MP में धूम मचा रहा UP का ये लाजवाब आम, खाने में एकदम शक्कर जैसा मीठा

MP में धूम मचा रहा UP का ये लाजवाब आम, खाने में एकदम शक्कर जैसा मीठा


खंडवा. मध्‍य प्रदेश के खंडवा जिले में इन दिनों एक खास आम की जबरदस्त धूम मची हुई है. यह आम न तो एमपी में पैदा होता है और न ही यहां की जमीन पर इसकी खेती होती है, फिर भी इसकी मिठास और खास स्वाद के चलते यह आम खंडवा ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के बाजारों में लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के मशहूर दशहरी आम की, जो इन दिनों मध्य प्रदेश में अपनी मिठास का परचम लहरा रहा है. दशहरी आम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ और आसपास के जिलों की पहचान है. वहां से यह आम कच्चे रूप में क्रेटों में भरकर मध्य प्रदेश लाया जाता है.

दशहरी आम को क्रेट में रद्दी (पुराने अखबार या कागज) लगाकर सावधानी से पैक किया जाता है ताकि सफर के दौरान आम को कोई नुकसान न पहुंचे. इसके बाद आम को पकाने के लिए दरिया (घास या अन्य मुलायम सामग्री) में रखा जाता है. आम को पकने में करीब चार से पांच दिन लगते हैं. पांचवें दिन दशहरी आम पूरी तरह से खाने लायक तैयार हो जाता है और बाजार में बिकने लगता है.

खंडवा और आसपास के जिलों में मांग
खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और आसपास के जिलों में इन दिनों दशहरी आम की जबरदस्त डिमांड है. बाजारों और ठेलों पर दशहरी आम ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. जहां अच्छी क्वालिटी का दशहरी आम ठेलों पर करीब 60 रुपये किलो बिक रहा है, वहीं थोक या गोदाम से खरीदने पर यह 50-52 रुपये किलो की रेंज में मिल रहा है. दुकानदारों और फल विक्रेताओं के अनुसार, दशहरी आम की डिमांड इतनी ज्यादा है कि यह बाजार में आते ही हाथों-हाथ बिक जाता है.

दशहरी आम की खासियत
दशहरी आम अपनी खास मिठास और स्वाद के लिए जाना जाता है. इस आम का स्वाद किसी भी दूसरे आम की तुलना में कहीं ज्यादा मीठा होता है. यही वजह है कि इसे खाने वाले इसे शक्कर जैसा मीठा कहते हैं. दशहरी आम का रस नहीं बनता, इसे हाथ से चूसकर या छीलकर ही खाया जाता है. आम का आकार भी अन्य किस्मों के आम से बड़ा होता है और इसकी गूदा रेशेदार नहीं होता, जिससे इसे खाना और भी आसान हो जाता है. इसकी खुशबू भी इतनी लाजवाब होती है कि इसके पास से गुजरते ही लोगों का मन इसे खरीदने को करने लगता है.

दशहरी आम का मौसम
दशहरी आम की आवक जून से लेकर जुलाई के अंत तक रहती है. करीब डेढ़ महीने तक बाजारों में दशहरी आम की रौनक देखने को मिलती है. आम विक्रेताओं के मुताबिक, जुलाई के आखिर तक इसकी आपूर्ति रहती है और इसके बाद लंगड़ा, चौसा जैसे अन्य किस्मों के आम बाजार में अपनी जगह लेने लगते हैं.

दशहरी आम की लोकप्रियता
दशहरी आम सिर्फ खंडवा ही नहीं बल्कि पूरे एमपी के बाजारों में अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए जाना जाता है. यह आम हर वर्ग के लोगों की पसंद है. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी दशहरी के दीवाने हैं. दशहरी का नाम ही इतना बड़ा ब्रांड बन चुका है कि लोग इसके नाम से ही इसे खरीदने को तैयार रहते हैं. यही वजह है कि दशहरी आम यूपी से आने के बावजूद एमपी में हर साल लाखों किलो बिकता है और लोग बेसब्री से इसके मौसम का इंतजार करते हैं.

कभी-कभी तो कम पड़ जाता है आम
इस आम की बिक्री से जुड़े फल विक्रेता इसे लेकर काफी सजग रहते हैं. मोहम्मद जहीर, जो खंडवा में दशहरी आम बेचते हैं, लोकल 18 को बताते हैं कि यह उनका पारिवारिक काम है. वह तीसरी पीढ़ी के फल विक्रेता हैं और दशहरी आम बेचते आ रहे हैं. उनकी मानें तो दशहरी आम की मांग इतनी ज्यादा होती है कि कभी-कभी माल की कमी भी हो जाती है.



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