हेल्पलाइन 104: हेल्थ से जुड़ी हेल्पलाइन पर बेरोजगारी और परिवार की चिंता को लेकर कॉल

हेल्पलाइन 104: हेल्थ से जुड़ी हेल्पलाइन पर बेरोजगारी और परिवार की चिंता को लेकर कॉल


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भोपाल18 मिनट पहले

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  • रोज पहुंचने वाले कॉल्स की संख्या 40 फीसदी बढ़ी, ज्यादातर को कोरोना से बिगड़े हालात में भविष्य की चिंता

ये कुछ ऐसे मामले हैं, जो काेरोना कर्फ्यू के दौरान लाेग हेल्पलाइन नंबर 104 पर फोन लगाकर पूछ रहे हैं। काउंसलर्स के मुताबिक रोज ऐसे 25-30 कॉल आते हैं। लोग कोरोना को लेकर बहुत डरे हुए हैं। कोरोना की वजह से कहीं उनके परिवार में किसी को कुछ हो न जाए। दवा मिलेगी या नहीं, अस्पताल में बेड मिलेंगे कि नहीं, कमाई हो नहीं रही और खर्चे लगातार चालू हैं जैसी चिंता लोगों को सता रही है। काउंसलर्स के मुताबिक ऐसे मामले 40 फीसदी तक बढ़ गए हैं। कॉल करने वाले अधिकतर लोगों की चिंता इस बात को लेकर है कि अगर ऐसी परिस्थितियां लंबी चली तो क्या होगा? किराया कैसे देंगे, घर कैसे चलाएंगे।

काउंसलर दे रहे सलाह… सोच को पॉजिटिव रखें, सोशल मीडिया से दूरी बनाएं

काउंसलर्स ने बताया कि अब लाेग कोरोना के बारे में जान चुके हैं कि क्या सावधानी रखना है, लेकिन बहुत से लोग मनोवैज्ञानिक रूप से परेशान हैं। उन्हें पूरी स्थिति समझने के बाद सलाह दी जा रही है, लेकिन सभी को प्रमुख रूप से यह सलाह दे रहे हैं कि सोच को पॉजिटिव रखें। धार्मिक, प्रेरणादायी किताबें पढ़ें। जो काम अच्छा लगता है. उसमें स्वयं को व्यस्त रखें।

सोशल मीडिया से सबसे ज्यादा निगेटिव सूचनाएं मिलती हैं, इसलिए इसका उपयोग कम करें। अगर लगातार इसी पर व्यस्त रहेंगे तो इस समय दुखद और परेशानी वाली सूचनाएं आ रही हैं, जो कई बार स्थायी रूप से घर कर जाती हैं। परिवार के साथ अच्छा समय बिताएं। बच्चों को पढ़ाएं। कुकिंग करें, घर के काम में व्यस्त रहें। ऐसे विचारों से बचें, जो परेशान करते हैं। मेडिटेशन, योगा आदि करें। बागवानी का शौक है तो वह करें।
नौकरी को लेकर भी सवाल -काउंसलर्स ने बताया कि कई काॅल ऐसे भी आए हैं, जिसमें पूछा गया कि पिछले साल लॉकडाउन में बहुत लोग बेरोजगार हो गए थे। अब ऐसी स्थिति तो नहीं होगी। कब तक कोरोना की ऐसी परिस्थिति रहेगी।

अज्ञात भय भी – कांउसलर्स के मुताबिक कई काल ऐसे भी आए हैं, जिसमें लोगों ने बताया कि उन्हें सुबह बेचैनी होती है। निगेटिव विचार मन में आते हैं। आसपास हो रही घटनाओं से भय पैदा हो रहा है कि कहीं उनके परिवार में भी ऐसा न हो। दूसरे शहरों में रहने वाले सगे संबंधियों को लेकर डर लगता है कि कहीं उन्हें कुछ न हो जाए।

कोरोना के कारण; पैनिक अटैक, चिंता के मामले ज्यादा आ रहे, लोग घबरा रहे हैं…
^मेरे पास कोरोना से जुड़ीं परेशानियों के केस 40 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ गए हैं। इसमें पैनिक अटैक, चिंता आदि के बहुत मामले हैं। लोग घबरा रहे हैं। जो लोग होम आइसोशन में हैं वे गाने सुनें, अपने दोस्तों से बात करें। सोशल मीडिया के मैसेज पर ध्यान न दें। वे यह न साेचें कि वे बीमार हैं, सोच का बहुत असर पड़ता है। पॉजिटिव रहें और रूटीन के काम करें।
डॉ. काकोली रॉय, सायकोलॉजिस्ट

​​​​​​​जानिए… लोगों की चिंता

  • मेरे मम्मी-पापा कोरोना की वजह से एडमिट हैं। लोगों को दवाएं नहीं मिल रही हैं। कहीं ऐसा तो नहीं होगा कि उन्हें भी दवा न मिले और कुछ हो जाए। मेरे दोस्त के यहां ऐसा हुआ था।
  • भोपाल के एक युवक के पिता की हाल ही में मृत्यु हुई है। अब युवक को लग रहा है कि अगर वह उन्हें जल्दी अस्पताल में भर्ती करवा देता तो उनकी जान बच सकती थी। अब वह इसके लिए खुद काे दोषी मान रहा है।
  • कोरोना की वजह से दुकान बंद है। किराया और अन्य खर्चे बराबर चल रहे हैं। मेरी इतनी कमाई नहीं है कि बैठकर पूरा खर्च चलता रहे। ऐसे में मैं क्या करूंगा। घर में मैं ही अकेला कमाने वाला हूं।
  • कोरोना की वजह से भयानक स्थिति बन रही है। लोग अपने परिचितों, संबंधियों को खो रहे हैं। मन में अजीब भय बना हुआ है। कब तक ऐसा चलेगा। सोच-सोचकर बहुत परेशान हो जाता हूं।

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