बरसात में बनती है निमाड़ की सबसे चहेती भाजी, आमाड़ी के स्वाद के दीवाने हैं यहां बच्चे-बूढ़े सभी

बरसात में बनती है निमाड़ की सबसे चहेती भाजी, आमाड़ी के स्वाद के दीवाने हैं यहां बच्चे-बूढ़े सभी


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Nimar Special Bhaji: बरसात के मौसम में मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल की रसोई में खास खुशबू फैल जाती है आमाड़ी की भाजी की. जानिए इस पारंपरिक व्यंजन की रेसिपी, सेहत से जुड़ी खूबियां और इसका सांस्कृतिक महत्व.

हाइलाइट्स

  • आमाड़ी की भाजी निमाड़ की सांस्कृतिक पहचान है.
  • बरसात में आमाड़ी की भाजी सेहत और स्वाद का पैकेज है.
  • आमाड़ी की भाजी मक्के की रोटी के साथ खाई जाती है.

मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल में जब बारिश की पहली बूँदें ज़मीन पर गिरती हैं, तो खेतों से लेकर रसोई तक एक खास महक फैल जाती है. ये महक होती है आमाड़ी की भाजी की जो केवल एक सब्ज़ी नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और स्वाद की आत्मा है.

क्या है आमाड़ी की भाजी?

आमाड़ी एक देसी मौसमी वनस्पति है, जो खासतौर पर बरसात में खेतों, कच्ची ज़मीन और बाड़ों में अपने आप उग आती है. इसके हरे, चिकने और हल्के खट्टे पत्तों से बनाई जाने वाली भाजी को निमाड़ के लोग बड़े चाव से खाते हैं.

इसमें छोटे फल भी लगते हैं, जिन्हें कुछ गांवों में कोहड़ा या नरई कहा जाता है. इनका स्वाद इतना अलग होता है कि लोग इसे नींबू की तरह खट्टा तो मानते हैं, लेकिन पहचानते हैं अपने अलहदा देसी फ्लेवर से.

कैसे बनाई जाती है ये भाजी?

सबसे पहले पत्तों और फलों को साफ करके हल्के नमक में उबाला जाता है, जिससे इनका हल्का कड़वापन निकल जाए. फिर इसमें पहले से पकी हुई तुअर या मूंग दाल मिलाई जाती है. आख़िर में लहसुन, राई, हींग और लाल मिर्च का देसी तड़का लगाकर इसे परोसा जाता है. यह भाजी आम तौर पर मक्के की रोटी, ज्वार की भाकरी या सादी चपाती के साथ खाई जाती है.

सेहत और स्वाद का पूरा पैकेज

आमाड़ी सिर्फ स्वाद में ही नहीं, सेहत में भी भरपूर है. इसमें आयरन, कैल्शियम और विटामिन C पाया जाता है. यह पाचन में मदद करती है और खासतौर पर बरसात के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत देती है. शरीर को ठंडक देने वाली इस भाजी को प्राकृतिक डिटॉक्स की तरह भी माना जाता है.

सिर्फ सब्जी नहीं, एक परंपरा

खंडवा निवासी लव जोशी बताते हैं कि “आमाड़ी की भाजी सिर्फ खाने का साधन नहीं, बल्कि यह निमाड़ के घरों की परंपरा है. महिलाएं इसे बनाते हुए लोकगीत गाती हैं, और यह मेलजोल का बहाना भी बन जाती है.”

हर साल सावन में जब नर्मदा घाटों पर मेले और धार्मिक आयोजन होते हैं, तो वहां आमाड़ी की भाजी के साथ मक्के की रोटी की खुशबू लोगों को खींच लाती है.

बारिश में ही क्यों बनती है ये भाजी?

बरसात में आमाड़ी सबसे ज़्यादा उगती है. इसके पत्ते ताजे होते हैं और इसका खट्टापन शरीर को गर्मी से राहत देता है. यही कारण है कि निमाड़ में मानसून के दौरान यह भाजी हर हफ्ते घरों में ज़रूर बनती है. आमाड़ी की भाजी सिर्फ स्वाद या सेहत नहीं, बल्कि एक मौसम से जुड़ा हुआ देसी अनुभव है. जो भी इसे पहली बार चखता है, उसे लगता है कि मानसून का असली स्वाद तो अब मिला है.

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बरसात में बनती है निमाड़ की सबसे चहेती भाजी, आमाड़ी के स्वाद के दीवाने हैं सभी



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