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Sesame Cultivation Tips: ऐसे किसान जो हर साल तिल की खेती करते हैं लेकिन उत्पादन उम्मीद से कम मिलता है तो कृषि एक्सपर्ट की ये बातें आपको बंपर फायदा देंगी.
हाइलाइट्स
- तिल की खेती में सल्फर का उपयोग करें
- फसल चक्र अपनाकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखें
- मिट्टी परीक्षण कराकर ही फसल लगाएं
छतरपुर के नौगांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ कृषि वैज्ञानिक डॉ. कमलेश अहिरवार बताते हैं कि जो भी किसान भाई तिल की खेती कर रहे हैं तो वह महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में जरूर रखें. तिल की फसल जो होती है, उससे खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर होती है. क्योंकि, तिल का बीज जितना छोटा होता है, पेड़ उतना ही बड़ा होता है.
किसान भाई अगर अपने खेत में खरीफ सीजन की फसलों में तिल की फसल लगा रहे हैं तो उनको ध्यान देना है कि अगले सीजन में उस खेत में तिलहन वाली फसलें न लगाएं. ऐसे नहीं करने पर खेत की उर्वरा शक्ति कमजोर हो जाती है. हालांकि, ऐसे खेत में वह सब्जी जरूर लगा सकते हैं. साथ ही खेत में दलहन की फसलें लगा रहे हैं तो अगले सीजन में वहां पर दलहन की फसलें न लगाएं. बल्कि, उस खेत में अनाज वाली फसलें लगाएं. इससे खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी. कुल मिलाकर हर सीजन में फसल रिपीट न करें.
तिल खेत में सल्फर का करें इस्तेमाल
डॉ. कमलेश बताते हैं कि किसान भाई अगर अपने खेत में तिल की फसल लगा रहे हैं तो उस खेत में सल्फर का इस्तेमाल जरूर करें. सल्फर के इस्तेमाल से तिल फसल का उत्पादन अच्छा होता है और इससे खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति बरकरार रहती है.
फसल लगाने से पहलें करा लें परीक्षण
डॉ. कमलेश बताते हैं कि आप अपने खेत में किसी भी फसल को लगाने से पहले एक बार अपने खेत की मिट्टी का परीक्षण जरूर कर लें. मिट्टी का परीक्षण कराना बहुत ही जरूरी होता है. मिट्टी परीक्षण के बाद ही उस खेत में आप किसी भी फसल को लगाने का सोचें.