एमपी के कच्चे घरों में होम स्टे…2000 से पैकेज स्टार्ट: खाने में चूल्हे की गरम रोटियां, कोदो की खीर; राजस्थान-गुजरात के पर्यटकों को भी भाया – Bhopal News

एमपी के कच्चे घरों में होम स्टे…2000 से पैकेज स्टार्ट:  खाने में चूल्हे की गरम रोटियां, कोदो की खीर; राजस्थान-गुजरात के पर्यटकों को भी भाया – Bhopal News


अगर आप प्रकृति के बीच अपनी छुट्‌टी मनाना चाहते हैं या जंगल और पहाड़ों से घिरे किसी गांव में नाइट स्टे का प्लान है, तो तामिया (छिंदवाड़ा) की वादियों में अब आपके लिए गांव में ही तैयार हैं होम स्टे। कच्चे घर, चूल्हे पर गरमा-गरम रोटियां और चने की सब्जी। सा

.

सिर्फ तामिया ही नहीं, बल्कि प्रदेश में ऐसे 241 होम स्टे हैं, जहां पर आप रातें गुजार सकते हैं। इस दौरान चारों ओर प्रकृति को भी करीब से निहार सकेंगे। यहां 2000 रुपए से पैकेज शुरू हो जाता है।

पन्ना, छतरपुर, मंडला, डिंडौरी, देवास, सीहोर, खंडवा, बालाघाट समेत कई जिलों के 121 पर्यटक गांव हैं, जहां 241 होम स्टे बने हैं। अगले एक-दो साल में इन्हें चार गुना यानी 1 हजार तक करने का टारगेट है। इन होम स्टे से शहरी पर्यटकों का भी गांवों की ओर रुझान बढ़ा है। वे गांव के कल्चर को करीब से जान रहे हैं।

यही वजह है कि बड़ी होटलों को छोड़ पर्यटक अब गांवों में बने कच्चे घरों में ही होम स्टे कर रहे हैं। बुधवार (18 जून) को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी भोपाल में होम स्टे की वर्चुअल शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने गांवों में होम स्टे ऑपरेट करने वालों को सम्मानित भी किया। पढ़िए होम स्टे से प्रदेश में रोजगार की क्या संभावनाएं हैं…?

तामिया के गांव चारों ओर से प्रकृति से घिरे हैं। इसलिए यहां होम स्टे की सुविधा शुरू की गई है।

महीने में 20 से 25 हजार रुपए कमा रहे परिवार पर्यटक गांवों में होम स्टे आमदानी का एक जरिया बन चुके हैं। एक परिवार महीने में औसत 20 से 25 हजार रुपए कमा रहा है। बीते 2 साल में 24 हजार से ज्यादा पर्यटक स्थानीय रहन-सहन और खानपान का अनुभव ले चुके हैं। यह पहल न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दे रही है बल्कि महिलाओं, युवाओं और आदिवासी समुदाय को रोजगार और पहचान भी दे रही है।

पर्यटक गांवों में बने होम स्टे अंदर से कुछ इस तरह से तैयार किए गए हैं।

पर्यटक गांवों में बने होम स्टे अंदर से कुछ इस तरह से तैयार किए गए हैं।

राजस्थान-गुजरात के पर्यटक भी रुकने आ रहे छिंदवाड़ा के तामिया के सनोद नागवंशी ने 2 कमरों में होम स्टे शुरू किया है। खेती-बाड़ी के साथ यह उनकी आय का यह बड़ा जरिया बन चुका है। वे बताते हैं, ढाई हजार रुपए का मिनिमम पैकेज है। एक छोटा परिवार रूम में अच्छे से रुक सकता है। होम स्टे इतना बढ़िया है कि कर्नाटक, राजस्थान-गुजरात तक के पर्यटकों भी भा गया है। सनोद को भोपाल में सीएम डॉ. यादव ने सम्मानित भी किया।

पन्ना के जनवार में 10 होम स्टे, स्केट पार्क पन्ना के जनवार में भी कई परिवार होम स्टे संचालित कर रहे हैं। यहां के बृजेंद्र यादव ने बताया कि गांव में 10 होम स्टे है। यहां स्केट पार्क है, जो पूरे देश में फेमस है। वहीं पन्ना टाइगर रिजर्व भी है। इसलिए पर्यटक बड़ी-बड़ी होटलों को छोड़ यहां रुकने आते हैं। घर के सदस्य ही मेहमानवाजी करते हैं। उन्हें चूल्हे की रोटियां ही खिलाते हैं।

रायसेन के गाड़ाखेड़ी निवासी झलकन सिंह अहिरवार बताते हैं कि वे जैविक खेती करते हैं और जैविक फल-सब्जी ही मेहमानों को खिलाते हैं। एक परिवार के लिए होम स्टे की सुविधा शुरू की है।

कान्हा नेशनल पार्क के पास ईको होम स्टे कान्हा नेशनल पार्क के पास होम स्टे संचालित करने वाले लोकेश डोंगरे ने बताया कि पूरा ईको होम स्टे है। पर्यटकों के लिए एक ऐसा परिवेश तैयार किया गया है, जो उन्हें गांव के कल्चर से रूबरू कराता है। होम स्टे में एयर कंडिशनर नहीं है। इसके बाद भी अंदर का टेम्प्रेचर बाहर की तुलना में 5 से 6 डिग्री तक कम रहता है। एक महीने में 50 से ज्यादा परिवार, विदेशी पर्यटक आते हैं। अलग-अलग पैकेज हैं।

तामिया में इस तरह से तैयार किए गए हैं होम स्टे।

तामिया में इस तरह से तैयार किए गए हैं होम स्टे।

एक अन्य होम स्टे संचालक ने बताया कि छतरपुर का धमना पर्यटक गांव है। यहां 9 होम स्टे हैं। 15 किमी दूर खजुराहो है। दो-तीन वाटर फॉल और पन्ना टाइगर रिजर्व है। गांव में साल 2018 से ही होम स्टे सुविधा शुरू हो गई थी। अब भी नए होम स्टे बन रहे हैं। बैलगाड़ी, कैमरा, जिप्सी वालों को भी रोजगार मिला है।

ज्यादातर होम स्टे की कमान महिलाओं के हाथ है रूरल टूरिज्म ने महिलाओं को रोजगार का नया माध्यम दिया है। अब कई महिलाएं खुद का होम स्टे चला रही हैं, जहां वे खुद खाना बनाती हैं, मेहमानों को गाइड करती हैं और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल कराती हैं।

उदाहरण के लिए बालाघाट जिले के गोंड आदिवासी बहुल गांवों में, महिला समूहों ने मिलकर होम स्टे चलाना शुरू किया। जिससे उन्हें महीने में 15 हजार रुपए तक की आय हो रही है। यह प्रोजेक्ट उन जिलों में खास फोकस कर रहा है, जहां अभी कम गतिविधियां हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव ने भी देवगढ़ की कविता से बात की। वे होम स्टे का संचालन कैसी करती हैं, ये भी जाना।

कच्चे घरों में बने होम स्टे में बेड, कुर्सियां, डाइनिंग टेबल भी होते हैं।

कच्चे घरों में बने होम स्टे में बेड, कुर्सियां, डाइनिंग टेबल भी होते हैं।

इन जिलों में सबसे ज्यादा होम स्टे

  • मंडला जिले में सबसे अधिक 40 होम स्टे हैं, जिनमें कान्हा के आसपास के गांव शामिल हैं।
  • उमरिया और बालाघाट जिले के गांवों में 30-30 होम स्टे चल रहे हैं।
  • डिंडौरी में भी 20 से अधिक होम स्टे हैं, जो अमरकंटक जैसे धार्मिक पर्यटन स्थल के पास हैं।
  • छतरपुर, देवास और खंडवा जिले में 2-5 होम स्टे ही हैं, लेकिन यहां नए प्रोजेक्ट्स की तैयारी है।

सीएम बोले- मुझे कोदो की खीर खिलाओगी क्या? सीएम डॉ. यादव ने होम स्टे संचालित करने वाले परिवारों से भी बात की। इस दौरान देवगढ़ में कविता ध्रुवे से कहा, ‘कभी हम आए तो हमें भी खिला-पिला देना। कोदो की खीर खिलाओगी क्या?’ सिंग्रामपुर के राजेश राय ने भी सीएम से बात की।

यह खबर भी पढ़ें… भोपाल में ‘ग्रामीण रंग, पर्यटन संग’ उत्सव

ग्रामीण रंग, पर्यटन संग कार्यक्रम में शहरी क्षेत्र में भी होम स्टे को प्रमोट करने की चर्चा हुई।

ग्रामीण रंग, पर्यटन संग कार्यक्रम में शहरी क्षेत्र में भी होम स्टे को प्रमोट करने की चर्चा हुई।

उत्तराखंड की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी धार्मिक स्थलों के लिए हेलीकॉप्टर सेवा जल्द शुरू होगी। इसके लिए टेंडर करा दिए हैं। यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही। वे बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित पर्यटन विभाग के ‘ग्रामीण रंग, पर्यटन संग’ उत्सव में संबोधित कर रहे थे। पढ़ें पूरी खबर…



Source link