लोग पसीजे, सिस्टम नहीं: लापता बच्चे का शव मिला, नहीं मिली सरकारी एम्बुलेंस, सोशल मीडिया पर चंदा इकट्‌ठा पीएम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया

लोग पसीजे, सिस्टम नहीं: लापता बच्चे का शव मिला, नहीं मिली सरकारी एम्बुलेंस, सोशल मीडिया पर चंदा इकट्‌ठा पीएम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया


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सतना13 मिनट पहले

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एम्बुलेंस के इंतजार में शव को लेकर बैठा मृतक का पिता।

  • सोशल मीडिया में मैसेज वायरल होने के बाद करवाई व्यवस्था
  • मौत के कारणों का फिलहाल नहीं चला पता

केन्द्र और राज्य सरकारों के लाख दावाें के बावजूद जमीनी हकीकत जुदा है। ऐसा ही मामला सतना के कोटर तहसील के रजरवार गांव में सामने आया है। यहां हुए घटनाक्रम में लोग पसीज गए, लेकिन सिस्टम नहीं पसीजा। गांव में शनिवार सुबह करीब 9 बजे 15 वर्षीय बच्चे का शव मिला। वह शुक्रवार शाम से लापता था।

पुलिस ने शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए भिजवाने की बात कही, लेकिन अस्पताल में एम्बुलेंस ही नहीं थी। अस्पताल ने कह दिया कि खुद के पैसे से व्यवस्था कर शव को पीएम के लिए सतना ले जाओ, लेकिन गरीब पिता पर इतने पैसे नहीं थे। इसके बाद कुछ लोगों ने सोशल मीडिया में मैसेज वायरल कर दिया। काफी समय बाद तीन हजार रुपयों की व्यवस्था हुई। तब जाकर सतना से एम्बुलेंस मंगवाई गई और शव को जिला अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने केस दर्ज कर मामला जांच में लिया है।

गांव में रहने वाला भीमसेन यादव पेशे से चरवाहा है। उसका 15 वर्षीय बेटा शुक्रवार शाम कहीं चला गया। उसने सोचा कि कहीं गया होगा, आ जाएगा। इसलिए शिकायत भी दर्ज नहीं कराई। दूसरे दिन सुबह ग्रामीणों ने गांव में स्थित कुएं में शव देखा। इसकी सूचना भीमसेन को भी दी गई। देखा तो उसके बेटे का शव था। लोगों ने कोटरा पुलिस को भी मामले की जानकारी दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को अस्पताल भिजवाया।

एम्बुलेंस भी नसीब नहीं हुई

अस्पताल में पोस्टमॉर्टम की व्यवस्था नहीं होने से शव को सतना जिला अस्पताल भेजने के लिए कहा गया, लेकिन इसके लिए सरकारी एम्बुलेंस नहीं मिली। सरकारी एम्बुलेंस के ड्राइवर ने व्यस्त होने का हवाला देकर इनकार कर दिया।

सोशल मीडिया से मिली मदद

भीमसेन के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह किराए से एम्बुलेंस लेकर बेटे के शव को जिला अस्पताल ले जा पाता। इसके बाद किसी ने इस संबंध में सोशल मीडिया में मैसेज वायरल कर दिया। काफी देर बाद करीब 3 हजार रुपए की मदद मिली। तब कहीं जाकर शव को जिला अस्पताल ले जाया गया।

कुछ साल में बिखर गया परिवार

ग्रामीणों के मुताबिक कुछ साल में भीमसेन का परिवार बिखर गया। कुछ साल पहले भीमसेन की पत्नी की बीमारी से मौत हो गई। इसके बाद बेटी भी लापता हो गई। वह भी नहीं लौटी। पुलिस ने भी कार्रवाई नहीं की। अब बेटे की भी मौत हो गई।

डेढ़ लाख की आबादी फिर भी नहीं पीएम की सुविधा
बता दें, कोटर तहसील क्षेत्र की डेढ़ लाख से ज्यादा की आबादी है। फिर भी क्षेत्र में कहीं भी पोस्टमाॅर्टम की सुविधा नहीं है। तहसील एरिया में सिर्फ कोटर में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है। जहां न कोई चिकित्सक रहता है न स्टाफ नर्स। मामूली बात पर सतना जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में क्षेत्र के लोग पीएचसी जाना ही बंद कर दिया है।

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