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हाेशंगाबाद2 मिनट पहले
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बीमार किशोरी को सड़क किनारे ड्राप लागकर इलाज करते हुए।
- सरकारी इंतजाम केवल इतने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम बांट रही दवा
गांवों में कोरोना का कहर तो है ही पर इससे कहीं ज्यादा खतरा चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था से है। 2100 की आबादी वाले हरदा के रोलगांव में 20 दिन में 32 माैतें हुई। होशंगाबाद जिले के गांवों की हालत भी अच्छी नहीं हैं। बनखेड़ी के मल्हनवाड़ा में स्थिति सामान्य नहीं है। करीब 3500 की आबादी वाले इस गांव में 20 दिनों में 15 लोगों की संदिग्ध मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य कर्मियों की दूसरी जगह ड्यूटी लगा देने से ग्रामीण अंचलों के स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले डले हैं। सरकारी अस्पतालों में भीड़ होने और पलंग खाली नहीं हो से ग्रामीण अंचल के लोग झोलाछाप से इलाज करा रहे हैं। ऐसे में सर्दी, खांसी और बुखार के कोरोना संदिग्ध लोगों के सामने इलाज की मुश्किल है। पिपरिया के दूरस्थ गांवों में कोरोना का प्रकोप नहीं है। ग्रामीणों ने भी शहर से दूरी बना ली है।
बनखेड़ी: चक्कर से गिरी युवती, सड़क किनारे लगाई ड्रिप
बनखेड़ी। मल्हनवाड़ा गांव में करीब 755 परिवार हैं। सरकारी अस्पताल की सुविधा के लिए मरीजों को करीब 12 किमी का सफर तय करना होता है। गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। उपस्वास्थ्य केंद्र परसवाड़ा लगता है। यहां की एएनएम भी कोरोना संक्रमित है। गांव में दो झोलाछाप हैं। शनिवार को प्रशासन की टीम पहुंची तो झोलाछापों ने भी अपनी दुकानें बंद कर दी। गांव में इलाज न मिलने पर सलैया फज्जू की 17 वर्षीय साधना पिता लखन लोधी चक्कर खाकर सड़क किनारे गिर गई।
एक झोलाछाप ने बॉटल लगाकर प्राथमिक उपचार दिया और शासकीय अस्पताल जाने की सलाह दी। दर्जनों गांव के ग्रामीण इन्ही झोलाछापों के भरोसे है। शुक्रवार-शनिवार को सरपंच सहित चार लोगों की मौत से हड़कंप मच गया। गांव में केवल सैनिटाइजर किया। बाकी संक्रमितों की पड़ताल तक नहीं की। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सर्वे कर रही हैं- 19 परिवार में सर्दी-खांसी एवं बुखार के मरीज मिले।
पिपरिया: शहर से सटे कई गांवों में ज्यादा संक्रमण
पिपरिया| शहर से सटे अधिकतर गांवों में कोरोना संक्रमण फैला है। जनपद क्षेत्र के दूरदराज इलाके में स्थित अनेक ग्राम ऐसे हैं जहां कोरोना वायरस संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया है। हथवास के सचिव मेहरबान सिंह ने बताया स्थानीय लोगों का पिपरिया के बाजार में आवागमन होता है जिसके चलते शुरुआती दौर में गांव में संक्रमण के काफी अधिक मामले सामने आए।
समय रहते ग्रामीणों ने समझदारी दिखाई और धीरे-धीरे स्वयं को आइसोलेट करना शुरू कर दिया। वर्तमान में ग्रामीण इलाकों में 63 एक्टिव केस हैं जिनमें से 13 अस्पताल में भर्ती हैं और 50 होम आइसोलेट हैं। जनपद सीईओ शिवानी मिश्रा ने बताया इनमें से 90 ग्राम ऐसे हैं जहां कोरोना संक्रमण का एक भी मामला नहीं है।
सोहागपुर: 48 गांवों में 2 हफ्ते में 60 लोगोंं की मौतें
सोहागपुर| शोभापुर गांव संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित रहा। शोभापुर सहित उससे जुड़े करीब 4 दर्जन गांव में 2 हफ्ते में 60 से अधिक लोगों की मौतें हुई। इनमें अधिकांश संदिग्ध मरीज थे जिनकी मौत ऑक्सीजन की कमी शुगर लेवल बढ़ने एवं हार्ट अटैक से मौत होना बताया जा रहा है। माझा गांव में दो लोगों की मौत भिलाड़िया में 7 एवं गोपालपुर में 7 लोगों की मौत हुई है।
3 दर्जन मौतें सिर्फ शोभापुर में हुई हालांकि प्रशासनिक रिकॉर्ड में कोरोना से चार-पांच मौत बताई जा रही है। शोभापुर उप स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी डॉक्टर नहीं है। यहां के डॉ. सुनील निगम की ड्यूटी सोहागपुर कोविड अस्पताल और आयुष डॉ. संदीप रघुवंशी की ड्यूटी पिपरिया के शासकीय अस्पताल में लगा दी गई है। डॉक्टर नहीं होने से व्यवस्थाएं एमपीडब्ल्यू सुपरवाइजर एवं एएनएम देख रहे हैं।