वनकर्मी के बलिदान को नहीं किया याद: जंगल की आग बुझाते समय तबीयत बिगड़ने से दो दिन पहले मौत, परिजन बोले- फर्ज निभाते हुई मृत्यु, शहीद का दर्जा मिले

वनकर्मी के बलिदान को नहीं किया याद: जंगल की आग बुझाते समय तबीयत बिगड़ने से दो दिन पहले मौत, परिजन बोले- फर्ज निभाते हुई मृत्यु, शहीद का दर्जा मिले


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होशंगाबाद43 मिनट पहले

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परिवार के साथ (लाल कपड़े पहने) वनरक्षक राज परीक्षित भट्‌ट।

सरकार के राजस्व का वन महत्वपूर्ण अंग होता है, लेकिन उसी जंगलों की रक्षा करने वाले कर्मचारियों की हमेशा उपेक्षा होती है। ताजा मामला होशंगाबाद के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) में दो दिन पहले का है।

पूर्व पचमढ़ी रेंज के जंगल में आग बुझाते समय वन रक्षक राज परीक्षित भट्‌ट की तबीयत खराब हो गई थी। इसके बाद उनकी मौत हो गई। दो दिन बाद भी प्रदेश स्तर से सरकार, वन विभाग और जनप्रतिनिधि की ओर से संवेदना नहीं जताई। वन रक्षकों के बलिदान को अनदेखा करना अन्य वनकर्मियों का मनोबल कम करता है। इधर, वनरक्षक के परिजनों ने उनके बेटे को शहीद का दर्जा देने की मांग की है।

झाड़ियों से आग बुझाने के बाद बिगड़ी तबीयत

पूर्व पचमढ़ी रेंज के चाखड़ बीट में वनरक्षक भट्‌ट पदस्थ था। सूत्रों ने बताया, 5 मई बुधवार दोपहर करीब 3.30 बजे चाखड़ बीट में आग लगने की सूचना मिली। राज परीक्षित चाखड़ बीट नाके पर था। वनरक्षक फायर वाजर सुरक्षा श्रमिकों के साथ आग बुझाने गए। करीब एक एकड़ के क्षेत्र में आग फैली थी। हरी झाड़ियों से वनरक्षक, सुरक्षा श्रमिक और फायर वाजर मिलकर आग बुझाने लगे। करीब आधा घंटे में आग पर काबू पा लिया।

उसी दौरान, राज परीक्षित की तबीयत बिगड़ी, वह उल्टी करने लगे। उन्हें मटकुली अस्पताल ले गए और रेंजर व एसडीओ को सूचना दी। गंभीर स्थिति होने से उसे पिपरिया ले गए, लेकिन उससे पहले ही मृत्यु हो गई।

परिवार में बेटी, पत्नी, भाई और मां

34 वर्षीय वनरक्षक राज परीक्षित को वन विभाग में नौकरी करते 15 साल हो गए थे। पिता भी डिप्टी रेंजर थे। पिता के देहांत होने पर राज परीक्षित को अनुकंपा नौकरी मिली। परिवार में बुजुर्ग मां, पत्नी, छोटा भाई और ढाई साल की बेटी है। उनका मूल रहवास इटारसी है। परीक्षित के जाने के बाद घर में मायूसी छा गई। परिवार के सदस्यों के चेहरे से खुशियां ही गायब हो गई।

परिजन ने शहीद का दर्जा देने की मांग

वनरक्षक के परिजनों ने मांग की, राज परीक्षित को शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। जंगल को बचाने के दौरान फर्ज निभाते हुए मृत्यु हुई।

हार्टअटैक से मृत्यु की पुष्टि

एसटीआर पचमढ़ी के एसडीओ संजीव शर्मा का कहना है, आग बुझाने के बाद वनरक्षक की तबीयत बिगड़ी। तबीयत में सुधार न होने पर अचेत अवस्था में पिपरिया ले जाया गया, लेकिन उससे पहले ही मृत्यु हो गई। वनरक्षक की मृत्यु हार्टअटैक से हुई है। वनरक्षक भट्‌ट अच्छे कर्मचारियों में से एक था।

वनरक्षक को खोने का दु:ख है

क्षेत्र संचालक एल कृष्णमूर्ति ने बताया, वनरक्षक ऑन ड्यटी था। मैं उस दिन पिपरिया क्षेत्र में था। जैसे ही जानकारी मिली, स्टाफ व मैं अस्पताल पहुंचे। उनके परिवार के सदस्यों के साथ हमारे दो कर्मचारी को शव लेकर इटारसी तक भेजा। वरिष्ठ अधिकारियों को मृत्यु की सूचना दे दी। वनरक्षक को खोने का हमें दु:ख है कि हमारा एक युवा कर्मचारी कम हुआ। हमारी संवेदना उनके परिवार के साथ है। कागजी कार्रवाई शीघ्र पूरी कर मदद करेंगे।

बालाघाट में गार्ड की मृत्यु पर एसोसिएशन के ट्वीट के बाद सीएम ने जताया था शोक

पिछले महीने बालाघाट में फॉरेस्ट गार्ड सूर्यप्रकाश येड़े की जंगल में लगी आग बुझाते तबीयत बिगड़ने पर मौत हो गई थी। विभागीय तौर व सरकार की ओर से संवेदना प्रकट नहीं हुई। आईएफएस एसोसिएशन के ट्वीट के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने संवेदना जताई थी।

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