निगम का तर्क है कि यह नाला अभी काफी कुछ पक्का बना हुआ है। कुछ जगह से टूटा-फूटा है, जो 6 से 7 लाख के खर्च से ठीक हो जाएगा।
- अभी क्या स्थिति : चार में दो नाले पूरे पक्के नहीं बने। गोमदड़े पुलिया से उंकाला गणपति तक के 2600 मीटर लंबे नाले में से 1700 मीटर ही पक्का बना है। 900 मीटर बनना बाकी है। सुभाष नगर से अमृत सागर तालाब तक का 1400 मीटर नाला भी अब तक 650 मीटर ही पक्का बना है।
दूसरी: 178 किमी घट गई सीवरेज लाइन, एसटीपी भी दो बन रहे
- यह बनी थी योजना : जून 2017 में जब काम शुरू हुआ तक 452 किमी सीवर लाइन तथा इसके अलावा 14 किमी लंबी दो मुख्य लाइन डलना थी। यह मुख्य लाइन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक जाना थी। पानी साफ करने 6 स्थानों पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाना थे।
- कितना बदलाव : चार बाद अब सिर्फ 274 किमी लंबी सीवरेज लाइन ही डलेगी। मुख्य लाइन की लंबाई भी घटकर 11 किमी रह गई है। एसटीपी 6 से घटाकर दो कर दिए गए। बाकी चार की जगह पंपिंग स्टेशन बना रहे हैं। डेडलाइन 31 दिसंबर 2019 थी, जो चार बार बढ़कर अब जून 2021 हो गई है।
- अभी क्या स्थिति : 274 किमी सीवर लाइन में से 262.6 किमी डल चुकी है। करमदी रोड वाला एसटीपी 65 प्रतिशत ही बन पाया है, जबकि खेतलपुर वाला 95 प्रतिशत तैयार है। पांच पंपिंग स्टेशन में से एक भी पूरा नहीं हुआ है। मैन होल टेंडर से 195 अधिक लगभग 5223 और हाउस चैंबर टेंडर से 120 अधिक 11620 बन चुके हैं।
तीसरी : मिनी स्मार्ट सिटी में नहीं होगा चौराहाें का सौंदर्यीकरण
- यह बनी थी योजना : 2018-19 में मप्र अरबन डेवलपमेंट कंपनी ने जो प्रोजेक्ट मंजूर किया था, उसमें 8 प्रमुख सड़कों को चौड़ी करके नई बनाने के साथ 7 प्रमुख चौराहों का सौंदर्यीकरण किया जाना था। इसके अलावा 10 स्थानों पर एलईडी स्क्रीन भी लगना थी। पुलियाओं का चौड़ीकरण भी शामिल किया गया था।
- कितना बदलाव : सवा साल बाद हाल ही में संशोधित प्रोजेक्ट से चौराहों के सौंदर्यीकरण और दो प्रमुख सड़कों को हटा दिया गया है। इसके अलावा आनंद कॉलोनी और लोकेंद्र टॉकिज रोड की लंबाई घटाकर आधी कर दी गई है। एलईडी स्क्रीन भी अब शहर में सिर्फ दो जगह ही लगेगी।
- अभी क्या स्थिति : कृषि मंडी से फव्वारा चौक, शास्त्री नगर, आनंद कॉलोनी का काम बंद पड़ा है। अभी सिर्फ ऊंकाला रोड का काम चल रहा है। नई योजना में इनके सहित सभी बनने वाली 6 सड़कों की चौड़ाई 7 से बढ़ाकर 12 मीटर करने के साथ फुटपाथ और ड्रेन भी शामिल कर लिया गया है।
सीवरेज सिस्टम का काम अंतिम चरण में, जून तक खत्म नहीं होगा
^धरातलीय स्थिति के चलते कई बार योजनाओं में बदलाव करना पड़ता है। आबकारी चौराहे से मराठों का वास वाला काफी कुछ पक्का बना हुआ है, जो मरम्मत कर ठीक किया जा सकता है, इसलिए अभी नहीं बना रहे। सीवरेज सिस्टम का काम अंतिम चरण में है, जून तक खत्म हो जाएगा। मिनी स्मार्ट सिटी में तीन सड़कों के काम जल्द शुरू कर देंगे।
सुरेशचंद्र व्यास, सिटी इंजीनियर नगर निगम