पिता कोयला खान में काम करने वाले, बेटा बना टीम इंडिया का खूंखार गेंदबाज

पिता कोयला खान में काम करने वाले, बेटा बना टीम इंडिया का खूंखार गेंदबाज


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Umesh yadav father works in Coal Mine :पिता कोयले की खान में काम करते थे और बेटे उमेश को बनाना चाहते थे पुलिस में भर्ती. नियती को कुछ और ही मंजूर था.

उमेश यादव इस वक्त टीम इंडिया का हिस्सा नहीं हैं लेकिन कभी टीम के तेज गेंदबाजी की जान थे

नई दिल्ली. भले ही इस वक्त भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज उमेश यादव टीम इंडिया से बाहर चल रहे हों लेकिन उनकी प्रतिभा का लोहा दुनिया मानती है. गरीब परिवार में जन्में इस गेंदबाज के पिता कोयला खान में काम करते थे और बेटे को पुलिस में भर्ती करवाना चाहते थे लेकिन नायती को कुछ और ही मंजूर थी. उमेश ने क्रिकेट को चुना और बन गए भारतीय टीम के तेज गेंदबाज. उनकी तेज रफ्तार गेंद ने अच्छे अच्छे बल्लेबाजों की गिल्लियां उड़ाई है.

भारतीय टीम के अनुभवी गेंदबाज उमेश यादव का जन्म 25 अक्टूबर 1987 को नागपुर में हुआ था. आज उमेश यादव करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं लेकिन उनका बचपन बेहद गरीबी और संघर्ष में बीता. उनके पिता कोयले की खदान में काम करते थे और उनके पास उमेश को अच्छे कॉलेज में पढ़ाने के लिए पैसे भी नहीं थे. इसके बावजूद उमेश ने हार नहीं मानी और अपने सपनों को साकार किया.

उमेश के पिता तिलक यादव मूल रूप से यूपी के देवरिया जिले के रहने वाले थे. कोयले की खदान में नौकरी के कारण वे यूपी से नागपुर आ गए. उमेश का परिवार नागपुर के खापरखेड़ा गांव में रहता था. इस गांव में ज्यादातर लोग कोयले की खदानों में काम करते हैं. उनके पिता चाहते थे कि उनके बच्चों में से कोई एक कॉलेज में पढ़े लेकिन खराब आर्थिक स्थिति के कारण यह संभव नहीं हो सका. उमेश की कद-काठी अच्छी थी, इसलिए उनके पिता उन्हें पुलिस या सेना का सिपाही बनाना चाहते थे.

पिता के कहने पर उमेश ने सरकारी नौकरी के लिए काफी कोशिश की लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सके. जब उमेश बार-बार कोशिश करने के बावजूद परीक्षा में पास नहीं हो पाए तो उन्होंने अपने पिता को क्रिकेटर बनने के अपने सपने के बारे में बताया. क्रिकेट में करियर बनाने का फैसला करने वाले उमेश ने टेनिस बॉल छोड़कर लेदर बॉल से प्रैक्टिस करना शुरू किया. लेदर बॉल से खेलने के बाद उमेश ने विदर्भ के लिए खेलना शुरू किया.

उस समय तक उमेश के पिता के पास भी इतने पैसे नहीं थे कि वे उमेश के क्रिकेट का खर्च उठा सकें, लेकिन उमेश ने बिना हार माने और बिना किसी बहाने के अपने क्रिकेट के शौक को जारी रखा. उनकी इसी जिद का नतीजा है कि आज उमेश टीम इंडिया के बेहतरीन गेंदबाज हैं.

2010 में टीम इंडिया में जगह मिली

विदर्भ के लिए खेलने वाले उमेश यादव को आखिरकार 2008 में रणजी ट्रॉफी खेलने का मौका मिला. मैच की पहली पारी में उमेश ने 75 रन देकर 4 विकेट लिए. इसके बाद उन्हें आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ खेलने का मौका मिला और फिर 2010 में उन्होंने भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया. उमेश ने अब तक भारत के लिए 136 इंटरनेशनल मैच खेले हैं और 276 विकेट लिए हैं. उन्होंने 57 टेस्ट, 75 वनडे और 9 टी20 मुकाबले में खेला.

Viplove Kumar

15 साल से ज्यादा वक्त से खेल पत्रकारिता से सक्रिय. Etv भारत, ZEE न्यूज की क्रिकेट वेबसाइट में काम किया. दैनिक जागरण वेबसाइट में स्पोर्ट्स हेड रहा. ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, क्रिकेट और फुटबॉल वर्ल्ड कप कवर किया. अक्टूब…और पढ़ें

15 साल से ज्यादा वक्त से खेल पत्रकारिता से सक्रिय. Etv भारत, ZEE न्यूज की क्रिकेट वेबसाइट में काम किया. दैनिक जागरण वेबसाइट में स्पोर्ट्स हेड रहा. ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, क्रिकेट और फुटबॉल वर्ल्ड कप कवर किया. अक्टूब… और पढ़ें

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