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- A Year Passed For The Appointment Of President, Pending 12 Thousand Cases, But Did Not Open Even The Locks Of The Rooms.
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भोपाल3 मिनट पहले
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अध्यक्ष व सदस्यों के कमरों में डले ताले।
- अध्यक्ष और सदस्यों का आरोप- सरकार की शह पर अफसर कर रहे हैं प्रताडि़त
- यह भी कहा- आयोग में बैठने तक की जगह नहीं, कमरों में डाल दिए है ताले
महिला आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। सरकार के कहने पर आयोग के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उनके बैठने के लिए आवंटित कक्षों में ताला डाल दिया गया है। इसकी वजह से वे आयोग में आने वाली प्रताड़ित महिलाओं को राहत तक नहीं दे पा रही हैं।
उनसे कक्ष में बैठने तक का अधिकार छीन लिया गया है। दरअसल महिला आयोग की अध्यक्ष शोभा ओझा व सदस्य संगीता शर्मा, शशि राजपूत और मीना सिंह ने गुरुवार को आयोग के उनकी नियुक्ति के एक साल पूरे होने पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए भाजपा सरकार को असंवेदनशील बताया। उनका कहना है कि यह स्थिति तब है जब आयोग में 12,839 गंभीर प्रकरण लंबित है।
महिलाओं पर अत्याचार के मामले में नंबर वन पर है मप्र: शोभा ओझा
प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 16 दुष्कर्म के मामले
आयोग अध्यक्ष शोभा ओझा ने कहा कि महिला सुरक्षा जैसे गंभीर मामलों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा असंवेदनशील हैं। महिलाओं के साथ दुष्कर्म, हत्या, अत्याचार, अपहरण, दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के मामलों में मप्र देश के पहले नंबर पर है। रोज औसतन 16 दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही है। इसके बावजूद महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए उनकी टीम को काम नहीं करने दिया जा रहा।
संवैधानिक संस्था को काम नहीं करने दे रहे
ओझा ने कहा कि महिला आयोग एक संवैधानिक संस्था है। इसमें अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति को न्यायालय में चुनौती दिए जाना सही नहीं है। यह घटना इतिहास के काले पन्ने के रूप में याद की जाएगी। उन्होंने सूचना आयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने आखिरी वक्त पर कुछ सदस्यों की नियुक्ति की थी लेकिन कांग्रेस सरकार ने उनकी नियुक्ति को रद्द नहीं किया था। सभी सदस्य लगातार काम कर रहे हैं।