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Khandwa News: 1 अप्रैल से 16 जुलाई 2025 तक खंडवा के जिला अस्पताल में सांप के काटने के 58 मामले सामने आए. इनमें से 26 केस जहरीले सांप के थे और 32 मामले बिना जहर वाले सर्पदंश के थे. पांच लोगों की जान नहीं बचाई जा…और पढ़ें
जिला अस्पताल के डॉ योगेश शर्मा, जो स्नेक बाइट नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी भी हैं, लोकल 18 को बताते हैं कि जैसे ही मानसून शुरू होता है, जुलाई से अक्टूबर तक सांप के काटने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी होती है. खेतों, झाड़ियों और पानी भरे इलाकों में सांपों की आवाजाही बढ़ जाती है और अनजाने में इंसानों के उनके संपर्क में आकर सर्पदंश की घटनाएं हो जाती हैं.
1 अप्रैल 2025 से लेकर 16 जुलाई 2025 तक खंडवा जिला अस्पताल में कुल 58 स्नेक बाइट के केस दर्ज किए गए हैं. इनमें से 26 मामले जहरीले सांप के थे. 32 मामले बिना जहर वाले स्नेक बाइट के थे. पांच लोगों की मौत हुई. बाकी सभी को समय पर इलाज देकर बचा लिया गया. इन आंकड़ों से साफ है कि जहरीले सांपों का खतरा न केवल बना हुआ है बल्कि बारिश के मौसम में और गंभीर हो जाता है.
सरकारी रिकॉर्ड में किसी सांप की प्रजाति विशेष दर्ज नहीं होती लेकिन डॉक्टरों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार करैत और कोबरा सांप ही अधिकतर मामलों में मौत की वजह बन रहे हैं. करैत रात में काटता है और उसकी पहचान करना मुश्किल होता है. कोबरा दिन में भी दिखाई देता है और उसका जहर तुरंत तेज असर करता है. इन दोनों सांपों का जहर तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर असर करता है, जिससे शरीर धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है. अगर समय पर इलाज न हो तो 2 से 6 घंटे के भीतर मौत भी हो सकती है.
सर्पदंश का 100 फीसदी इलाज संभव
डॉ शर्मा ने कहा, ‘कोबरा या करैत सांप के काटने के बाद 100 फीसदी इलाज संभव है, बशर्ते मरीज समय पर अस्पताल पहुंच जाए लेकिन अक्सर ग्रामीण इलाकों में लोग झाड़-फूंक या अंधविश्वास में समय बर्बाद कर देते हैं.’ सरकार की ओर से हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराई गई है. जरूरत है सिर्फ समय पर पहुंचने और सही इलाज लेने की.
जागरूकता और सावधानी जरूरी
बारिश के मौसम में सांपों से बचाव के लिए लोगों को कुछ खास सावधानियां बरतनी चाहिए, जैसे- खेतों में काम करते समय जूते और दस्ताने पहनें. रात में टॉर्च का इस्तेमाल करें. घर के आसपास झाड़ियों और गड्ढों की सफाई करें. सोते समय मच्छरदानी लगाएं. जमीन पर न सोएं. सांप के काटते ही तुरंत अस्पताल जाएं, झाड़-फूंक में समय न गवाएं.