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Bhopal News : दिग्विजय सिंह ने भाजपा और आरएसएस पर हमला करते हुए कहा कि अंबेडकर को गांधी जी की सलाह पर संविधान समिति का अध्यक्ष बनाया गया था और ग्वालियर हाईकोर्ट में अंबेडकर की मूर्ति न लगाने पर भाजपा की चुप्पी …और पढ़ें
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर निशाना साधा है.
हाइलाइट्स
- दिग्विजय सिंह ने भाजपा और आरएसएस पर हमला बोला.
- ग्वालियर हाईकोर्ट में अंबेडकर की मूर्ति न लगाने पर सवाल उठाए.
- संविधान बदलने की कोशिश अटल जी के समय भी हुई थी.
भोपाल. संविधान और डॉ. भीमराव अंबेडकर को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर भाजपा और आरएसएस पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने कहा कि जब देश आज़ाद हुआ और संविधान निर्माण की बात चली, तब महात्मा गांधी की सलाह पर ही बाबा साहब अंबेडकर को संविधान समिति का अध्यक्ष बनाया गया था क्योंकि उन्होंने जीवनभर उत्पीड़न सहा था. दिग्विजय सिंह ने कहा, “उस समय चर्चा हुई कि ऐसा व्यक्ति संविधान समिति का अध्यक्ष बने जिसने समाज के अत्याचार और भेदभाव को अपने जीवन में सहा हो. तभी बाबा साहब अंबेडकर का नाम सामने आया. कई अन्य लोग भी समिति में शामिल किए गए. लेकिन आज कुछ लोग बीएन राव को संविधान निर्माता कह रहे हैं जबकि वे केवल सलाहकार थे, सदस्य नहीं.”
“जिसने संविधान जलाया, आज वही उस पर भाषण दे रहा है”
दिग्विजय सिंह ने सीधे-सीधे आरएसएस पर आरोप लगाते हुए कहा, “आरएसएस ने कभी भारत के संविधान को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने संविधान की प्रति को जलाया था, तिरंगे झंडे का विरोध किया था. अब वही लोग कह रहे हैं कि संविधान में बाबा साहब अंबेडकर का कोई योगदान नहीं था. यह सरासर नाइंसाफी और ऐतिहासिक सच्चाई से छेड़छाड़ है.”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्वालियर उच्च न्यायालय में डॉ. अंबेडकर की मूर्ति लगाने का आदेश तक पूर्व न्यायमूर्ति द्वारा दिया गया था, फिर भी भाजपा सरकार अब तक इस पर चुप्पी साधे हुए है. “ये चुप्पी क्या दिखाती है? क्या संविधान निर्माता को सम्मान देने से भी परहेज है?” – दिग्विजय ने सवाल उठाया.
“संविधान हर भारतीय का है, किसी एक वर्ग का नहीं”
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि “संविधान सिर्फ किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि भारत के हर नागरिक के अधिकार और सम्मान की नींव है. जब प्रधानमंत्री मोदी जी अंबेडकर की तस्वीर को सिर पर लगाते हैं, तो फिर उसी संविधान के आर्टिकल्स का विरोध क्यों किया जाता है? यही तो दोहरा चरित्र है – कथनी और करनी में फर्क.”
“संविधान बदलने की कोशिश अटल जी के समय भी हुई थी”
उन्होंने यह भी कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में भी संविधान को बदलने की कोशिश हुई थी, लेकिन तब भी जनविरोध के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका.
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें