अगर ऑक्सीजन होती, तो बच जाती दामोदर की जान: जौरा, अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑक्सीजन न होने पर मुरैना कर दिया रैफर, रास्ते में सिसकते हुए दम तोड़ दी दामोदर ने

अगर ऑक्सीजन होती, तो बच जाती दामोदर की जान: जौरा, अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑक्सीजन न होने पर मुरैना कर दिया रैफर, रास्ते में सिसकते हुए दम तोड़ दी दामोदर ने


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मुरैना15 मिनट पहले

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जौरा का शासकीय सामुदायिक केन्�

  • जौरा शासकीय अस्पताल में इलाज न मिलने पर हो रही मौतें

मुरैना(जौरा)। संजय नगर निवासी दामोदर पुत्र नेतराम की तबियत रविवार को अचानक बिगड़ गई। उसको लेकर परिजन कस्बे के सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र लेकर पहुंचे। स्वास्थय केन्द्र पर जब डॉक्टरों ने उसका ऑक्सीजन लेवल देखा तो कम था। दामोदर को तुरंत ऑक्सीजन की जरूरत थी जो स्वास्थय केन्द्र पर नहीं थी। डॉक्टरों ने तुरंत उसे जिला अस्पताल मुरैना के लिए रैफर कर दिया, जहां रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
यह मामला तो ऑक्सीजन की कमी का था। तीन दिन पूर्व शुक्रवार की सुबह ग्वालियर से घर लौट रहे सबलगढ़ निवासी केशव पुरी की हालत जौरा पहुंचते समय बिगड़ी। हालत बिगड़ने पर उसकी पत्नी सुबह 6.30 बजे उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज के लिए लेकर पहुंची। लेकिन ऑन ड्यूटी डॉक्टर ने आधे घंटे तक उन्हें नहीं देखा। इलाज के अभाव में अस्पताल में आधा घंटे तड़पने के बाद केशव पुरी ने दम तोड़ दिया। बाद में डॉक्टर ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि मरीज को देखा था, वह हार्ड अटैक का मरीज था और उसको यहां मृत अवस्था में ही आया था।
करानी पड़ी एंटीजन जांच
बीते 5 दिनों से बीमार चल रही श्रीकृष्ण मंदिर रोड निवासी राहुल बंसल सोमवार को 85 वर्षीय वृद्ध दादी को लेकर अस्पताल पहुंचे। आरटीपीसीआर जांच कराने की कहने पर डॉक्टरों ने उन्हें मुरैना ले जाने की सलाह दी। इस पर वृद्ध के नाती राहुल ने कहा कि शहर के सारे रास्ते बंद हैं। पुलिस वाले गाड़ी भी बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। ऐसे में वे मुरैना कैसे जा सकते हैं। मजबूरन राहुल को एंटीजन जांच करानी पड़ी। जिसमें उनकी दादी को पॉजीटिव बताया गया।
डॉक्टर कह रहे मुरैना जाओ, मरीज हो रहे परेशान
कोरोना काल में सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। कोरोना लक्षण दिखने पर अस्पताल में आरटीपीसीआर कोरोना जांच नहीं की जा रही है। डॉक्टर मरीजों को जिला अस्पताल जाने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में मरीजों को कोरोना कर्फ्यू के दौरान न केवल आने-जाने में परेशानी हो रही है, बल्कि आर्थिक संकट से भी जूझना पड़ रहा है। खास बात यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में खांसी, बुखार व कोरोना के अन्य लक्षण वाले मरीजों को भी समुचित इलाज नहीं मिल रहा है।

कस्बे के एक निजी डॉक्टर के क्लीनिक पर लगी भीड़

कस्बे के एक निजी डॉक्टर के क्लीनिक पर लगी भीड़

निजी क्लीनिकों पर लग रही मरीजों की भीड़
जब लोगों को सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र पर इलाज नहीं मिल रहा है, तो वह निजी डॉक्टरों की क्लीनिकों पर जा रहे हैं। इससे वहां भीड़ लगना शुरु हो गई है। लोगों का शासकीय व्यवस्थाओं पर से विश्वास उठता जा रहा है। सरकारी अस्पताल में लोगों को समुचित इलाज एवं सुविधाएं नहीं मिलने के चलते इन दिनों लोग कस्बे के निजी चिकित्सकों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। एक सप्ताह पूर्व उल्टी, दस्त और शरीर में हरारत होने की शिकायत को लेकर अपने भाई को लेकर इलाज के लिए गिर्राज नामदेव अस्पताल पहुंचे। गिर्राज के मुताबिक अस्पताल में डॉक्टर मरीज को ढंग से परामर्श नहीं दे रहे हैं। दो दिन दवाई लेने के बाद जब कोई आराम नहीं मिला तो उन्होंने एक निजी चिकित्सक से परामर्श लिया।

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