पता चल गया कहां से शुरू हुई खुरचन मिठाई, खा लिया तो भूल जाएंगे रबड़ी मलाई! यहां 3 KM में बस इसकी दुकानें

पता चल गया कहां से शुरू हुई खुरचन मिठाई, खा लिया तो भूल जाएंगे रबड़ी मलाई! यहां 3  KM में बस इसकी दुकानें


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Khurchan Sweet: सतना के रामपुर में खुरचन मिठाई की शुरुआत बताई जाती है. लेकिन, जहां से मिठाई शुरू हुई और जो स्थिति है, इसकी कहानी बेहद रोचक है. जानें

हाइलाइट्स

  • रामपुर बघेलान की खुरचन मिठाई 70 साल से प्रसिद्ध है
  • खुरचन 500 से अधिक लोगों की आजीविका का साधन है
  • खुरचन मिठाई शुद्ध दूध, चीनी और इलायची से बनती है

Satna News: क्या आपने खुचरन एमपी की खुरचन मिठाई खाई है? सतना के रामपुर बघेलान क्षेत्र की गलियों से निकलकर देश-विदेश तक इसकी मिठास पहुंच चुकी है. खुरचन मिठाई आज न केवल एक स्वादिष्ट परंपरा है, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोज़गार का माध्यम भी. शुद्ध दूध, बारीक चीनी और इलायची के जादू से बनने वाली यह मिठाई 70 साल से विंध्य की खास पहचान बनी हुई है.

रामपुर की पहचान बनी खुरचन मार्केट
रामपुर की सीमा में प्रवेश करने से पहले ही हाईवे के दोनों किनारों पर दुकानें दिखती हैं. इन दुकानों से स्पष्ट हो जाता है कि रामपुर आने वाला है. करीब 2 से 3 किलोमीटर पहले ही खुरचन की मिठास यात्रियों का ध्यान आकर्षित करने लगती है. यह बाजार अब इतना लोकप्रिय हो गया कि यहां से आने-जाने वाले लोग इस मिठाई को खरीदना नहीं भूलते.

ऐसे बनती है खुरचन
लोकल 18 से बातचीत में वर्षों से खुरचन बेच रहे करुंदेंद्र सिंह पटेल ने इसकी निर्माण विधि बताई. कहा, खुरचन बनाने के लिए तीन कड़ाही एक साथ चूल्हे पर रखी जाती है. प्रत्येक कड़ाही में लगभग एक पाव दूध डाला जाता है. जब दूध जलकर कड़ाही में चिपक जाता है तो उस जले हुए मलाईदार हिस्से को खुरच-खुरच कर निकाल लिया जाता है. इस खुरच को परत-दर-परत जमा कर उसमें हल्की शक्कर मिलाई जाती है. यही प्रक्रिया स्वादिष्ट खुरचन मिठाई को जन्म देती है.

50 साल पुराना बाजार
खुरचन का व्यवसाय रामपुर में बीते 50-60 से अधिक वर्षों से चल रहा है. लेकिन, हाईवे किनारे लगने वाली दुकानों की परंपरा करीब 25 वर्षों पहले शुरू हुई थी. बेरोजगारी बढ़ने के साथ ही स्थानीय लोगों को इसमें अच्छा मुनाफा दिखाई दिया. धीरे-धीरे रामपुर के हर उस परिवार ने इस व्यवसाय को अपनाया, जिसके पास दूध की उपलब्धता थी. आज यहां लगभग 500 से अधिक लोग खुरचन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं.

खारी गांव से निकली मिठास की परंपरा
करुंदेंद्र सिंह ने बताया कि रामपुर के पास बसे खारी गांव में 90 साल पहले एक पंडित जी ने इस मिठाई को बनाना शुरू किया था. उन्होंने यह विधि अपने पूर्वजों से सीखी थी. बाद में गांव के अन्य लोगों को भी सिखाई. यही खुरचन धीरे-धीरे आसपास के क्षेत्रों में लोकप्रिय हुई. होटल-ढाबों से होते हुए अब गली-गली में बिक रही है. आज रामपुर के अलावा नेमुआ, खारी, तपा जैसे गांवों के लोग भी इस पारंपरिक व्यवसाय का हिस्सा बन चुके हैं. यह मिठाई न केवल स्वाद का पर्याय है, बल्कि विंध्य क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए आजीविका का मजबूत आधार भी बन चुकी है.

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