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- Families Of The Infected Patients Said Install CCTV Cameras In The Wards To Curb The Arbitrariness Of The Hospital Staff
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उज्जैन4 मिनट पहले
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- संक्रमण से डरे मरीजों को मनोबल बढ़ाने में सहायक होगी व्यवस्था
सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल इंदौर में भर्ती थे सुनील साहू। चार दिन पहले तक उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था। परिजन आश्वस्त थे, मरीज जल्द डिस्चार्ज हो जाएगा। मगर 19 अप्रैल की शाम 8 बजे तक मोबाइल पर परिजनों से बात करने वाले सुनील दो घंटे बाद ही चल बसे। रात 10 बजे डॉक्टर ने बताया सुनील को बचाया नहीं जा सका। परिजन हैरान हैं कि सबकुछ ठीक होने के बाद ऐसा क्या हुआ जो सुनील ने एकाएक दम तोड़ दिया।
बेटे यवनीश साहू ने बताया उनके पिता 15 दिन से भर्ती थे। गीतांजलि हॉस्पिटल में बाइपेप मशीन न होने पर उन्हें सुपर स्पेशियलिटी में शिफ्ट किया था। मरीज से किसी को मिलने नहीं दिया जाता था। सुनील मोबाइल पर बताते थे कि स्टाफ उन्हें एक गिलास पानी तक के लिए घंटों तरसाता था।
उन्होंने एक बोतल पानी तक के लिए यहां के स्टाफ को एक हजार रुपए तक दिए। तब उन्हें पानी पिलाया गया। यह महज एक उदाहरण है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पतालों में फैली अव्यवस्था के कई उदाहरण ऐसे भी सामने आए कि मरीजों को लगने वाले महंगे इंजेक्शन लगाए ही नहीं गए।
मरीजों के साथ लावारिस की तरह व्यवहार हो रहा है। मरीजों व परिजनों के बीच अविश्वास की बढ़ती खाई के कारण कोविड वार्डों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग निरंतर जोर पकड़ रही है। सोशल मीडिया पर यह अभियान का रूप भी ले चुका है।
उज्जैन के आशुतोष ने बताया कि उनकी पत्नी कोरोना से पीड़ित हैं। मगर अस्पताल नहीं जाना चाहती। घर पर ही उनका इलाज करा रहे हैं। पत्नी का कहना है कि अस्पताल में उसे मार डालेंगे। डॉक्टर्स और अस्पताल स्टाफ पर अविश्वास के कारण ऐसी स्थिति बन रही है। इससे बेहतर है कि प्रशासन हर कोविड सेंटरों को सीसीटीवी कैमरे से लैस करने का आदेश जारी करें।