16 लाख का पैकेज छोड़ बना किसान: तीन गुना मुनाफा कमा रहा; कटनी में 500 से ज्यादा ग्रामीणों की मेहनत से ‘स्वीटकॉर्न विलेज’ बना गांव – Katni News

16 लाख का पैकेज छोड़ बना किसान:  तीन गुना मुनाफा कमा रहा; कटनी में 500 से ज्यादा ग्रामीणों की मेहनत से ‘स्वीटकॉर्न विलेज’ बना गांव – Katni News


कटनी में 500 से ज्यादा किसानों ने स्वीट कॉर्न की खेती कर गांव की पहचान बदल दी। तेवरी को ‘स्वीट कॉर्न’ वाले गांव नाम से जाना जाता है। अब 10 से 12 गांवों में 800 हेक्टेयर जमीन पर भुट्‌टे की खेती की जा रही है। यहां का भुट्‌टा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, द

.

दैनिक भास्कर की स्मार्ट किसान सीरीज में इस बार बात तेवरी के रहने वाले अरविंद कुशवाहा की। MBA पास अरविंद ने कुछ साल पहले 16 लाख के मोटे पैकेज वाली नौकरी छोड़कर पुश्तैनी धंधा खेती को अपना लिया। गांव में अरविंद जैसे कई किसान हैं, जाे स्वीट कॉर्न की खेती कर रहे हैं।

अरविंद ने 22 एकड़ जमीन पर स्वीट कॉर्न की खेती की है।

तेवरी की जलवायु स्वीट कॉर्न के लिए अच्छी 37 साल के अरविंद ने बताया कि कुछ साल पहले तक परंपरागत खेती करते थे। उसमें लागत ज्यादा और मुनाफा कम होता था। इधर, मेरी MBA भी कम्प्लीट हो चली थी। मल्टीनेशनल कंपनी में 16 लाख के पैकेज पर नौकरी भी लग गई थी। सब कुछ ठीक चल रहा था। फिर भी कुछ खालीपन लगता था।

नौकरी छोड़कर गांव आ गया। यहां कृषि विशेषज्ञों से जानकारी ली। मार्केट रिसर्च भी किया। हमारे पास कुल 40 एकड़ जमीन है। इसमें से 22 एकड़ में स्वीट कॉर्न की खेती शुरू कर दी। तीन लाख की लागत में करीब 8 लाख रुपए प्रॉफिट हुआ। फसल कटने के बाद ‘कार्बी’ (मक्के का डंठल) को डेयरी फार्मों में बेचते हैं, जिससे पशु आहार बनता है। इससे दूध उत्पादन में वृद्धि होती है। बाकी समय पर दूसरी चीजें उगाते हैं।

अरविंद कहते हैं कि देश का केंद्र बिंदु होने के कारण यहां जलवायु सामान्य है। इस कारण उत्तर भारत और दक्षिण भारत में उगाई जाने वाली फसलों की खेती करना सहज है। यहां की मिट्टी अधिक उपजाऊ है।

अरविंद ने बताया कि इस बार भी आठ से नौ लाख रुपए की आमदनी की उम्मीद है।

अरविंद ने बताया कि इस बार भी आठ से नौ लाख रुपए की आमदनी की उम्मीद है।

ढाई लाख रुपए लगाकर 6 लाख का प्रॉफिट तेवरी गांव के रहने वाले 46 साल के मिलन कुमार चक्रवर्ती भी बीए पास हैं। मिलन 17 एकड़ में स्वीट कॉर्न और देसी भुट्टा उगाते हैं। तीन महीने में ढाई लाख की लागत के बाद वह छह लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। मिलन ने बताया कि अमेरिकन भुट्टे यानी स्वीट कॉर्न की शुरुआत 12 साल पहले की थी।

एसडीओ बोले– किसानों को किया था प्रेरित कृषि विभाग के एसडीओ आरके चतुर्वेदी ने बताया कि स्वीट कॉर्न की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया था। पहली बार तेवरी गांव में उन्होंने ही बीज उपलब्ध कराया था। शुरुआती दौर में इस फसल से ज्यादा मुनाफा तो नहीं हो सका, लेकिन धीरे-धीरे बड़ा मुनाफा होने लगा। यहां के किसानों की तकदीर ही बदल गई। तेवरी गांव में करीब 800 हेक्टेयर (यानी 2000 एकड़) भूमि पर स्वीट कॉर्न और देसी भुट्टे का उत्पादन होता है। वर्तमान में 519 किसान इस खेती से जुड़े हैं।

आरके चतुर्वेदी ने बताया कि एक एकड़ में करीब ढाई किलो स्वीट कॉर्न का बीज बोया जाता है। इसमें लगभग 22 हजार पौधों की फसल तैयार होती है। उम्मीद के मुताबिक फसल होने के साथ बाजार भी अच्छा मिला तो एक एकड़ में करीब 70 से 80 हजार रुपए तक का मुनाफा हो जाता है।

एक एकड़ में 25 से 30 हजार रुपए खर्च स्वीट कॉर्न की खेती खासतौर पर अप्रैल महीने में की जाती है। एक एकड़ में 25 से 30 हजार रुपए तक की लागत आती है। बीज की बोवनी के तत्काल बाद खेत में पानी दिया जाता है। तीन दिन के बाद दूसरी बार पानी से सिंचाई की जाती है।

बीज बोने और दो बार पानी देने के बाद खरपतवार कि सफाई करने के लिए गुड़ाई की जाती है। इसके बाद दोबारा पानी से सिंचाई की जाती है और फिर उसमें खाद्य (डीएपी खाद, यूरिया, जिंक) डाली जाती है। इस बीच एक महीने बाद फसल में यदि इल्ली लग जाती है तो इमामेटिंग, क्लोरोपायरीफास सहित अन्य दवाओं का छिड़काव करना पड़ता है।

कटने से पहले तक 7-8 दिन में सिंचाई जरूरी भुट्टे का साइज अच्छा और रंग हरा होने के लिए दो से तीन बार खाद डाली जाती है। फसल कटने से पहले तक हर सात से आठ दिन में पानी से सिंचाई की जाती है। 15 अप्रैल के बाद की फसल साढ़े तीन महीने में तैयार हो जाती है। स्वीट कॉर्न जुलाई महीने के शुरुआत में बाजार में भेज दिया जाएगा।

दूसरे प्रदेशों में तेवरी के भुट्टे की डिमांड ज्यादा स्वीट कॉर्न की डिमांड मध्यप्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, यूपी, छत्तीसगढ़ और गुजरात में अधिक है। किसान का कहना है कि स्थानीय मार्केट से अच्छी कीमत दूसरे प्रदेश के व्यापारी देते हैं, इसलिए उन्हें अपनी उपज बिक्री के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता है।

एक बोरी में 100 भुट्‌टे के मिल जाते हैं 800 रुपए अरविंद ने बताया कि तेवरी के अलावा लिगरी, बिचुआ, देवरी भार, नैंगवा, लखनवारा में भी स्वीट कॉर्न की खेती हो रही है। उनका कहना है कि अगर एक एकड़ में मक्के की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में 120 बोरा भुट्टा निकलता है। एक बोरे में 100 भुट्टे रहते हैं, जो 500 से 800 रुपए के हिसाब से बिक जाता है।

बीज लगाने के 15 दिन बाद गुड़ाई करते हैं किसान अरविंद ने बताया कि खेत की जुताई करवाने के बाद खेत में क्यारी बनाई जाती है। इन क्यारियों में बीज लगा दिए जाते हैं। बीज लगाने के बाद पानी दिया जाता है। आठ दिन बाद फिर पानी देना पड़ता है। 15 दिन के बाद गुड़ाई (फसल के आसपास खरपतवार की सफाई) की जाती है।

गुड़ाई के 5 दिन बाद खाद डालते हैं। साथ में फसल की सिंचाई करनी पड़ती है। हर आठ दिन में सिंचाई की जरूरत होती है, इसलिए स्वीट कॉर्न की खेती ऐसे स्थान पर अधिक फायदेमंद है, जहां सिंचाई के साधन बेहतर हो।

डायबिटीज कंट्रोल करने में उपयोगी है स्वीट कॉर्न डायबिटीज के पेशेंट के स्वीट कॉर्न बहुत फायदेमंद है। इसमें मौजूद विटामिन बी शरीर में प्रोटीन, लिपिड और कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करता है। ठंड के मौसम में स्वीट कॉर्न सूप पीने से डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है।

इसके अलावा, स्वीट कॉर्न में मौजूद फाइबर ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है, जो दिल संबंधी बीमारियों को रोकता है। इसका नियमित सेवन आंख को स्वस्थ रखने, एंटीऑक्सीडेंट, स्वस्थ पाचन तंत्र और याददाश्त को बढ़ाने में मदद करता है।



Source link