स्वच्छ सर्वेक्षण 2024: गीला-सूखा कचरा अलग नहीं कर पाए हम, कचरा उठाने और टायलेट साफ करने में पीछे रहा निगम – Gwalior News

स्वच्छ सर्वेक्षण 2024:  गीला-सूखा कचरा अलग नहीं कर पाए हम, कचरा उठाने और टायलेट साफ करने में पीछे रहा निगम – Gwalior News


स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 के रिजल्ट में नगर निगम के प्रयासों के साथ की हम सबका पूरा सहयोग मिलने में कहीं कमी रह गई है। कारण, गार्बेज फ्री सिटी (कचरा मुक्त शहर) की कैटेगरी में 500 नंबर कम मिले। 1300 नंबरों की परीक्षा में ग्वालियर को 800 अंक मिले। कचरा कै

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डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और पब्लिक टॉयलेट के मामले में 100% रिजल्ट सामने नहीं आए। केदारपुर स्थित लैंडफिल साइट ने साल 2023 की अपेक्षा साल 2024 में सुधार किया। यहां सौ प्रतिशत लेगेसी वेस्ट का निष्पादन नहीं होने से भी नंबरों पर असर पड़ा है।

ग्वालियर को आगे ले जाने में लाल​ टिपारा में शुरू हुआ बायो सीएनजी प्लांट, जलालपुर का सीएंडडी वेस्ट प्लांट और बरा की डंपिंग साइट पर तैयार पार्क की भूमिका प्रमुख रही। वाटर बॉडीज के लिए कटोरताल, बैजाताल और लक्ष्मण तलैया का सर्वे हुआ था। बैजाताल में वोटिंग चालू मिली। दृश्यता सर्वे में रोड पर सफाई टीम को दिखी थी।

कम अंक की 3 वजह

लैंडफिल साइट: यहां 40% कचरे के निपटान का रिकार्ड मिला। 100% होता तो अंक बढ़ जाते।

कचरा सेग्रीगेशन: इस वर्ष 65% स्थान पर गीला-सूखा कचरा अलग मिला। बीते वर्ष आंकड़ा 98% था। कचरा ठिया खत्म नहीं: शहर के अंदर पूरे कचरा ठिया खत्म होने से भी अंक कट गए।

इन कारण से दो पायदान आगे बढ़ गए

वाटर प्लस: बैजाताल, कटोराताल और लक्ष्मण तलैया वाटर बॉडी का सर्वे हुआ। मानक के अनुसार ही मिले।

शहर के 74 सार्वजनिक शौचालयों में सर्वे के दौरान ठीक व्यवस्था मिली। रेमिडेशन साइट

निगम ने बरा कचरा डंपिग साइट को बेहतर पार्क के रूप में बदला। वहां हरियाली काफी है। साथ ही आस-पास के लोग घूमने भी पहुंच रहे हैं। कचरा प्रोसेसिंग: निगम ने जलालपुर में सीएंडडी वेस्ट का प्लांट चालू कर दिया। यहां पर पेवर्स, टाइल्स बन रहे हैं। । लालटिपारा में बायो सीएनजी प्लांट में गोबर से गैस बन रही है। सफाई मित्र: नगरीय क्षेत्र में 3हजार से ज्यादा सफाई मित्रों ने सर्वे के दौरान सफाई पर बेहतर काम किया। फीडबैक: टीमों ने सफाई व्यवस्था का फीडबैक लिया, जिसके परिणाम सार्थक रहे।

भास्कर सरोकार

स्वच्छ सर्वेक्षण में नगर निगम तो अपना काम कर रही है, लेकिन हमें भी जागरूक होने की आवश्यकता है। पिछले वर्ष 98% लोगों ने ऐसा किया, लेकिन इस वर्ष सिर्फ 65% लोगों ने गीला-सूखा कचरा घर से अलग करके नहीं दिया, जिससे अंक कम आए।

सहयोग से बेहत​र रिजल्ट स्वच्छ सर्वेक्षण में हम 14 वें नंबर पर आए हैं। वहीं राष्ट्रीय मंच पर ग्वालियर को अवार्ड भी मिला है। ये सफलता निगम की टीम और जनसहयोग का परिणाम है। -डॉ.शोभा सिकरवार, महापौर

पहली बार मिला अवार्ड ^स्वच्छ सर्वेक्षण में ग्वालियर को मिनिस्ट्रियल अवार्ड प्राप्त हुआ है। यह पहली बार है जब मंच से शहर को स्वच्छता में अवार्ड मिला है। जिन क्षेत्रों में कमी रह गई है उनमें सुधार करेंगे। -संघ प्रिय, निगमायुक्त

भास्कर एक्सपर्ट – विनोद शर्मा, सेवानिवृत्त आयुक्त

निगम अमले के भरोसे ही नहीं जन और हो जागरूक ^निगम का अमला सफाई व्यवस्था में पूरी मेहनत लगता है। सेग्रीगेशन सिस्टम (गीला-सूखा कचरा अलग-अलग) को तभी बेहतर कर पाएंगे। जब ​जन को ट्रेनिंग के साथ-साथ टोकना भी जरूरी होगा। उन्हें सुविधाएं भी दी जाना चाहिए। ये काम स्वच्छता मित्र कर सकते हैं। निगम को रोज कचरा गाड़ी भेजना सुनिश्चित करना होगा। इससे लोग सड़कों पर कचरा नहीं फेंकेगे। कचरा ठिया पहले की तुलना में 80% खत्म हो चुके हैं।

शेष पर काम करने की जरूरत है। लैंडफिल साइट पर लेगेसी वेस्ट का काम तेजी से होता, तो फायदा ज्यादा मिल सकता है। इंदौर की व्यवस्था में जनता का सहयोग पूरा रहता है। यदि कोई कचरा फेंकने की कोशिश करता है तो पड़ोसी टोक देता है। ये सिस्टम जनता को ही तैयार करना होगा। स्वच्छता सिस्टम से जुड़े लोगों को बार-बार न बदला जाए। उन्हें एक कैलेंडर भी बनाकर दिया जाए। उसकी मॉनीटरिंग की जाए।



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