रीवा के वॉटर मैन: जल संरक्षण के लिए कई वर्षों से कर रहे आंदोलन, गांव के करीब 500 तालाबों के लिए लड़ रहे

रीवा के वॉटर मैन: जल संरक्षण के लिए कई वर्षों से कर रहे आंदोलन, गांव के करीब 500 तालाबों के लिए लड़ रहे


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रीवा9 मिनट पहले

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वाॅटर मैन नाम से मशहूर विश्वनाथ प्रताप सिंह उर्फ चोटीवाला।

जिले में वाॅटर मैन नाम से मशहूर विश्वनाथ प्रताप सिंह उर्फ चोटीवाला जल संरक्षण के लिए लगातार आंदोलन कर सरकार की नाक में दम कर रखा है। आंदोलन की शुरुआत सबसे पहले एक मई 2016 से हुई। यहां 60 फीट गहरे कुएं में घुसकर आंदोलन किया था। आनन—फानन प्रशासन हरकत में आया और पाइप लाइन डालने का काम शुरू किया।

इसके बाद दूसरा आंदोलन तालाब में चला, यहां तालाब में टायर के ट्यूब में बैठकर करीब 36 घंटे तक आंदोलन कर जनता के बीच पैठ बनाई। आज जिले भर के करीब 500 तालाबों और नहर, नदियों की लड़ाई शासन-प्रशासन से लड़ रहे हैं। हाल में एनजीटी ने चोटीवाला के पक्ष में फैसला देकर कलेक्टर और मुख्य सचिव को तालाबों के संरक्षण और पानी के जल भराव कराने का आदेश दिया है।

एनजीटी ने रतहरी तालाब को पुनर्जीवित करने का आदेश दिया
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 9 मार्च को रतहरी तालाब समेत जिले के अन्य तालाबों को पुनर्जीवित कर जल भराव कराने के आदेश दिए हैं। साथ ही, राज्य के मुख्य सचिव को भी आदेशित किया है। एनजीटी ने कहा है, जल संरक्षण के लिए जलभराव क्षेत्रों में नोडल अधिकारी नियुक्त कर निगरानी कराई जाए।

ऐसे पहुंची​ एनजीटी तक शिकायत
जल जंगल जमीन बचाओ मोर्चा के संयोजक शिव सिंह एडवोकेट व समाजसेवी विश्वनाथ पटेल चोटीवाला ने बताया, रतहरी रघुराज सागर समेत 1545 राजस्व कागजातों में दर्ज तालाबों को भू-माफियाओं ने प्रभावित कर लिया है। इसमें वार्ड 15 रतहरी तालाब की आराजी नंबर 217, 218 कुल रकबा 9.37 एकड़, जो राजस्व रिकॉर्ड में तालाब के रूप में दर्ज है। इस तालाब को अल्प आय वर्ग सोसायटी ने कई लोगों को बेच दिया। यहां बिना नगर निगम की अनुमति भवन निर्माण कराए जा रहे हैं। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री, कलेक्टर, संभागायुक्त, नगर निगम आयुक्त से की गई थी। वहीं, समाजसेवी विश्वनाथ 15 दिनों से अधिक सरकार की अर्थी बनाकर धूप में अनशन किया था, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की। इसके बाद एनजीटी के समक्ष मामले को लगाया गया।

जिले के तालाबों का यही हाल
तालाबों पर हो रहे अतिक्रमण से जलवायु और पर्यावरण पर संकट है। इसमें रघुराज सागर, लखौरीबाग तालाब, सिरमौर के तिलखन का नामी तालाब, पिपरी बनिया तालाब, गुढ रौरियानाथ तालाब, अमवा सतीहा तालाब, बहुरीबांध मढ़ा तालाब, सगरा तालाब समेत शहर से लगे चिरहुला खेमसागर, रामसागर, वित्तल तालाब यादव तालाब, सिलपरा नीगा पड़ोखर ओड़की समेत जिले के 75 फीसदी तालाब अपना स्वरूप खो चुके हैं।

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