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- Three Cases Of Black Fungus Found In Balaghat, Doctors Said Do Not Delay Treatment If You See Symptoms
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बालाघाट4 घंटे पहले
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प्रतीकात्मक फोटो
कोरोना ठीक होने के बाद पीछा नहीं छोड़ रहा है। कोरोना को हराने वाले मरीज अब नई बीमारी से जूझ रहे हैं। इसका नाम है ब्लैक फंगस। डॉक्टर्स से मिली जानकारी के अनुसार बालाघाट जिले में ब्लैक फंगस के तीन मरीज मिले हैं। इनमें एक मरीज मंगलवार को मिला है, जो आठ दिन पहले ही कोरोना से ठीक हुआ था। जबकि अन्य दो मरीज एक महीने पहले गोंदिया स्थित एक अस्पताल में कोरोना से ठीक होकर घर लौटे थे, लेकिन आंखों में तकलीफ के बाद उनका चेकअप कराया गया, जिसमें उन्हें ब्लैक फंगस होना बताया गया है। दोनों ही मरीजों की आंखों और जबड़ों का ऑपरेशन किया जा रहा है।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीएम शरणागत ने बताया कि मंगलवार को ब्लैक फंगस का एक मरीज मिला है, जिसका इलाज चल रहा है। ये एक फंगस डिसीज है, जो म्यूकॉरमाइटिसिस नामक फंगाइल से होता है। ये बीमारी कोरोना से ठीक होने वाले या सामान्य व्यक्ति दोनों को हो सकती है। इसलिए सभी लोगों को लक्षण, कारण और रोकथाम से जुड़ी जानकारी होना जरूरी है। यह बीमारी इतनी खतरानाक है कि इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति की जान बचाने के लिए उनकी आंखें तक निकालनी पड़ती है।
ये लक्षण दिखे तो तुरंत इलाज शुरू करें
विशेषज्ञ ब्लैक फंगस के लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज कराने की सलाह दे रहे हैं। डॉ. शरणागत ने बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद मरीज को सिर दर्द हो, नाक और आंख में जलन हो, सांस लेने में तकलीफ हो तो ये ब्लैक फंगस हो सकता है। इसे सामान्य बीमारी समझकर देरी न करें क्योंकि देरी करने पर यह फंगस इंफेक्शन आंखों को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा अगर आंखों के नीचे या आसपास सूजन महसूस हो, दर्द हो, आंखें लाल होने लगे, नाक के पास भी सूजन या दर्द बनता हो, कम दिखाई देता हो, नाक बंद होना, उल्टी आना, चेस्ट पेन तो तुरंत इसकी जांच कराएं।
लंबे समय से दवा लेने वाले या डायबिटिक पेशेंट अलर्ट रहें
नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. विजय गांधी के मुताबिक, जो व्यक्ति लंबे समय से दवाई ले रहा है या ऑक्सीजन सपोर्ट के लिए नाक में पाइप लगाए रखते हैं, उन्हें ब्लैक फंगस होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा जिन्हें कैंसर है, जिनका ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुआ है, जो लंबे समय से स्टेरॉइड ले रहे हैं, उन्हें भी खतरा रहता है। लंबे समय से दवाइयां लेने से शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है और ये फंगस कमजोर इम्युनिटी वाले शरीर पर जल्द हमला करता है। ये इंफेक्शन साइनस से होते हुए आंखों तक पहुंच जाता है और आंखों में फैलकर नुकसान पहुंचाता है।
धूल से बचकर रहें ऐसे मरीज
डॉ. बीएम शरणागत ने बताया कि जिन मरीजों को ब्लैक फंगस होता है, उनका इलाज संभव है। ऐसी स्थिति में उन्हें एंटी फंगल मेडिसिन दी जाती है। लेकिन लापरवाही करने पर ये बीमारी घातक भी हो सकती है। ऐसे मरीज धूल यानी डस्ट से दूर रहें तो बेहतर होगा।