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Khandwa News: कुछ लोग नींबू-मिर्च टांगने को अंधविश्वास मान सकते हैं लेकिन हकीकत में यह एक सांस्कृतिक प्रतीक है, जो लोगों को मानसिक रूप से स्थिर और सुरक्षा का अहसास कराता है. जैसे कोई रक्षा सूत्र या ताबीज पहनते …और पढ़ें
उन्होंने कहा, ‘सात मिर्च और एक नींबू के इस संयोजन को नजरदोष से बचाने के लिए टांगा जाता है. इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा या बुरी नजर को दूर रखना होता है. पंडित भरत शर्मा बताते हैं कि शुरू से ही सात मिर्च और एक नींबू का प्रयोग होता आया है. ऐसा माना जाता है कि यह संयोजन ‘अलक्ष्मी’ यानी दरिद्रता की देवी को भोजन अर्पित करने के समान है. माना जाता है कि लक्ष्मी जी की एक बहन अलक्ष्मी होती हैं, जो रात के समय भ्रमण करती हैं और जहां उनका भोग लगाया जाता है, वहां से आगे निकल जाती हैं. नींबू और मिर्च उन्हीं के लिए टांगे जाते हैं ताकि वे दुकान या घर के भीतर प्रवेश न करें.
अंबिका प्लाजा शिवाजी चौक के व्यापारी मयंक कपूर और पटेल ऑप्टिकल के मालिक हरिओम पटेल बताते हैं कि उनके परिवार में यह परंपरा दादा-परदादा के समय से चली आ रही है. वे कहते हैं, ‘जब से दुकान ली है, हम हर शनिवार नींबू-मिर्च जरूर लगाते हैं. यह सिर्फ प्रतीक नहीं, एक सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम है. जब शनिवार को इसे टांगते हैं, तो पूरा सप्ताह व्यापार अच्छा चलता है, मन शांत रहता है और किसी प्रकार की बाधा नहीं आती.’ उनका मानना है कि यह सिर्फ दिखावा नहीं है बल्कि एक मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. उनका दावा है कि इससे दुकान में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा स्वतः ही बाहर रह जाती है.
यह नींबू-मिर्च हर शनिवार या मंगलवार को बदला जाता है. पंडित भरत शर्मा के अनुसार, वह प्रति शनिवार और मंगलवार करीब 400 से ज्यादा दुकानों में यह उपाय पहुंचाते हैं. यह प्रतीक एक सप्ताह तक लटकाया जाता है और फिर सूखने के बाद बदल दिया जाता है.
विज्ञान क्या कहता है?
विज्ञान की नजर से देखें, तो नींबू और मिर्च में एसिडिक तत्व होते हैं. जब इन्हें एक धागे में पिरोकर लटकाया जाता है, तो वातावरण में नमी या हवा की हलचल से ये धीरे-धीरे अपना रस छोड़ते हैं, जिससे एक तरह की प्राकृतिक गंध या ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो मच्छर, कीड़े या कुछ हद तक बैक्टीरिया को भी दूर रखती है. यह वैज्ञानिक आधार भी इस परंपरा को एक हद तक मजबूत बनाता है.
अंधविश्वास या समझदारी?
कुछ लोग इसे अंधविश्वास मान सकते हैं लेकिन वास्तव में यह एक सांस्कृतिक प्रतीक है, जो लोगों को मानसिक रूप से स्थिर और सुरक्षित महसूस कराता है. जैसे कोई ताबीज या रक्षा सूत्र पहनते हैं, वैसे ही यह भी एक प्रतीकात्मक रक्षा है. नींबू और सात मिर्च टांगने की परंपरा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं बल्कि आस्था, अनुभव और व्यवहारिक समझ का संगम है. यह परंपरा हमें बताती है कि हमारी भारतीय संस्कृति में हर कार्य के पीछे कोई न कोई गूढ़ अर्थ और तर्क जरूर छिपा होता है, चाहें इसे आप परंपरा मानें या प्रयोग. यह आज भी लाखों व्यापारियों और परिवारों की मानसिक और आध्यात्मिक ढाल बना हुआ है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.