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मुरैना5 मिनट पहले
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मुरैना शहर का बस स्टेण्ड
- 200 का आंकड़ा पार कर चुके जिले में कोरोना संक्रमित, लेकिन नहींं सुधर रही व्यवस्थाएं
- अगर शुरु से ध्यान देती तो आज यह नौबत नहीं आती
मुरैना। शहर में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 200 की संख्या पार कर चुका है गत दिवस से एक महिला की मौत के बाद मौत का सिलसिला भी शुरु हो चुका है। इसके बावजूद जिले की पुलिस इस बात को गंभीरता से नहीं ले रही है। सोमवार को पूरे जिले में सम्पूर्ण लॉकडाउन लगा था,बैरियर चौराहे से लेकर रेलवे स्टेशन तक किसी को जाने की इजाजत नहीं थी, उसके बावजूद शहर के बस स्टेण्ड के बगल में मौजूद बैरियर चौराहे पर जहां पूरी तरह बेरीकेट्स लगाकर मुख्य मार्ग को बंद कर दिया गया था वहीं बस स्टेण्ड की तरफ से जाने वाले मार्ग को खोल दिया गया था। सवाल यह है कि जब बस स्टेण्ड वाले मार्ग को ही खोलना था तो मुख्य मार्ग को पूरी तरह ही बंद क्यों किया गया। उस पर भी बैरियर चौराहे पर मौजूद पुलिस अधिकारी आने-जाने वालों से यह कहते नजर आए कि यहां से रास्ता बंद है, बस स्टेण्ड से खुला हैं, वहां से निकल जाएं। नतीजा यह हुआ कि राहगीर निकले तो सही लेकिन, उनको चक्कर लगाकर बस स्टेण्ड वाली रास्ता से जाना पड़ा।
बस स्टेण्ड स्थित बैरियर पर लगा बेरेकेट, व राहगीरों को रोकती पुलिस
यहां पर भी खानापूर्ति
बैरियर चौराहे से अम्बाह मोड़ पुल के पास तक का रास्ता पूरी तरह बंद किया गया था। इसके साथ ही इस रोड पर बीच में दो जगह बेरीकेट लगाए गए थे तथा वहां से वाहनों को नहीं निकलने दिया जा रहा था। लेकिन यहां भी पुलिस की खानापूर्ति देखने में आई। रेलवे स्टेशन या बस स्टेण्ड से ई-रिक्शा चालक सवारियां ले रहे हैं थे तथा कुछ दूर तक रेलवे स्टेशन मार्ग पर चलते हैं, जहां बेरीकेट आ जाता है वहीं से गलियों में घूमाकर रिक्शे को वापस कुछ दूरी पर जाकर जहां बेरीकेट नहीं लगे हैं िफर से स्टेशन रोड पर पहुंच जाते हैं और सवािरयां ढो रहे हैं।
बस स्टेण्ड मुरैना पर खुला बेरीकेट व वहां से निकलते राहगीर
आवागमन पूरी तरह बंद, फिर रिक्शा चालकों को क्यों दी अनुमति
कोरोना संक्रमण के चलते जब शहर भर में लॉकडाउन लगा हुआ है तथा आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यहां तक कि रिक्शों को भी चलने की अनुमति नहीं है तो, सवाल यह उठता है कि कुछ रिक्शों को चलने की अनुमति क्यों दी गई है?
गलियों में सवारियों को ढोते ई-रिक्शा
500 पर पहुंचेगा आंकड़ा
जानकारों की माने तो अगर जिला एवं पुलिस प्रशासन की लापरवाही रही तो जिले में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 500 के पार पहुंच सकता है। अभी केवल उन लोगों के आंकड़े सामने आ रहे हैं जो अपना टेस्ट करा रहे हैं लेकिन गांवों में जो लोग कोरोना से पीड़ित हैं, वे अपना टेस्ट नहीं करा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह उनको कोरंटाइन होने का डर है। कुछ लोगों को यह डर है कि कहीं उन्हें अस्पताल में भर्ती न कर लिया जाए।
जवाब नहीं दे सके सीएसपी
इस संबंध में जब मुरैना शहर के सीएसपी राजेन्द्र रघुवंशी से बात करना चाही तो वह भी कोई माकूल जवाब नहीं दे सके।