MP News: नौकरी छूटी तो शुरू किया दूध बेचने का काम, आज हर साल कमा रहा लाखों

MP News: नौकरी छूटी तो शुरू किया दूध बेचने का काम, आज हर साल कमा रहा लाखों


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यह कहानी है खरगोन जिले के छोटे से गांव छोटी कसरावद के एक ऐसे युवा अनंत की, जो आज कई लोगों के लिए मिसाल बन चुका है. कोविड में नौकरी छूट गई. हार नहीं मानी और गांव लौटकर दूध बेचने का काम शुरू किया और आज लाखों की आमदनी कमा रहे है.

k खरगोन जिले के छोटे से गांव का एक युवा आज अपने दम पर मिसाल बन चुका है. 30 साल के अनंत जैन की कहानी आज कई बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणा है. एक समय था जब वे इंदौर में नौकरी कर रहे थे, लेकिन कोविड में नौकरी छूट गई. हार नहीं मानी और गांव लौटकर दूध बेचने का काम शुरू किया और आज लाखों की आमदनी कमा रहे है.

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बता दें कि, छोटी कसरावद के अनंत इंदौर की एक प्राइवेट कंपनी में हर महीने 75 हजार रुपए की इंजीनियर की नौकरी करते थे. लेकिन महामारी के दौरान अचानक सब कुछ बंद हो गया. वे वापस गांव लौटे और वहां देखा कि लोग दूध में मिलावट कर रहे हैं. उन्होंने तय किया कि अब गांववालों को शुद्ध दूध देंगे.

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शुरुआत स्वयं के खर्चे पर 2-3 भैंसों से की. खुद लोगों के घर-घर जाकर दूध देने लगे. शुद्धता और मेहनत ने धीरे-धीरे पहचान दिलाई और मांग बढ़ने लगी. अब वे हर दिन करीब 700 लीटर दूध बेचते हैं और कई कंपनियों को भी सप्लाई देते हैं.

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अनंत ने दूध व्यवसाय के साथ अपनी खेती की दिशा भी बदली है. अब वे कपास, मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की बजाय नेपियर घास (CO-11) की खेती कर रहे हैं. इससे दूध देने वाले पशुओं को बेहतर चारा मिलता है और उत्पादकता बढ़ती है.

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गौरतलब है कि, CO-11 घास में 22% न्यूट्रिशन होता है, जिससे पशु सेहतमंद रहते हैं और दूध की क्वालिटी भी बेहतरीन होती है. अतिरिक्त घास को अन्य पशुपालकों को बेचते हैं, जिससे लगभग 50 हजार रुपए महीने की अतिरिक्त आय होती है. रत्नेश डेयरी फॉर्म हाउस के नाम से उनकी संस्था है.

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सरकार की योजनाएं भी उनकी सफलता की ताकत बनीं. पहले नाबार्ड से 5 लाख का लोन लिया, जिसमें डेढ़ लाख सब्सिडी मिली. बाद में पीएम रोजगार सृजन योजना (PMEGP) के तहत 19 लाख का लोन मिला, जिसमें 7 लाख रुपए सब्सिडी मिली. जिससे बिजनेस को आगे बढ़ाने में मदद मिली.

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अनंत जैन का मानना है कि सरकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनका सही उपयोग किया जाए. उन्होंने संसाधनों की कमी को बहाना नहीं बनाया, बल्कि उसे अवसर में बदल दिया. आज उनका नाम खरगोन जिले के सफल डेयरी उद्यमियों में लिया जाता है.

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अब हर महीने सारा खर्च निकालने के बाद करीब 80 हजार से ज्यादा की शुद्ध कमाई होती है. उन्होंने अपने डेयरी फॉर्म पर न सिर्फ 7 लोगों को नौकरी दी है. बल्कि इनके रहने और खाने की व्यवस्था भी फार्म हाउस पर की गई है.

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आज अनंत जैन का नाम खरगोन जिले के सफल डेयरी उद्यमियों में लिया जाता है. जिनके पास कभी नौकरी नहीं थी, आज वे खुद लोगों को रोजगार दे रहे हैं. उनकी कहानी बताती है कि जज़्बा हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं.

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