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उज्जैन4 मिनट पहले
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मंगलनाथ रोड स्थित कारखाने में फूलों से बना गुलाल सुखाती श्रमिक महिलाएं।
- नगर निगम की कंपनी तैयार कर रही, मंदिर के काउंटर पर उपलब्ध
महाकालेश्वर के भक्त पहली बार भगवान पर चढ़े फूलों से बने हर्बल गुलाल से होली खेल सकेंगे। इन फूलों से होली के लिए दो रंगों में हर्बल गुलाल तैयार किया गया है। मंदिर के काउंटर पर यह गुलाल उपलब्ध कराया गया है। इन दिनों देशभर से आ रहे दर्शनार्थी यह गुलाल भी ले जा रहे हैं।
फूलों से हर्बल गुलाल का आइडिया नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल का है। स्वच्छता अभियान के तहत इनोवेशन केटेगरी में उन्होंने इस तरह का प्रयोग करने के लिए कहा था। इस पर निगम के लिए काम कर रहे मनप्रीतसिंह अरोरा ने गेंदा और गुलाब के फूलों से हर्बल गुलाल तैयार किया है। अरोरा के अनुसार गुलाल दो रंगों में तैयार किया है। गेंदे के फूलों से बना गुलाल पीला है तथा गुलाब से बना गुलाल गुलाबी है।
फूलों से बना होने से इस गुलाल की क्वालिटी बाजार में उपलब्ध गुलाल से कई गुना अच्छी है। उनका दावा है कि फूलों से बने इस हर्बल गुलाल की हर तरह से जांच कराई गई है। इसमें मनुष्य को नुकसान पहुंचाने वाला कोई तत्व नहीं है। इसमें कहीं भी किसी तरह के केमिकल का उपयोग नहीं किया गया है। इससे यह त्वचा पर किसी तरह का हानिकारक असर नहीं डालता। यदि यह मुंह में चला जाए तो भी नुकसानदेह नहीं है। इसमें खाद्य रंगों का उपयोग किया गया है।
गुलाल धोने में तीन गुना कम पानी लगेगा
अरोरा का दावा है कि गुलाल लगाने के बाद झटकारने भर से साफ हो जाएगा। इसे धोने के लिए बाजार में उपलब्ध गुलाल के मुकाबले तीन गुना कम पानी लगेगा। यह शरीर पर चिपकेगा नहीं। कपड़े से भी साफ किया जा सकता है।
अगरबत्ती व धूप बत्ती भी
निगम ने मंगलनाथ रोड पर शहर के मंदिरों से निकलने वाले फूलों से अगरबत्ती बनाने के लिए प्रोजेक्ट शुरू किया था। यहां औसत 10 कर्मचारी काम करते हैं। पहले चरण में गेंदे और गुलाब के फूलों से दो तरह की अगरबत्ती बनाई जाती रही। इस कड़ी में धूप बत्ती का उत्पादन भी यहां शुरू किया गया। अब होली के लिए गुलाल का प्रयोग किया गया है। श्रद्धालुओं को यह उत्पादन लागत कीमत ही उपलब्ध हैं। गुलाल के दो रंगों वाला पैकेट 80 रुपए में दिया जा रहा है। धूपबत्ती का पैकेट 40 रुपए का है। अगरबत्ती का पैकेट 30 रुपए का है।
स्वच्छता व रोजगार भी
निगमायुक्त सिंघल का कहना है कि उज्जैन मंदिरों की नगरी है। कोरोना संक्रमण के पहले शहर से रोज 2 से 3 टन फूल निकलते थे। इन्हीं फूलों का उपयोग अगरबत्ती बनाने में किया गया। कोरोना संक्रमण के बाद रोज लगभग 1 टन फूल निकल रहे हैं। हालांकि शनिवार-रविवार को यह मात्रा 2 से 3 टन तक पहुंच जाती है। इस प्रोजेक्ट से फूलों का उपयोग होने के साथ स्वच्छता में भी मदद मिली है। रोजगार भी उत्पन्न हुआ। इससे कई लोगों को रोजगार का अवसर मिला है। होली पर भक्त महाकाल के फूलों से बना हर्बल गुलाल एक दूसरे को लगाएंगे।