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अगर आप भी अजब गजब चीजों के खाने के शौकीन है तो भोपाल के जनजातीय संग्रहालय में लुत्फ उठा सकते हैं. यहां आदिवासी व्यंजन की भरमार है
मध्य प्रदेश में गोंड, भील, कोरकू, बैगा, सहारिया, कोल और भारिया जननातियों के लोग निवास करते हैं. इनका भोजन भी अपने आप में अलग होता है. हम आपको बताएंगे कि भील, गौंड, बैगा और कोरकू समुदाय का आदिवासी व्यंजन, जो कि जनजातीय संग्रहालय में पर्यटकों को सर्व किया जा रहा है.

भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित जनजातीय संग्रहालय में कुछ ऐसे ही अनोखे और लाजवाब व्यंजन का स्वाद चखने को मिल रहा है. इसमें बांस के करील, महुआ के लड्द, महुआ के गुलाब जामुन और पान रोटी जैसे व्यंजन आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.

अलग-अलग व्यंजनों में भील व्यंजन की बात करें तो मक्का, ज्वार, बाजरा की रोटी, दाल पानिया, बैगन का भरता, अरहर की दाल, उड़द-चना दाल, मूंगा कढ़ी और पानिया शामिल है.

कोरकू व्यंजन में मक्का, ज्वार, बाजरा की रोटी, उड़द मूंग के पकोड़े, कुटकी की खीर, महुआ लड्डू और महुआ गुलाब जामुन शामिल है.

वहीं बैगा व्यंजन की बात करें तो इसमें पान रोटी, चेच की भाजी, राई की भाजी, बांस के करील, बांस की पिहरी, अरहर की दाल, कोदो भात-दाल, कुटकी और भात-दाल शामिल है.

गौंड व्यंजन में मक्का और ज्वार की रोटी, भात-अरहर दाल, कढ़ी, कुटकी भात, कुटकी खीर, बड़ा सूखा और चटनी, बड़ा गीला और चटनी, मंगोड़ा और चीला रोटी (गोदला) जैसे अनोखे व्यंजन शामिल है.