द्रविड़-गांगुली के आने से इस बैटर का करियर हुआ खत्म, कभी अगले गावस्कर कहलाते थे

द्रविड़-गांगुली के आने से इस बैटर का करियर हुआ खत्म, कभी अगले गावस्कर कहलाते थे


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Sanjay Manjrekar compared to Sunil Gavaskar: संजय मांजरेकर 60 साल के हो गए.भारत के इस बल्लेबाज ने एक बार जिम्बाब्वे में 9 घंटे क्रीज पर बिताए थे. उन्होंने हरारे में अंगद की तरह क्रीज पर पांव जमाए और टीम को हार …और पढ़ें

संजय मांजरेकर ने हरारे में 9 घंटे बैटिंग कर भारत को मुश्किल से निकाला था.

हाइलाइट्स

  • संजय मांजरेकर 60 साल के हो गए
  • मांजरेकर को क्रिकेट विरास में मिला था
  • संजय के पिता भी इंटरनेशनल क्रिकेटर थे
नई दिल्ली. संजय मांजरेकर ने क्रिकेट से संन्यास के बाद कमेंट्री में एंट्री मारी. वह दुनिया के मशहूर क्रिकेट कमेंटेटर्स में से एक हैं. मांजरेकर 60 साल के हो गए. उन्होंने कई बार टीम के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई. हरारे में खेले गए टेस्ट मैच में जहां सचिन तेंदुलकर और मोहम्मद अजहरुद्दीन सरीखे दिग्गज फेल हो गए वहीं पर मांजरेकर ने खूंटा गाड़ दिया. उन्होंने लगभग 9 घंटे बैटिंग कर शतक जमाया और टेस्ट को ड्रॉ कराया. मांजरेकर की घरेलू क्रिकेट में तूती बोलती थी. जितना सफल वो घरेलू क्रिकेट में हुए उतना वो इंटरनेशनल क्रिकेट में नहीं हो पाए. उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा कि उनका करियर राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली की वजह से जल्दी खत्म हो गया.

संजय मांजरेकर (Sanjay Manjrekar) वर्तमान में क्रिकेट कमेंटेटर की भूमिका में हैं. वह आईपीएल में एक सीजन के कमेंट्री के करोड़ों रुपये चार्ज करते हैं. उन्होंने साल 2018 में अपनी आत्मकथा ‘इंपर्फेंक्ट’ लॉन्च किया था. इस किताब में मांजरेकर ने अपने क्रिकेट करियर के बारे में विस्तार से बताया.उन्होंने इसमें लिखा था कि जब उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहा उस समय वो फॉर्म में नहीं थे, ऐसा बिल्कुल नहीं था. मांजरेकर ने लिखा था कि सौरव गांगुली और राहु द्रविड़ के खेल को देखकर उन्हें समझ में आ गया था कि अब उनका समय पूरा हो चुका है. उन्होंने 32 की उम्र में रिटायरमेंट का ऐलान किया था.

‘मुझे लगा कि अब मेरा समय पूरा हो गया है’
संजय मांजरेकर ने अपनी किताब में लिखा था कि साल 1996 के इंग्लैंड दौरे पर जब टीम इंडिया गई थी, उस समय द्रविड से लोगों को काफी उम्मीदें थीं.मांजरेकर ने कहा कि द्रविड़ की जगह उस दौरे पर सौरव गांगुली उभरकर सामने आए. द्रविड़ की तारीफ करते हुए संजय ने लिखा कि ऐसा लगा जैसे वो भारतीय टीम के लिए बने हैं. जब मैंने उन्हें खेलते हुए देखा और जिस तरह से उन्होंने बैटिंग की, तब मुझे लगा कि अब मेरा समय पूरा हो गया है. मांजरेकर तकनीकी रूप से दक्ष खिलाड़ी थे. उन्होंने विदेश में खूब रन बनाए. सचिन तेंदुलकर ने मांजरेकर को मिस्टर डिफरेंट नाम दिया था.

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तकनीक में गावस्कर से होती थी तुलना
मांजरेकर ने 111 इंटरनेशनल मैच खेले.वह तकनीक के मामले में काफी कमाल के थे.उनकी सुनील गावस्कर से तुलना होती थी. साल 1992 में टीम इंडिया हार के करीब थी लेकिन मांजरेकर के दम पर ही टीम इंडिया मैच को ड्रॉ कराने में कामयाब हुई थी. हरारे में टेस्ट मैच में जिम्बाब्वे ने पहली पारी में 456 रन बनाए. इसके बाद अजहरुद्दीन की कप्तानी वाली भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही. रवि शास्त्री (11), सचिन तेंदुलकर (0) और अजहरुद्दीन (9) पर जल्दी पवेलियन लौट गए. भारतीय टीम के 5 विकेट 101 रन तक गिर गए थे. लेकिन मांजरेकर ने करीब 9 घंटे तक बल्लेबाजी की और टीम को 300 के पार पहुंचाया. उन्होंने 422 गेंदों का सामना किया और शतकीय पारी खेली. यह टेस्ट ड्रॉ पर खत्म हुआ.

संजय मांजरेकर का क्रिकेट करियर
संजय मांजरेकर ने 37 टेस्ट खेले और 37 की औसत से 2043 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 4 शतक और 7 अर्धशतक लगाए. 218 रन उनके टेस्ट करियर की सबसे बड़ी पारी रही. उन्होंने 74 वनडे में 33 की औसत से 1994 रन बनाए. एक शतक और 15 अर्धशतक जड़े. वे फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 10 हजार से अधिक रन बना चुके हैं. उन्होंने 147 मैच में 55 की औसत से 10252 रन बनाए. जिसमें 31 शतक और 46 अर्धशतक शामिल हैं.

Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से… और पढ़ें

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