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- Charged Laborers And Tractor Owners; Illegal Blasts, Those Working In The Resident Area Without Permission Are Under Investigation…
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उज्जैन13 मिनट पहले
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लक्ष्मण पंवार
कालूखेड़ी ग्राम में कुआं निर्माण की ब्लास्टिंग से उछले पत्थर से हुई उपार्जन केंद्र के प्रभारी लक्ष्मण सिंह पंवार की मौत के मामले में घट्टिया थाना पुलिस ने गुरुवार को ट्रैक्टर मालिक सहित तीन मजदूरों के खिलाफ धारा 304 में एफआईआर दर्ज कर दी।
जबकि अवैध ब्लास्टिंग को करवाने वाले वास्तविक दोषी अभी कार्रवाई के दायरे से बचे हुए हैं। इससे मृतक के परिजनों में रोष है। हालांकि टीआई ने दावा किया है कि मामला जांच में हैं, आगे चलकर आरोपी बढ़ सकते हैं। गौरतलब है कि सोमवार दोपहर ग्राम कालूखेड़ी में गेहूं उपार्जन केंद्र व भंडारगृह के पास ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा सामुदायिक कुआं निर्माण के नाम पर ब्लास्टिंग की जा रही थी। ब्लास्टिंग से एक बड़ा पत्थर उछलकर यहां के गोडाउन से सटे दफ्तर की चद्दर फोड़ते हुए नीचे बैठे लक्ष्मण सिंह पंवार के सिर पर लगा था, जिससे उनकी मौत हो गई।
पंवार निपानिया गोयल सेवा सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक व उपार्जन केन्द्र के प्रभारी थे। मृतक के परिजन व गांव के पूर्व सरपंच भगवान सिंह पंवार ने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन मामले के वास्तविक दोषियों का बचाव कर मजदूरों को फंसा रहे हैं। इधर घट्टिया थाना टीआई विपिन बाथम के अनुसार अभी ट्रैक्टर मालिक सहित तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर की है। मामला अभी जांच में है, आगे इसमें और दोषियों के नाम जुड़ सकते हैं।
घटना के बाद ही सक्रिय हो गए थे मुख्य जिम्मेदार, मजदूरों को फंसवा दिया
कुआं निर्माण के लिए यह ब्लास्टिंग सरपंच व सचिव के मार्गदर्शन में हाे रहा था। लिहाजा सही मायने में मामले में इनके सहित अन्य सभी जिम्मेदारों पर एफआईआर होना थी। लेकिन घटना के बाद से ही यह जिम्मेदार स्वयं को बचाने के लिए सक्रिय हो गए थे।
जैसा कि मामले में पहले से ही अंदेशा जताया जा रहा था कि यह लोग राजनीतिक दबाव व धन बल के दम पर मामले को दबाने तथा उसे नया मोड़ देने के प्रयास कर रहे हैं। गुरुवार को उक्त मामले में घट्टिया थाना पुलिस ने मजदूर हाकम सिंह पिता भंवर सिंह राजपूत, मंगल पिता हाकम सिंह राजपूत व ट्रैक्टर क्रमांक एमपी 13 ए बी 8649 के चालक दूलेसिंह पिता रायसिंह राजपूत सभी निवासी ग्राम रलायती के खिलाफ धारा 304 के तहत प्रकरण दर्ज किया।
चर्चा है कि मामले के मुख्य दोषी लोगों ने स्वयं को बचाने व मजदूरों पर एफआईआर दर्ज करवाने के लिए काफी जोड़तोड़ की है। एफआईआर सहायक उप निरीक्षक एलसी शर्मा की सूचना व शिकायत पर की गई है।
घटना को लेकर खड़े हो रहे हैं कई सवाल
एसडीएम गोविंद दुबे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उक्त ब्लास्टिंग के लिए कोई परमिशन नहीं ली गई थी तो क्या यह कार्य करवा रहे सरपंच व सचिव सहित अन्य जिम्मेदार दोषी नहीं हैं। {क्या ये ब्लास्टिंग तय मापदंडों के अनुरूप आबादी क्षेत्र से निश्चित दूरी पर किया जा रहा था।
चर्चा है कि गोडाउन से करीब 250 फीट व गांव से आधा किमी की दूरी पर ही ब्लास्टिंग किया गया था। यदि नियम की अनदेखी की गई तो पंचायत के व तकनीकी रूप से जुड़े अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार क्यों नहीं? {अब तक मामले में मजिस्ट्रीयल या विभागीय जांच शुरू नहीं हुई। क्योंकि प्रथम दृष्ट्या तो यह मामला राजस्व के नियमों की अनदेखी का ही है।
बुरा मत देखो
…इसलिए घटनास्थल की हकीकत किसी को नजर नहीं आई। ब्लास्ट पास में ही हो रहा था, जिसकी अनुमति नहीं थी। तेज रफ्तार से आए पत्थर से फटी चद्दर और कुएं की खुदाई के लिए जिम्मेदार सरपंच और सचिव। मशीन मालिक भी नहीं दिख रहा।
बुरा मत सुनो
…इसलिए परिवार वालों का दर्द और उनके आरोप सुनाई नहीं दे रहे। बयानों पर जोर नहीं दिया गया। दिन में ही ब्लास्ट हो रहे थे लेकिन जिम्मेदारों के कानों तक आवाज नहीं गई। यही नहीं, आरोपियों के नाम सरेआम लिए जा रहे हैं… लेकिन किसी को सुनाई नहीं दे रहे।
बुरा मत कहो
…इसलिए सिर्फ वो मजदूर और ट्रैक्टर मालिक आरोपी बनाए गए, जो आदेशों का पालन कर रहे थे। उन्हें कुछ नहीं कहा- जिनकी जमीन है, जिन्होंने कुआं खुदवाने का आदेश दिया। कारण एक ही है- राजनीति। उसके आगे ये पहले भी कुछ नहीं कर पाए। अब भी चुप ही रह जाएंगे।