खंडवा में धूम मचा रहा गुजरात का देसी आम, लेकिन इसमें ऐसा क्या है?

खंडवा में धूम मचा रहा गुजरात का देसी आम, लेकिन इसमें ऐसा क्या है?


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Gujarat Mango in MP: इस आम की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह है इसका प्राकृतिक तरीके से पकना. गुजरात के किसानों ने इसे बिना किसी केमिकल या कृत्रिम साधन के पूरी तरह से देसी पद्धति से उगाया और पकाया है.

खंडवा. गर्मी का मौसम आते ही आम का स्वाद हर किसी की जुबान पर होता है लेकिन इस बार मध्य प्रदेश के खंडवा के बाजारों में एक खास किस्म के देसी आम ने धूम मचा दी है. यह आम गुजरात से आया है, जो पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से घास में पका हुआ होता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे सीधे खाया जा सकता है. इसका शेक-जूस नहीं बनाया जाता. यही वजह है कि आमतौर पर मैंगो शेक पीने वाले लोगों को भी इस देसी आम का स्वाद खूब भा रहा है. मार्केट में इसकी कीमत 60 रुपये प्रति किलो है, जिससे यह आम लोगों की पहुंच में बना हुआ है.

थोक बाजार के फल व्यापारी हाजी जहीर लोकल 18 को बताते हैं कि यह आम अब अपने अंतिम चरण में है, यानी अब इसकी आवक धीरे-धीरे कम हो रही है लेकिन जितनी मात्रा में आया है, उतना ही अधिक लोगों का रुझान भी इस ओर बढ़ा है. इस बार यह आम न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है बल्कि कीमत में भी किफायती है. आम की इस किस्म की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है इसकी नैचुरल प्रोसेस. गुजरात के किसानों द्वारा इसे बिना किसी केमिकल या कृत्रिम साधन के पूरी तरह से देसी पद्धति से उगाया और पकाया गया है. फल पूरी तरह से घास में रखकर पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और सुगंध और भी अधिक प्राकृतिक बन जाती है.

तेजी से बढ़ गई आम की मांग
खंडवा के स्थानीय खरीदार भी इस आम को लेकर खासे उत्साहित हैं. सब्जी मंडियों और फल बाजारों में सुबह से ही इसकी खरीदारी करने वालों की भीड़ देखी जा सकती है. खास बात यह है कि इस आम की मांग सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लोग इसे खरीदने आ रहे हैं. फल व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि आमतौर पर गुजरात से मध्य प्रदेश में आम की आवक बहुत कम होती है लेकिन इस बार हालात बदले हैं. यह आम सूरत और बड़ौदा के इलाकों से लाया गया है. पहले हमने सोचा था कि शायद ज्यादा पसंद न आए लेकिन जैसे ही लोगों ने इसका स्वाद लिया, मांग तेजी से बढ़ गई.

सेहत के लिए फायदेमंद देसी आम
स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह देसी आम फायदेमंद माना जा रहा है. स्थानीय आयुर्वेद जानकारों का कहना है कि यह आम पेट के लिए हल्का होता है और बिना रस निकाले खाने से इसमें मौजूद रेशा और पौष्टिक तत्व सीधे शरीर को लाभ पहुंचाते हैं. यही वजह है कि बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर उम्र के लोग इसे पसंद कर रहे हैं. मंडी व्यापारी बताते हैं कि अगर इस तरह की किस्मों को बढ़ावा दिया जाए, तो आने वाले साल में देसी आम की किस्में देशभर में लोकप्रिय हो सकती हैं. इसके लिए किसानों और व्यापारियों के बीच एक समन्वय होना जरूरी है.

जुबान पर बस गई आम की मिठास
इस देसी आम की धूम ने जहां बाजार में रौनक बढ़ा दी है, वहीं लोगों की जुबान पर भी इसकी मिठास बस गई है. गर्मी के इस मौसम में यह आम न केवल स्वाद का नया अनुभव दे रहा है बल्कि एक बार फिर देसी उत्पादों की ताकत को भी साबित कर रहा है. हालांकि अब यह आम अपने अंतिम चरण में है, यानी कुछ ही दिनों तक उपलब्ध रहेगा, इसलिए यदि आपने अब तक इसका स्वाद नहीं चखा है, तो देर न करें क्योंकि बाजार से यह जल्द ही गायब हो सकता है.

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