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Kali Mooch Rice GI Tag: बालाघाट की सुगंधित देशी चावल किस्म ‘काली मूंछ’ को जल्द मिल सकता है GI टैग. जानिए इसकी खासियत, स्वाद, खेती वाले इलाके और इसे लेकर क्या कह रहे हैं कृषि अधिकारी.
हाइलाइट्स
- बालाघाट की काली मूंछ चावल को मिलेगा GI टैग.
- काली मूंछ चावल की खेती बालाघाट, चंबल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में होती है.
- काली मूंछ चावल गैर बासमती, सुगंधित और पोषक तत्वों से भरपूर है.
काली मूछ को मिल सकता है जीआई टैग
काली मूछ की खासियत जानने से पहले आपको ये बता देना जरूरी है कि काली मूछ को जीआई टैग मिल सकता है. दरअसल, उप संचालक कृषि फूल सिंह मालवीय ने लोकल 18 को बताया कि काली मूछ किस्म के लिए भौगोलिक सूचकांक यानी जीआई टैग मिले इसके लिए प्रशासन प्रयास कर रहा है. इससे पहले उन्होंने बताया कि काली मूछ की जन्म स्थली बालाघाट ही है. वहीं, यहां के जंगल के किनारे बसे आदिवासियों ने धान की इस प्रजाति का संरक्षण किया है.
अब जानिए काली मूंछ क्यों है खास
उपसंचालक कृषि फूल सिंह मालवीय ने बताया कि काली मूंछ धान की देशी नस्ल है. ये एक गैर बासमती सुगंधित चावल है. ये एक ऊंची किस्म है. इसके चावल का दाना बारीक होता है. वहीं, इसको पकाने के बाद ये सॉफ्ट हो जाता है, जो खाने में काफी स्वादिष्ट होती है. देशी किस्म होने के कारण इसमें पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में होते हैं.
काली मूंछ की खेती बालाघाट के अलावा मध्य प्रदेश के चंबल इलाके में भी होती है. इसके अलावा छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में भी इसकी खेती की जाती है.