सांसों का संघर्ष: बीएमसी के आईसीयू में जगह नहीं, 3 से 4 घंटे तक एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट पर इंतजार कर रहे मरीज

सांसों का संघर्ष: बीएमसी के आईसीयू में जगह नहीं, 3 से 4 घंटे तक एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट पर इंतजार कर रहे मरीज


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सागर2 मिनट पहले

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  • कैसे हारेगा कोरोना, सागर में ऑक्सीजन का संकट, निजी अस्पतालों से भी निराश लौट रहे मरीज

कोरोना का संक्रमण बढ़ने के साथ-साथ बीएमसी समेत जिले के सभी कोविड अस्पतालों की स्थिति बिगड़ रही है। अपने मरीज को भर्ती करने के लिए लोग तीन से चार अस्पतालों की चौखट से वापस लौटने के बाद कहीं किसी अस्पताल में पलंग ढूंढ पाते हैं। यदि मरीज की स्थिति बहुत ही ज्यादा गंभीर है तो उन्हें बीएमसी में भी एम्बुलेंस में बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है।

मामले की जानकारी मिलने के बाद जब भास्कर टीम बीएमसी के कोविड अस्पताल के गेट पर पहुंची तो यहां एम्बुलेंस की कतार लगी थी। सभी में गंभीर मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। भोपाल रोड निवासी व्यक्ति ने बताया कि उनके परिजन 44 वर्षीय भाई की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

उन्हें सांस लेने में तकलीफ के चलते सुबह 11 बजे बीएमसी लाए थे। उनका भाई एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट पर है, लेकिन 3 घंटे से स्टाफ उन्हें बाहर खड़ा किए हैं। इनका कहना है कि आईसीयू में बैड नहीं हैं। देवरी निवासी मरीज के परिजन का कहना था कि उनकी 70 वर्षीय मां कोरोना पॉजिटिव हैं। उन्हें देवरी से बीएमसी में भर्ती करने के लिए लाए थे। लेकिन दो घंटे से गेट के बाहर खड़े हैं। आईसीयू में बैड नहीं होने के कारण बीमार मां को एम्बुलेंस में लेकर खड़े हैं।

टाइल्स लगने हैं, इसलिए शुरू नहीं हो रहा आईसीयू
मंत्री से लेकर अफसरों तक बीएमसी प्रबंधन 270 बिस्तर के अस्पताल को 500 बिस्तर का करने के सपने दिखा रहा है। लेकिन हकीकत तो यह है कि प्लानिंग के एक सप्ताह बाद भी इसे अमल में नहीं लाया जा सका। आज बीएमसी के 270 बिस्तर में से सिर्फ एडीयू और आईसोलेशन वार्ड को मिलाकर कुल 10 बैड ही खाली हैं। 37 बिस्तर का आईसीयू फुल है। गुरुवार को स्थिति यह थी कि टॉयलेट की एक दीवार पर टाइल्स लगने हैं और इसमें ठेकेदार का कहना है कि दो दिन लग जाएंगे।

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