शाजापुर में किचन वेस्ट से खाद बनाने की ट्रेनिंग दी: सब्जियों के छिलके, बचा खाना और फूल-पत्तियां का सही इस्तेमाल करना बताया – shajapur (MP) News

शाजापुर में किचन वेस्ट से खाद बनाने की ट्रेनिंग दी:  सब्जियों के छिलके, बचा खाना और फूल-पत्तियां का सही इस्तेमाल करना बताया – shajapur (MP) News


यूनिक वेस्ट मैनेजमेंट कंसलटेशन संस्था प्रतिनिधि ने किचन बेस्ट से खाद बनाना बताया।

शाजापुर में शनिवार दोपहर को उज्जैन की यूनिक वेस्ट मैनेजमेंट कंसलटेशन टीम ने किचन वेस्ट से खाद बनाने की जानकारी दी गई। साथ ही कोर्ट परिसर में पौधारोपण किया गया। इस दौरान 100 से अधिक पौधे रोपे गए।

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संस्था के प्रतिनिधि राजकुमार अकेला ने बताया कि रसोई के जैविक कचरे से पौधों के लिए पोषक खाद बनाई जा सकती है। इसमें सब्जियों के छिलके, बचा खाना और फूल-पत्तियां शामिल हैं।

किचन वेस्ट से खाद बनाने की विधि

1. सही स्थान चुनें

घर के कोने में, बालकनी में, या गार्डन में एक बंद बिन (डब्बा) रखें जिसमें नीचे छेद हो ताकि अतिरिक्त पानी निकल सके।

मिट्टी के गमले, प्लास्टिक बकेट या पुराने ड्रम का इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. क्या-क्या डाल सकते हैं (Green waste – हरा कचरा):

सब्जियों के छिलके, फलों के छिलके, चाय की पत्ती (used), अंडे के छिलके (क्रश करके), बासी रोटी (कम मात्रा में), कॉफी ग्राउंड्स, बचा हुआ पका खाना (कम मसालेदार)।

3. क्या नहीं डालना चाहिए

प्लास्टिक, कांच, धातु

डेयरी उत्पाद (दूध, दही)

हड्डियां या मांस

4. सूखा कचरा डालें

सूखे पत्ते

अखबार के टुकड़े (छोटे)

पुराना गत्ता या कागज

बांस की राख (thodi)

हर 1 भाग हरे कचरे के लिए 2 भाग सूखा कचरा मिलाएं।

5. खाद तैयार करने की प्रक्रिया

कचरा काटकर छोटा करें– छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटें ताकि जल्दी सड़े।

एक परत हरा कचरा, फिर एक परत सूखा कचरा डालें।

हर 3-4 दिन में हिलाएं – इससे हवा पहुंचेगी और बदबू नहीं आएगी।

यदि मिश्रण सूखा लगे तो थोड़ा पानी छिड़कें।

लगभग 30–45 दिनों में खाद तैयार हो जाती है।

रंग गाढ़ा भूरा या काला होगा

मिट्टी जैसी खुशबू आएगी

कोई पहचानने लायक कचरा नहीं दिखेगा

खाद का उपयोग कहां करें?

गमलों में डालें

बगीचे की मिट्टी में मिलाएं

पौधों की जड़ों में उपयोग करें

बीमार पौधों के हिस्से

जज ने पौधारोपण का महत्व बताया

न्यायाधीश आनंद कुमार तिवारी ने कहा कि पौधा एक बच्चे के समान होता है। इसे सुरक्षा और देखभाल की जरूरत होती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए हर व्यक्ति से एक पौधा लगाने की अपील की। साथ ही पंचतत्वों के महत्व पर प्रकाश डाला।

कोर्ट परिसर में आज जज समेत अन्य कोर्ट कर्मचारियों ने पौधे रोपे।

कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश अंजनी नंदन जोशी, जितेन्द्र कुमार पाराशर, दिनेश कुमार नोटिया, गिर्राज प्रसाद गर्ग, दिलीप सिंह और रंजीता राव सोलंकी मौजूद रहे।



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