खरगोन. अगर आपको घोड़े पालने का शौक है और आप इसे सिर्फ शौक तक सीमित नहीं रखना चाहते, तो अब यह शौक कमाई का बेहतर जरिया बन सकता है. केंद्र सरकार की पशुपालन से जुड़ी योजनाओं के तहत अब घोड़े पालन (Horse Farming) के लिए भी वित्तीय मदद दी जा रही है. खास बात यह है कि इस योजना में एक करोड़ रुपये तक का लोन मिल सकता है और उस पर 50 फीसदी तक की सब्सिडी भी दी जा रही है. मध्य प्रदेश के खरगोन पशु चिकित्सालय में पदस्थ वेटनरी असिस्टेंट सर्जन डॉ खेमेंद्र रोकड़े ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि सरकार द्वारा राष्ट्रीय पशुधन योजना चलाई जा रही है. इसका लाभ कोई भी किसान, पशुपालक, युवा उद्यमी या पशुपालन से जुड़ा स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन या सहकारी संस्था ले सकती है. जरूरी नहीं कि आपके पास पहले से घोड़े हों. आप योजना के तहत नए सिरे से घोड़े खरीदकर पालन शुरू कर सकते हैं.
घोड़ा पालन से कैसे होगी कमाई?
डॉ रोड़के बताते हैं कि घोड़े का इस्तेमाल सिर्फ सवारी के लिए ही नहीं होता बल्कि आज यह फार्म टूरिज्म, शो राइडिंग, शादियों, फिल्मों और विभिन्न परेड और इवेंट में काफी डिमांड में होते हैं. अच्छी नस्ल के घोड़ों की कीमत लाखों में होती है और इनका पालन व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है.
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आपको अपने नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र, जिला पशुपालन विभाग या agriinfra.dac.gov.in वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होगा. लोन स्वीकृति के लिए डीपीआर बनाकर बैंक को जमा करनी होती है.
इस योजना के तहत मारवाड़ी, काठीवाड़ी, सिंध, पंजाबी, थारपारकर जैसी भारतीय देसी नस्ल के घोड़ों को प्राथमिकता दी जाती है. साथ ही इन नस्लों की मांग देश और विदेश में काफी ज्यादा है. ये दिखने में काफी सुंदर होते हैं और इनका रखरखाव अन्य की तुलना में आसान होता है. इनमें से कोई एक नस्ल की 10 मादा घोड़ी और दो नर घोड़ों को शामिल करना होगा.
कहां से मिलेगा प्रशिक्षण?
घोड़े पालने के लिए पहले हितग्राही को प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है. घोड़ा पालन से जुड़ी ट्रेनिंग जिले के पशुपालन विभाग के साथ-साथ राष्ट्रीय घोड़ा अनुसंधान केंद्र, हिसार (हरियाणा) और राजस्थान के घोड़ा प्रजनन केंद्रों में मिल सकती है. प्रशिक्षण के बाद आप प्रोफेशनल तरीके से इस काम को शुरू कर सकते हैं.
डॉ खेमेंद्र रोकड़े ने बताया कि आवेदक की उम्र 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए. वह भारत का नागरिक होना चाहिए. घोड़े रखने और चारे की व्यवस्था के लिए पर्याप्त जगह होना चाहिए. किसी बैंक या संस्था का डिफॉल्टर नहीं होना चाहिए. SHG, FPO, सहकारी समिति भी इस योजना में पात्र हैं.
लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज
आधार कार्ड, दो पासपोर्ट साइज फोटो, जमीन के दस्तावेज या किराया अनुबंध, बैंक पासबुक की कॉपी, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, कितने घोड़े, किस नस्ल के और कहां से लिए जाएंगे, इसकी जानकारी, जाति प्रमाण पत्र और स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी की अनुशंसा आदि दस्तावेज जरूरी है.