एमपी के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में लौटे ‘काले नायक’,अब टाइगर-चीता करेंगे पार्टी!

एमपी के वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में लौटे ‘काले नायक’,अब टाइगर-चीता करेंगे पार्टी!


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एमपी के रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में काले हिरणों की वापसी से वन विभाग में खुशी की लहर. जानिए कैसे यह बदलाव बाघों और चीतों के लिए भी वरदान बन सकता है.

अनुज गौतम, सागर: मध्य प्रदेश के सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों की सीमाओं में फैले वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में इन दिनों कुछ खास हो रहा है. जंगल की खामोशी में अब एक नई हलचल दिख रही है काले हिरणों की वापसी. एक ज़माना था जब ये दुर्लभ जीव दिखाई नहीं देते थे, लेकिन अब हर दिशा में उनके झुंड कुलांचे भरते दिख रहे हैं.

जंगल खाली हुआ, हिरणों ने पाई खुली आज़ादी!
दरअसल, पिछले कुछ सालों में यहां 40 से ज्यादा गांवों को विस्थापित किया गया है. इससे हज़ारों एकड़ की खुली ज़मीन पर घास के मैदान (ग्रासलैंड) बना दिए गए और यही मैदान काले हिरणों को बेहद पसंद आते हैं. अब इन मैदानों में काले हिरण खुलेआम दौड़ते दिख रहे हैं, और पर्यटक भी उनकी खूबसूरत झलकियों से बेहद आकर्षित हो रहे हैं. यह सिर्फ टूरिज्म ही नहीं, बल्कि जंगल की फूड चेन के लिए भी बड़ी खबर है.

बाघ और चीतों के लिए स्वादिष्ट शिकार!
वन विभाग के अफसर भी मानते हैं कि काले हिरणों की बढ़ती तादाद बाघों और जल्द आने वाले चीतों के लिए फायदेमंद साबित होगी. जंगल में शिकारी जानवरों के लिए सबसे जरूरी है संतुलित शिकार व्यवस्था और काले हिरण इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं.

प्रबंधन भी खुश, पर्यटन को लेकर आशावान
रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. ए.ए. अंसारी बताते हैं कि काले हिरण खुले जंगल और बड़े घास के मैदानों में रहना पसंद करते हैं. विस्थापन के बाद जो क्षेत्र खाली हुआ, वहां की परिस्थिति उनके अनुकूल हो गई इसलिए उनकी संख्या तेजी से बढ़ी है.

यहां अब तक 54 गांवों का विस्थापन हो चुका है और बाकियों की प्रक्रिया तेजी से चल रही है. रिजर्व की भोपाल, जबलपुर और खजुराहो से सीधी कनेक्टिविटी होने की वजह से पर्यटन की संभावनाएं भी खुलती जा रही हैं.

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एमपी के इस जंगल में लौटे ‘काले नायक’,अब टाइगर-चीता करेंगे जमकर पार्टी!



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