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Chilli Farming Tips: खरगोन कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ वैज्ञानिक डॉ एसके त्यागी ने लोकल 18 से कहा कि जिले में हर साल करीब 50 हजार हेक्टेयर जमीन पर मिर्च की खेती होती है. काफी किसान आज भी पुरानी विधि से ही मिर…और पढ़ें
खरगोन. मध्य प्रदेश का खरगोन जिला सिर्फ कपास ही नहीं बल्कि लाल मिर्च की खेती के लिए भी देशभर में जाना जाता है. यहां के किसान खरीफ सीजन में मिर्च लगाकर लाखों की आमदनी अर्जित करते हैं. खास बात यह है कि खरगोन की मिर्च न केवल तीखी होती है बल्कि इसकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी है लेकिन अगर किसान पारंपरिक तरीके से हटकर वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं, तो वे मिर्च की उपज के साथ-साथ मुनाफे में भी बड़ा इजाफा कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि इस पद्धति को रीज बेड तकनीक के नाम से भी जाना जाता है. इसमें किसान मेढ़ों को ऊपर उठाकर पौधों की कतार लगाते हैं. इस पद्धति में खेत की जमीन समतल नहीं होती बल्कि उभरी हुई होती है, जिससे पानी की निकासी बेहतर होती है. साथ ही पौधे की जड़ें सीधे पानी और पोषक तत्वों तक पहुंच पाती हैं. इससे पौधे स्वस्थ रहते हैं और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है.
ड्रिप पद्धति से करें खेती
डॉ त्यागी ने किसानों को सलाह दी है कि किसान उठी हुई मेढ़ पर 30 माइक्रोन की प्लास्टिक मल्चिंग चलाए और रोपाई करें. इसके अलावा सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम अपनाएं. इससे न केवल पानी की बचत होती है बल्कि फसल को जरूरत के मुताबिक पानी भी मिलता है.
50 फीसदी तक बढ़ेगा उत्पादन
अगर किसान इस तकनीक को अपनाएं, तो मिर्च की उपज में 50 से 60 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है. यानी एक एकड़ में पहले जहां 20 क्विंटल मिर्च मिलती थी, वहीं अब 30 क्विंटल तक उपज संभव है. इसके चलते किसान की आमदनी भी डेढ़ गुना तक हो सकती है.