कोरोना कहर के बीच खुशी के पल: 25 साल की 120 सेमी लंबी अंतरबेन की दाहोद में डिलीवरी, 2.9 किलोग्राम की स्वस्थ बेटी को दिया जन्म

कोरोना कहर के बीच खुशी के पल: 25 साल की 120 सेमी लंबी अंतरबेन की दाहोद में डिलीवरी, 2.9 किलोग्राम की स्वस्थ बेटी को दिया जन्म


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झाबुआ13 घंटे पहले

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  • आलीराजपुर के बोरी के पास कोल्याबयड़ा की हैं महिला, कई अस्पतालों ने उपचार से इनकार कर दिया था

महज 120 सेंटीमीटर ऊंचाई वाली महिला ने अपने बुलंद हौसले से एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। महिला की ऊंचाई कम, पीठ पर एक गठान और कोरोना के कहर में डॉक्टर्स की कमी। परिवार के लोगों किसी तरह उसे गुजरात के दाहोद ले गए। वहां भी कुछ अस्पताल ने तो इलाज से ही इनकार कर दिया। बाद में एक अस्पताल में कम ऊंचाई वाली इस महिला की डिलीवरी करवाई गई।

आलीराजपुर जिले के बोरी के पास के गांव कोल्याबयड़ा की रहने वाली 25 साल की अंतरबेन पति कैलाश डाबर का कद महज 120 सेंटीमीटर है। छोटा कद होने के साथ पीठ पर बड़ी गठान भी है। 10 मई की रात परिवार वाले गंभीर स्थिति में गुजरात के दाहोद ले गए। उनके गर्भधारण को 9 महीने पूरे हो चुके थे और सामान्य प्रसूति नहीं हो पा रही थी। यहां-वहां भटकने के बाद आखिर में पड़वाल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के डॉ. राहुल पड़वाल ने अपनी टीम के साथ डिलीवरी कराई। अंतरबेन ने 2.9 किलोग्राम की स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। गुरुवार को अस्पताल से छुट्‌टी मिल गई और झाबुआ से गई सरकारी एंबुलेंस से उन्हें घर भेज दिया गया।

पूरे वनवासी अंचल में इतनी कम लंबाई की किसी महिला की डिलीवरी होने का यह संभवत: पहला मामला है। ऑपरेशन करने वाले डॉ. राहुल पड़वाल ने बताया, अब तक 108 सेंटीमीटर की महिला की डिलीवरी कराने का विश्व रिकॉर्ड है। इस मामले में गर्भ पूरे 9 महीने का था। 74 सेंटीमीटर कद की महिला की भी डिलीवरी हो चुकी है, लेकिन उसके दोनों पैर नहीं थे। अंतरबेन के पैरों का नाप अलग किया जाए तो लंबाई 74 सेंटीमीटर से भी कम है। इस तरह के केस 40 हजार में से एक बार आते हैं। ये केस बोरी के डॉ. दलाल ने भेजा था।

जल्दी थी, इसलिए न कोरोना जांच न ब्लड टेस्ट
डॉ. पड़वाल ने बताया, रात 2 बजे अंतरबेन को अस्पताल लाया गया। उनकी सांस काफी तेज चल रही थी। इससे ये आशंका हुई कि उन्हें कोरोना हो सकता है। लेबर पैन लगातार हो रहा था। ऐसे में इतना समय नहीं था कि कोरोना जांच की जाए और ब्लड टेस्ट भी। हमने फौरन ऑपरेशन करना तय किया। दो घंटे और निकल जाते तो मां और शिशु दोनों की जान चली जाती। गर्भाशय फटने की स्थिति में आ जाता।

कम कद के कारण समस्या ज्यादा
अंतरबेन का कद कम होने से प्रसूति में कई सारी दिक्कत थी। पीठ पर बड़ी गठान होने से सर्जरी के लिए बेहोशी का इंजेक्शन लगाने में भी परेशानी थी। ये पता नहीं था कि वो शरीर के किन अंदरूनी हिस्सों से जुड़ी है। एमआरआई का समय नहीं था। कद कम होने से रास्ता भी नहीं खुल पा रहा था।

एंबुलेंस वाले छोड़ गए थे
डॉ. पड़वाल ने बताया, दाहोद के जायडस सिविल असपताल में एंबुलेंस वाले महिला और उसके परिवार को छोड़कर चले गए थे। वहां उस समय ऑपरेशन संभव नहीं था, क्योंकि कोरोना मरीज भर्ती थे। महिला में कोरोना के लक्षण भी दिख रहे थे। वहां एक सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें यहां के अस्पताल में भेजा।

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