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- Special Train Of 20 Isolation Coaches, Two Cylinders Of Oxygen Will Be Kept In Each Coach, 16 Patients Can Be Given Treatment
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उज्जैन3 मिनट पहले
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- बिजली, पानी, प्लेटफॉर्म रेलवे मुहैया करवाएगा, चिकित्सा व स्टाफ प्रशासन की जिम्मेदारी
कोरोना काल में अस्पतालों से मरीज लौटाए जा रहे हैं। ऐसे में रेलवे ने स्पेशल ट्रेन का इंतजाम किया है। इसमें 20 आइसोलेशन कोच हैं। हर कोच में दो ऑक्सीजन सिलेंडर भी हैं। एक समय में 16 मरीजों का ट्रीटमेंट किया जा सकेगा। इसमें बिजली, पानी, प्लेटफॉर्म रेलवे मुहैया करवाएगा जबकि चिकित्सा और उससे जुड़े स्टाफ का इंतजाम जिला प्रशासन को करना होगा।
स्पेशल ट्रेन उज्जैन पहुंच गई है। पश्चिम रेलवे जोन में ऐसे 460 आइसोलेशन कोच हैं। इनमें से 21 कोच को सूरत-जलगांव सेक्शन के नंदुरबार स्टेशन पर कोविड केयर सेंटर बनाया है। उसके लिए रेलवे ने जिला प्रशासन से एमओयू भी किया है। उनमें 20 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डीआरएम का कहना है कलेक्टर के कहने पर उज्जैन में आइसोलेशन कोच भेजा है। जिला प्रशासन से कहा है कि जरूरत पड़ने पर इसे विक्रमनगर स्टेशन पर उपयोग किया जा सकता है।
डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ नहीं
डीआरएम के अनुसार रेलवे आइसोलेशन कोच देने को तैयार है लेकिन रेलवे के पास डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ नहीं है। इनकी व्यवस्था स्थानीय प्रशासन को ही करना होगी। उज्जैन स्टेशन पर यात्रियों का खासा दबाव रहता है ऐसे में उज्जैन स्टेशन पर आइसोलेशन कोचों वाली ट्रेन नहीं खड़ी की जा सकती। वर्तमान में रेलवे के स्थानीय अस्पताल में केवल एक ही डॉक्टर है। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है। जरूरत पड़ने पर उज्जैन से रेलवे के कर्मचारियों को रतलाम के अस्पताल में उपचार के लिए भेजा जाता है।
कोच में ऐसे करना होंगे इंतजाम
रेलवे : आम यात्रियों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए अलग प्लेटफॉर्म व अन्य स्थान, पानी, बिजली और जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन का सिलेंडर।
प्रशासन : डॉक्टर, नर्स के साथ मेडिकल स्टाफ, जरूरी दवाइयां, कोच की सफाई व ऑक्सीजन सिलेंडर की रिफिलिंग।
आइसोलेशन : स्लीपर कोच में से बीच की सीट हटाई, टॉयलेट के हैंडल लंबे लगाए
रेलवे ने आम स्लीपर कोच को आइसोलेशन कोच में बदलने के लिए कुछ बदलाव किए हैं। डीआरएम के अनुसार आम तौर पर एक कंपार्टमेंट में छह बर्थ होती हैं। आइसोलेशन कोच में बीच की बर्थ को हटा दिया है। इसी तरह हर कोच में दो मॉस्किटो रैपेलेंट लगाए हैं। जिससे मच्छरों की समस्या से निजात मिलेगी। टॉयलेट को मोडिफाई कर उसके हैंडल लंबे किए हैं ताकि उसके उपयोग में सुविधा हो। फ्लश को भी ऐसा डिजाइन किया है कि कम पानी में भी काम चलाया जा सके।
उपयोगी : अस्पताल फुल, मरीजों को लौटा रहे
अस्पताल में बेड की कमी से मरीजों को लौटाया जा रहा है। सोमवार-मंगलवार रात आरडी गार्डी कॉलेज से मरीजों का लौटा दिया, जबकि उन्हें इलाज की जरूरत थी। अस्पताल के जिम्मेदारों का तर्क था कि उनके पास ऑक्सीजन संकट है। ऐसे में पहले से भर्ती मरीजों को उपचार दिया है। नए मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे। इसी तरह मंगलवार को माधव नगर अस्पताल से भी मरीजों का लौटना पड़ा। एेसी स्थिति में रेलवे का आइसोलेशन कोच प्रशासन के लिए एक मिनी अस्पताल की तरह उपयोगी हो सकता है।
आइसोलेशन कोच भेजे हैं, जरूरत पड़ने पर उपयोग कर सकते हैं
^जिला प्रशासन के कहने पर रेलवे ने 20 आइसोलेशन कोच का रैक भेजा है। जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सकता है। इसे मुख्य स्टेशन की जगह विक्रमनगर स्टेशन पर रखा जाएगा। वहां पर स्टेशन भी नया और सुविधाजनक है और यात्रियों का दबाव भी कम है। जिला प्रशासन की टीम ने कोच का निरीक्षण भी कर लिया है। एमओयू के बाद वे इसका उपयोग कर सकेंगे।
-विनीत गुप्ता, डीआरएम
200 बेड तैयार रखें
विकट स्थिति को देखते हुए कलेक्टर आशीष सिंह ने रेलवे को 200 बेड की व्यवस्था के लिए कहा था। डीआरएम के अनुसार रतलाम कलेक्टर के पत्र पर स्थानीय तौर पर आइसोलेशन कोच खड़ा किया है। रेलवे के पास इंदौर, उज्जैन और मांगलिया में चार रैक है। एक रैक में 20 कोच हैं। प्रत्येक कोच में 16 मरीजों को रखा जा सकता है। इसे ठीक उसी तरह उपयोग किया जा सकता है जैसे किसी अस्पताल के वार्ड को। इसमें मरीजों की मदद के लिए सुविधाएं जुटाई हैं।