मिथिलेश गुप्ता/ इंदौर: राजा रघुवंशी और सोनम की शादी एक वक्त पर दो घरों के मिलन की बड़ी मिसाल मानी गई थी. शादी के वक़्त राजा के परिवार ने सोनम को करीब 15 लाख रुपए से ज्यादा की ज्वेलरी दी थी. लेकिन अब हालात ऐसे बदले कि वही गहने लौटाने पड़े वो भी थाने के रास्ते से.
राजेंद्र नगर थाना इस पूरे मामले का गवाह बना, जहां सोनम के भाई गोविंद ने खुद पहुंचकर इस गहनों की वापसी की लिखापढ़ी की. दस्तावेज़ों में बाकायदा जिक्र है कि यह वापसी दोनों परिवारों की आपसी सहमति से की गई है.
गहनों से नहीं, इज़्ज़त से था रिश्ता
ये सिर्फ सोने-चांदी के गहनों का मामला नहीं है. यह उस सम्मान, उस रिश्ते और उस भरोसे की कहानी है जो अब किताब के किसी अधूरे पन्ने की तरह लगती है. जब ये ज्वेलरी सोनम को दी गई थी, तब वह एक नई जिंदगी की शुरुआत कर रही थी. लेकिन वक्त ने ऐसी करवट ली कि सब कुछ बदल गया.
पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज
राजा की हत्या के बाद पूरा केस मीडिया की सुर्खियों और कोर्ट की बहसों में उलझता चला गया. लेकिन इस बीच जो बात लोगों की नजरों से छुपी रही, वह थी इन गहनों की वापसी. पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज इस वापसी में सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, इसमें एक भाई का दर्द, एक बहन की खोई हुई दुनिया और दो परिवारों की कड़वाहट भी शामिल थी.
दोनों पक्षों की सहमति बनी बड़ा संकेत
इस केस में एक दिलचस्प बात ये भी है कि राजा के परिवार और सोनम के परिवार दोनों ने ये माना है कि ज्वेलरी वापस कर दी गई है. ऐसे वक्त में जब दोनों ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे हैं, यह सहमति हैरान भी करती है और सोचने पर मजबूर भी.
क्या इस वापसी से बदलेगी केस की दिशा?
अब सवाल ये है कि इस वापसी का असर केस की सुनवाई पर कितना पड़ेगा. क्या कोर्ट इसे एक जिम्मेदार कदम मानेगा या सबूत की तरह देखेगा? ये तो वक्त ही बताएगा. मगर इतना साफ है कि ये वापसी सिर्फ गहनों की नहीं थी, बल्कि बीते रिश्तों के बोझ को भी हल्का करने की एक कोशिश थी.
जैसे-जैसे केस आगे बढ़ेगी, और कहानियां सामने आएंगी
राजा रघुवंशी हत्याकांड अभी अपने मुकाम तक नहीं पहुंचा है. लेकिन इस ज्वेलरी की वापसी ने जरूर कुछ सवाल खड़े कर दिए हैं. जवाब तो आने वाले वक्त में ही मिलेंगे.