उज्जैन रेप के आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास: मानसिक रूप से दिव्यांग नाबलिग बच्ची को बनाया था शिकार – Ujjain News

उज्जैन रेप के आरोपी को 20 वर्ष का कठोर कारावास:  मानसिक रूप से दिव्यांग नाबलिग बच्ची को बनाया था शिकार – Ujjain News



उज्जैन के पास नागदा कोर्ट ने जघन्य एवं सनसनीखेज रेप के प्रकरण अहम फैसला सुनाते हुए मानसिक रूप से निःशक्त नाबालिग के बच्ची के साथ बलात्कार करने वाले आरोपी को न्यायालय ने 20 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी को 4 हजार रुपए से दण्डित भी किया है।

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प्रभारी उपसंचालक अभियोजन राजेन्द्र कुमार खाण्डेगर ने बताया कि दिनांक 05.08.2023 को मानसिक रूप से दिव्यांग बच्ची को उसकी बहन ने शाम 4 बजे चावल लेने मार्केट भेजा था। उसको आने में बहुत देर हो गयी तो उसकी तलाश करने गयी तो मोहल्ले वालों ने बताया कि बच्ची, आरोपी राजेश उर्फ राजू कल्लू त्रिपाठी, उम्र 32 वर्ष निवासी ई ब्लाक टापरी बिरलाग्राम नागदा जिला उज्जैन के कमरे में है। बड़ी बहन ने जाकर देखा तो आरोपी राजू के घर का घर बहार से बंद था उसने दरवाजा बजाया फिर थोडी देर बाद आरोपी राजू ने हड़बड़ा कर दरवाजा खोला तो उसकी 10 साल की बहन भी अंदर ही मौजूद थी।

उसने घर पर लाकर बच्ची से पूछा तो उसने बताया कि आरोपी राजू उसे रास्ते में मिला और उसके कमरे में ले गया था और बिस्तर पर लिटाकर गन्दा काम किया था। बच्ची ने ये भी बताया कि उसके साथ पिछले महीने भी आरोपी ने गलत काम भी किया था। जिसके बाद नागदा के बिरलाग्राम थाना आरोपी धारा 376 एबी, 354घ. 342 भादसं. एवं 5एम / 6 पॉक्सो एक्ट एवं 3 (2) (अ). 3(2) (अं) अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत आरोपी के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर अनुसंधान पूर्ण कर अभियोग पत्र माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

20 वर्ष का कठोर कारावास-

न्यायालय चन्द्रसेन मुवेल विशेष न्यायाधीश, लैंगिक अपराध से बालकों का संरक्षण अधिनियम महोदय तहसील नागदा जिला उज्जैन के न्यायालय द्वारा आरोपी राजेश उर्फ राजू पिता करुणा शंकर उर्फ कल्लू त्रिपाठी, उम्र 32 वर्ष निवासी ई ब्लाक टापरी बिरलाग्राम नागदा जिला उज्जैन म.प्र. को धारा 6 (एम) सहपठित धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012, 5 (के) सहपठित धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012, 5 (एल) सहपठित धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012, में 20 वर्ष का कठोर कारावास व धारा 11 (iv) सहपठित धारा 12 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012, 92 – ख दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में 01 वर्ष का सश्रम कारावास एवं कुल 4000 के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।



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