इंदौर के दिनोंदिन बढ़ती समस्याओं को लेकर हाई कोर्ट में लगी जनहित याचिका की फाइनल सुनवाई के बाद कोर्ट ने इसके लिए पांच सदस्यीय हाई पॉवर कमेटी गठित की है। इसमें मेयर पुष्यमित्र भार्गव, कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर, प्रधान जिला न्यायाधीश एवं आरटीओ को शामिल किय
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राजलक्ष्मी फाउंडेशन द्वारा पांच वर्ष पूर्व दायर जनहित याचिका के मामले में 22 जुलाई को अंतिम सुनवाई हुई थी। इसमें सभी संबंधित पक्षों ने सुझाव दिए थे। इसमें जस्टिस विवेक रूसिया तथा न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी की युगलपीठ ने फैसला सुनाते हुए उच्च स्तरीय समन्वय समिति का गठन कर 8 सितंबर तक विस्तृत प्लान बनाकर कोर्ट में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने समिति में नगर निगम कमिशनर को इस समिति का संयोजक नियुक्त किया है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि समिति के किसी सदस्य की अनुपस्थिति की स्थिति में वे अपने अधीनस्थ अधिकारी, जिनका पदक्रम संबंधित विभाग में वरिष्ठ हो, को बैठक में भाग लेने हेतु अधिकृत कर सकते हैं। पिछली सुनवाई में न्यायमित्र के रूप में पेश हुए मेयर ने ट्रैफिक समस्याओं को हल करने के सुझाव दिए थे। मामले में अधिकारियों ने मौजूदा और प्रस्तावित पालन को कोर्ट के समक्ष रखा था। कोर्ट ने सुझावों को व्यावहारिक माना और इसे लागू करने के पूर्व उच्च स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया है।
पिछली सुनवाई में मेयर ने दिए थे सुझाव
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया था कि 35 लाख की जनसंख्या और लगभग समान संख्या में वाहनों वाले शहर में नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है। उन्होंने ई-रिक्शा पॉलिसी बनाने, को-ऑर्डिनेशन कमेटी गठन, फुटपाथ से कब्जे हटाने और मोबाइल कोर्ट शुरू करने के सुझाव दिए थे।
मेयर ने यह भी कहा था कि यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कुछ कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता है, जिन्हें सरकार और प्रशासन मिलकर जल्द लागू करेंगे।
बीमा के समय वसूलें चालान की लंबित राशि
मेयर ने ई-रिक्शा के संचालन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के अनुरूप स्पष्ट नियम बनाए जाने की आवश्यकता जताई थी। उन्होंने “ट्रैफिक मित्र” जैसे अभियानों को और तेजी से बढ़ाने की बात कही। टू-व्हीलर चालकों द्वारा नियम उल्लंघन पर जारी चालानों की वसूली के लिए उच्च न्यायालय ने सुझाव दिया था कि हर साल वाहन बीमा के समय बकाया चालान वसूले जाएं।
स्थायी समिति गठित करने का सुझाव
मेयर ने बताया था कि न्यायालय ने सभी संबंधित विभागों (जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नगर निगम) के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक स्थायी समिति गठित किए जाने का सुझाव दिया था। इसी कड़ी में कोर्ट के निर्देश पर समिति गठित कर दी गई।
हॉस्टल, कॉलेज, कोचिंग की पार्किंग को लेकर बनें नियम श
शहर में नए ब्रिज, सड़कें और मेट्रो जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हो रहा है, लेकिन ट्रैफिक इंजीनियरिंग के लिहाज से कॉलेज, कोचिंग और हॉस्टल क्षेत्रों की पार्किंग व्यवस्था, ऑन-स्ट्रीट और ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग जैसे मुद्दों पर नए नियम बनाना जरूरी है।
याचिकाकर्ता की तरफ से ये सुझाव दिए
ट्रैफिक सिग्नल 24 घंटे चालू रहे
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से एडवोकेट अजय बागडिया ने कई सुझाव दिए थे। उन्होंने कहा था कि ट्रैफिक सिग्नल 24 घंटे चलना चाहिए, ये बंद नहीं होना चाहिए। लाइट जाती है तो ट्रैफिक सिग्नल बंद हो जाते हैं इससे परेशानियां बढ़ती जाती है। इस दौरान ट्रैफिक इतना ज्यादा बिगड़ जाता है कि 15 मिनट से आधे तक ट्रैफिक जाम रहता है। इसके लिए 24 घंटे का बैकअप होना चाहिए। लाइट रहे न रहे ट्रैफिक सिग्नल चालू रहना चाहिए।
पुलिसकर्मी साइड में खड़े होकर वॉट्सऐप चेक न करे
व्यस्त ट्रैफिक के दौरान पुलिसकर्मी साइड में खड़े होकर वॉट्सऐप चेक न करे, वाहन चालकों के चालान न बनाएं बल्कि चौराहे के बीच में खड़े रहे। पुलिसकर्मी दूसरे जिलों के वाहनों के नंबर देखकर चालान बनाते हैं। ड्यूटी चौराहे के बीच में रहे। एडवोकेट बागडिया ने उदाहरण के साथ बताया था कि ट्रैफिक जवान रणजीत हाई कोर्ट तिराहा पर अकेले ट्रैफिक संभालते हैं। पुलिस का कहना है कि इंदौर में ट्रैफिक संभालने के लिए 467 पुलिसकर्मी हैं। इसका मतलब हर चौराहे पर तीन से चार जवान हैं तो फिर स्थिति खराब क्यों है, यानी वे चौराहे पर नहीं हैं।
वीआईपी के मूवमेंट के दौरान काफी फजीहत
एक सुझाव दिया था कि शहर में जो वीआईपी आते हैं इनके मूवमेंट के दौरान 3 किमी मार्ग का ट्रैफिक बंद कर दिया जाता है। फिर वीआईपी के निकलने के बाद ट्रैफिक गुत्थम गुत्था हो जाता है। जेड प्लस के लिए ट्रैफिक बंद रखना जरूरी है अन्य वीआईपी के आगमन के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था पर विचार होना चाहिए।
सपना-संगीता रोड पर भी प्रतिबंधित हो ई-रिक्शा
ई-रिक्शा राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में आधे किमी तक प्रतिबंधित हैं। इन्हें आरएनटी मार्ग, वायएन रोड, सपना-संगीता रोड पर भी प्रतिबंधित होना चाहिए ताकि ट्रैफिक न बिगड़े।
जरूरी हो तो ही गड्ढे खोदे
नगर निगम जब तक जरूरी न हो सड़कों पर गड्ढे न खोदे और खोदे तो उसका काम जल्दी पूरा करें। खुदाई के बाद सड़कों पर वाहन चलाने जैसी स्थिति ही नहीं होती है। उसका लेवल ऐसा हो कि वाहन चला सके।
कमिश्नर ने कहा था लोगों को जागरूक करने पर जोर
सुनवाई में पुलिस कमिश्नर ने कहा था कि ट्रैफिक जवानों, वाहनों, चौराहों संबंधी आंकड़ों के साथ पक्ष रखा कि लगातार ट्रैफिक को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें वॉलियंटर्स को जोड़ा जा रहा है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
कोर्ट ने पूछा- लाइसेंस रद्द करेंगे तो भी वे चलाएंगे वाहन
कोर्ट ने सुझाव दिया था कि सबसे ज्यादा उल्लंघन ई-रिक्शा और विभिन्न कंपनियों के डिलीवरी बॉयज द्वारा किया जाता है। वे ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते। इनके रिकॉर्ड चेक किए जाने चाहिए। इनके सख्ती से चालान बनाएं और इनके अथॉरिटीज को कहिए कि वे इसकी जिम्मेदारी लें।
जब आप चालान काटते हैं तो रुपए वसूलने की क्या प्रक्रिया है। इससे क्या होगा, रिकवरी का क्या तरीका है? इस पर पुलिस कमिश्नर ने कहा था कि हम उनका लाइसेंस रद्द कर सकते हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर लाइसेंस रद्द करेंगे तो भी वह वाहन चलाता रहा तो क्या करेंगे?
स्वच्छता जैसी अवेयरनेस अब ट्रैफिक को लेकर भी हो
सुनवाई में कोर्ट ने भी सुझाव दिया था कि इंदौर में जिस प्रकार स्वच्छता को लेकर अवेयरनेस की है, ट्रैफिक को लेकर पब्लिक अवेयरनेस कीजिए। इस पर एडवोकेट बागडिया ने कहा कि स्वच्छता में पहली बार नंबर वन आने के लिए पहले नगर निगम ने हर 100 मीटर पर डस्टबीन लगाई थी। इसमें निगम ने एक साल तक अभियान चलाकर लोगों को जोड़ा। फिर उल्लंघन करने पर पेनल्टी लगाई तो अभियान चल निकला। ट्रैफिक सुधारने के लिए भी पहली पहल आमजन से नहीं बल्कि सरकार की ओर से होना चाहिए।