बेशकीमती जमीन पर नजर: मास्टर प्लान को लेकर सारा झगड़ा सांवराखेड़ी, जीवनखेड़ी क्षेत्र की जमीन का

बेशकीमती जमीन पर नजर: मास्टर प्लान को लेकर सारा झगड़ा सांवराखेड़ी, जीवनखेड़ी क्षेत्र की जमीन का


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उज्जैन5 घंटे पहले

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  • 150 हेक्टेयर में से आधी जमीन को सिंहस्थ क्षेत्र से मुक्त कर आवासीय व मिश्रित उपयोग का प्रस्ताव

मास्टर प्लान 2035 को लेकर लगाई गई 250 से ज्यादा आपत्तियां सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन को लेकर है। इनमें भी सबसे ज्यादा सांवराखेड़ी, जीवनखेड़ी क्षेत्र की जमीन को आवासीय व मिश्रित आवासीय घोषित करने के प्रस्ताव को लेकर है। योजनाकारों ने इन क्षेत्रों की करीब 150 हेक्टेयर में से आधी से ज्यादा जमीन मुक्त करने का प्रस्ताव किया है। यदि यह जमीन सिंहस्थ क्षेत्र से मुक्त हो जाती है तो यहां बड़ी कॉलोनियां, बाजार आदि विकसित होंगे। इसका नुकसान यह है कि सिंहस्थ-2028 में इसकी जगह दूसरी जमीन तलाशना होगी।

मास्टर प्लान-2035 पर दावे-आपत्तियां आने के बाद अब टीएंडसीपी की कमेटी इनके निराकरण पर विचार करेगी। इसके लिए तीन महीने का समय है। इनका निराकरण करने के बाद मास्टर प्लान का प्रस्ताव भोपाल में डायरेक्ट्रेट में चला जाएगा। जहां से इसे कैबिनेट में रखेंगे। सरकार इसका फैसला करेगी। मास्टर प्लान को लेकर दावे-आपत्तियों को लेकर बुलाई बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव और विधायक पारस जैन के बीच मतभेद उभरे थे। सांसद अनिल फिरोजिया दिल्ली में होने से बैठक में नहीं आए। मास्टर प्लान में बिंदु क्रमांक 7.7 पर जीवनखेड़ी व कस्बा उज्जैन तथा सांवराखेड़ी व कस्बा उज्जैन की जमीनों को लेकर आवासीय, मिश्रित आवासीय, सार्वजनिक व अर्द्ध सार्वजनिक करने का प्रस्ताव है। सिंहस्थ 2016 में इस जमीन पर पार्किंग, सुविधाएं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का बंदोबस्त किया गया था।

जमीन मुक्त हुई तो यह होगा नुकसान
यह जमीन न केवल महाकालेश्वर मंदिर व रामघाट के करीब है बल्कि बड़नगर रोड व मंगलनाथ रोड सिंहस्थ क्षेत्र के भी सबसे करीब है। 2016 में इंदौर रोड से उन्हेल रोड बायपास का निर्माण होने पर इसके एक तरफ की जमीन को सिंहस्थ क्षेत्र में शामिल किया गया था। दूसरी तरफ की जमीन को मुक्त रखा था। सिंहस्थ समाप्त होते ही इस क्षेत्र में कई कॉलोनियां ताबड़तोड़ तन गईं। क्योंकि शहर के नजदीक होने से लोगों ने हाथोंहाथ मकान खरीद लिए। इसका असर चिंतामण रोड पर भी आया और वहां कई अवैध कॉलोनियां बन गईं। यह प्रवृत्ति रुकी नहीं है। सबसे ज्यादा कीमत सांवराखेड़ी व जीवनखेड़ी क्षेत्र की जमीनों की मानी जा रही है। यदि जमीन मुक्त हो जाती है तो 2028 के सिंहस्थ में पार्किंग के लिए नई जमीन तलाशना होगी।

कॉलोनाइजरों की नजर चिंतामण रोड से बड़नगर रोड तक
इन क्षेत्रों में कई बड़े कॉलोनाइजरों ने जमीनें खरीद रखी हैं। कॉलोनाइजरों की नजर चिंतामण रोड से होते हुए बड़नगर रोड तक है। इस कारण माना यही जा रहा है कि कॉलोनाइजरों के दबाव में मास्टर प्लान को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि कॉलोनाइजरों के दबाव में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल सकती है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा कि इतने बड़े विरोध के बावजूद यह प्रस्ताव लागू हो जाए।

फैसला सरकार के हाथ- संयुक्त संचालक
टीएंडसीपी के संयुक्त संचालक सीके साधव कहते हैं 400 में से 250 से ज्यादा आपत्तियां सिंहस्थ क्षेत्र की जमीनों को लेकर है। कमेटी को निर्णय लेकर प्रस्ताव डायरेक्ट्रेट को भेजना है। 3 महीने का समय है। आपत्तियों का निदान कर प्रस्ताव कैबिनेट में भेज दिया जाएगा। सरकार जो फैसला करेगी, वही लागू होगा।

सिंहस्थ क्षेत्र सुरक्षित रहे और शहर का प्लान भी इसे ध्यान में रख करें

हर सिंहस्थ में भीड़ बढ़ती है। यदि हम सिंहस्थ क्षेत्र की जमीनें मुक्त करते जाएंगे, अतिक्रमण नहीं रोकेंगे तो समस्या आनी ही है। सिंहस्थ का कोर एरिया मंगलनाथ और बड़नगर रोड है, जहां अखाड़ों के पांडाल लगते हैं। इनसे ज्यादा साधु-संत बाहरी इलाकों में बसते हैं। इनके अलावा संस्थाओं, व्यापार, प्रशासनिक व्यवस्था, पार्किंग आदि के लिए जमीन की जरूरत होती है। 2016 में प्राथमिक स्थिति में 2800 हेक्टेयर जमीन का प्लान था जो अंतत: बढ़ते हुए 3800 हेक्टेयर पर पहुंचा। इसके साथ ही शहर विकास की योजनाएं भी सिंहस्थ को ध्यान में रखकर ही बनाई जाना चाहिए।

पेयजल, सीवरेज, बिजली, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं में सिंहस्थ क्षेत्र को शामिल करने के साथ शहर और सिंहस्थ को जोड़ने वाला नेटवर्क जरूरी है। हमारे यहां 12 साल यात्री आते हैं। शनिश्चरी, सोमवती, श्रावण, शिवरात्रि जैसे पर्वों पर इन यात्रियों को सीधे महाकाल और रामघाट से जोड़ने के लिए पैदल स्कॉय ब्रिज की जरूरत है। यह रेलवे और बस स्टैंड से यात्रियों को सीधे गंतव्य पर पहुंचाएगा। सड़कों का चौड़ीकरण खासकर पुराने शहर में होना चाहिए। शहर को चारों तरफ से आगे बढ़ाने के लिए बाह्य रिंगरोड अब भी अधूरा है। एक्सपर्ट- आर्किटेक्ट श्रीकांत वैश्यमपायन

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