बड़वानी की नर्मदा घाटी में गांधी समाधि कुकरा बसाहट पर रविवार सुबह करीब 10 बजे से नर्मदा बचाओ आंदोलन और सद्भाव मंच के बैनर तले मेधा पाटकर के नेतृत्व में 30 से ज़्यादा लोग उपवास पर बैठे। यह उपवास शाम 6 बजे तक गजा पट्टी में इजराइल की बमबारी और उसके कारण
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मेधा पाटकर ने कहा- गजा पट्टी में इजराइल की ओर से की जा रही बमबारी अमानवीय है। इससे हर महीने हजारों बच्चों की जान जा रही है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों और स्कूलों पर बम डालना और राहत कर्मियों व डॉक्टरों को निशाना बनाना इंसानियत के खिलाफ है। उन्होंने इस युद्ध को अस्वीकार करते हुए शांति और अहिंसा का समर्थन किया।
विदेश नीति में अनुच्छेद 51 का पालन करें
मेधा पाटकर ने कहा- भारत को अपनी विदेश नीति में अनुच्छेद 51 का पालन करना चाहिए। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय शांति और सद्भावना सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि अगर दो देशों के बीच विवाद हो तो भारत को मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि वह इजराइल की बमबारी और गजा पट्टी में भुखमरी के खिलाफ अपनी भूमिका तय करे। उन्होंने कहा कि मलेशिया जैसे देशों की तरह भारत को भी गजा पट्टी में दवाएं और भोजन जैसी आवश्यक सामग्री तुरंत पहुंचानी चाहिए।
शांति और मानव धर्म का संदेश
मेधा पाटकर ने कहा- संयुक्त राष्ट्र संघ के सभी प्रस्ताव इंसानियत और हर इंसान के जीने के अधिकार का समर्थन करते हैं। उन्होंने सरकार और समाज दोनों से युद्ध के खिलाफ शांति के पक्ष में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि यह उपवास पूरे देश भर में हो रहा है। 27 जुलाई से दुनिया भर के शांति पसंद लोग भी इसी तरह का उपवास कर रहे हैं। इस उपवास में डॉ. रशीद पटेल, अकरम खान, सादिक चंदेरी, अमन शाह, रजाक तिगोले, हनुमान सिंह, गुलाब बाबा और श्रमिक जनता संघ के साथी भी शामिल थे। सभी ने मिलकर “हमें युद्ध नहीं, शांति चाहिए; हमें रोटी चाहिए” का नारा लगाया।
देखिए उपवास की तस्वीरें

