Trending GK: कैसे बंटे गुजरात और महाराष्ट्र? मुंबई के लिए चली ‘गोलियां’, गईं दो दर्जन जानें

Trending GK: कैसे बंटे गुजरात और महाराष्ट्र? मुंबई के लिए चली ‘गोलियां’, गईं दो दर्जन जानें


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Trending GK, General Knowledge: भाषा विवाद के कारण देश की आर्थिक राजधानी मुंबई एक बार फ‍िर सुर्खियों में है. मुंबई में हिन्‍दी से लेकर गुजराती भाषा को लेकर आए दिन वाद-विवाद की स्‍थितियां बन जाती हैं. इसकी कहानी…और पढ़ें

Maharashtra News, general knowledge: भाषा विवाद और मुंबई की कहानी!

हाइलाइट्स

  • आजादी से पहले था बॉम्‍बे स्‍टेट.
  • 1960 में बने महाराष्‍ट्र और गुजरात.
  • मुंबई को लेकर हुआ था आंदोलन.
Trending GK, General Knowledge: गुजरात और महाराष्ट्र कैसे अलग हुए और इस बीच मुंबई में क्या-क्या हुआ? ये कहानी भाषा को लेकर हुए विवाद और उससे जुड़ी घटनाओं से शुरू होती है. दरअसल, आजादी के बाद भारत में राज्यों को भाषा के आधार पर बांटने की मांग उठी. बॉम्बे राज्य में मराठी और गुजराती दोनों भाषाएं बोली जाती थीं. मराठी बोलने वालों ने एक अलग महाराष्ट्र राज्य की मांग की,जिसमें मुंबई भी शामिल हो.वहीं गुजराती बोलने वालों ने महागुजरात मूवमेंट शुरू किया और वो भी मुंबई को अपने राज्य में चाहते थे, क्योंकि मुंबई उस वक्त आर्थिक ताकत थी. 1955 में स्टेट्स रीऑर्गनाइजेशन कमेटी ने सुझाव दिया कि बॉम्बे राज्य द्विभाषी रहे और मुंबई उसका कैपिटल बने, लेकिन ये बात दोनों पक्षों को मंजूर नहीं हुई.1956 में जब राज्य पुनर्गठन आयोग(SRC)ने बॉम्बे राज्य को एक द्विभाषी राज्य(जहां मराठी और गुजराती दोनों बोली जाएं)बनाने की सिफारिश की,तब हंगामा मच गया.

Mumbai Histry: सड़कों पर उतर आई भीड़ और चली गोलियां

मुंबई को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि 21 नवंबर 1955 मुंबई के हुतात्मा चौक(तब फ्लोरा फाउंटेन)पर हजारों लोग शांतिपूर्वक संयुक्त महाराष्ट्र की मांग को लेकर मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने आंसू गैस और फायरिंग की जिसमें 15 लोग मारे गए.इसी तरह अहमदाबाद में महागुजरात मूवमेंट के तहत 8 अगस्त 1956 को कॉलेज स्टूडेंट्स ने प्रदर्शन किया,जिसमें 5 से 8 छात्रों की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई.इन घटनाओं ने दोनों आंदोलनों को और तेज कर दिया. मराठी और गुजराती दोनों पक्षों ने मुंबई के लिए जंग छेड़ दी.

Mumbai Ki Kahani: मुंबई के लिए क्यों थी खींचतान?

मुंबई तब भी देश का सबसे बड़ा व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र था. गुजराती कहते थे हमने यहां बिजनेस खड़ा किया है. मराठी कहते थे कि ये हमारी सांस्कृतिक राजधानी है. प्रधानमंत्री नेहरू ने तीसरा रास्ता सुझाया-मुंबई को एक अलग यूनियन टेरिटरी बना देते हैं, लेकिन ये किसी को मंजूर नहीं था.

1 मई 1960 को बने दो राज्य

लंबे आंदोलनों के बाद केंद्र सरकार ने एक नया कानून पास किया-बॉम्बे रीऑर्गनाइजेशन एक्ट. इसके तहत 1 मई 1960 को महाराष्ट्र(जिसमें मुंबई शामिल)और गुजरात(जिसकी अस्थायी राजधानी अहमदाबाद बनी, बाद में गांधीनगर)दोनों राज्य बना दिए गए.इससे पहले ये दोनों इलाके एक बड़े बॉम्बे राज्य का हिस्सा थे, जो आजादी के बाद बनाया गया था. आखिर में 1 मई 1960 को बॉम्बे रीऑर्गनाइजेशन एक्ट पास हुआ, जिससे गुजरात और महाराष्ट्र दो अलग-अलग राज्य बने.

माराठी खुश और गुजराती मायूस

इस फैसले से मराठी लोग खुश हुए,लेकिन गुजराती लोगों में नाराजगी रही.राज्य बंटते ही कई गुजराती व्यापारी मुंबई छोड़ गुजरात लौट गए. वहीं मराठी समुदाय के बीच अपनी अस्मिता को लेकर गर्व और भावनाएं और मजबूत हो गईं.इसके बाद 1966 में बालासाहेब की शिवसेना बनी, जिसने मुंबई को मराठी माणुस का शहर बनाने की मुहिम छेड़ी. शुरुआत में यह संगठन हिंदीभाषी और फिर गुजराती समुदाय के खिलाफ भी मुखर हो गया.1 मई को दोनों राज्य अपने फाउंडेशन डे मनाते हैं.महाराष्ट्र में मुंबई में परेड होती है और गुजरात में अहमदाबाद में जश्न मनाया जाता है. हालांकि भाषा और पहचान को लेकर कभी-कभी तनाव अभी भी दिखता है.

अब क्‍यों चर्चा में है मुंबई

मराठी भाषा को लेकर एक बार फ‍िर विवाद की स्‍थिति बन गई है.इस साल मार्च में आरएसएस के वरिष्ठ नेता सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा कि मुंबई की एक भाषा नहीं है और ये जरूरी नहीं है कि मुंबई आने वाले हर व्यक्ति को मराठी सीखनी पड़े.इस बयान पर विपक्षी महाविकास अघाड़ी के दल बिफर गए.इसके बाद महाराष्‍ट्र की फडणवीस सरकार ने एक आदेश जारी किया जिसमें अंग्रेजी और मराठी मीडियम के स्कूलों में पहली से पांचवीं क्लास के छात्रों के लिए हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बना दिया गया.फिर क्या था विपक्षी दलों शिवसेना-यूबीटी, एनसीपी-शरद पवार और एमएनएस ने इसका विरोध किया.इसका नतीजा ये हुआ कि विरोध को हवा मिली और नतीजा ये हुआ कि महाराष्ट्र सरकार को प्राथमिक स्कूलों में तीन भाषा के फॉर्मूले को वापस लेना पड़ा.इसके बाद एक के बाद एक घटनाएं ऐसी सामने आईं जिसमें मराठी नहीं बोलने पर मारपीट की गई.

भाषा पूछकर हुई मारपीट

मुंबई और मीरा रोड में कुछ निर्दोष दुकानदारों को उनकी भाषा पूछकर पीटा गया. कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ताओं ने भाईंदर में एक गुजराती दुकानदार के माराठी नहीं बोलने पर मारपीट की. उस दुकानदार ने उससे सिर्फ इतना पूछा था कि मराठी बोलना जरूरी क्यों है? इसको लेकर सियासत गर्माने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट कहा कि भाषा के नाम पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं होगी और त्वरित कानूनी कार्यवाही की बात कही.

Dhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर

न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. करीब 13 वर्ष से अधिक समय से मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व डिजिटल संस्करण के अलावा कई अन्य संस्थानों में कार्य…और पढ़ें

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