ज्योतिष मठ संस्थान के पंचांगकार पं. विनोद गौतम ने बताया कि अश्लेषा नक्षत्र का वाहन ‘गधर्व’ यानी गधा है, जो परंपरागत रूप से अल्प वर्षा का संकेत देता है।
सावन के महीने में अब मौसम फिर करवट लेगा। रविवार, 3 अगस्त से वर्षा का चौथा दौर शुरू हो रहा है, लेकिन इस बार बारिश की रफ्तार पहले से धीमी रह सकती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह दौर अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है, जो 17 अगस्त तक प्रभावी रहेगा।
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ज्योतिष मठ संस्थान के पंचांगकार पं. विनोद गौतम ने बताया कि अश्लेषा नक्षत्र का वाहन ‘गधर्व’ यानी गधा है, जो परंपरागत रूप से अल्प वर्षा का संकेत देता है। इसके साथ ही चंद्र-चंद्र और स्त्री-स्त्री संज्ञा का योग बनने से बारिश में अनियमितता देखी जा सकती है।
ग्रह स्थिति यह भी संकेत दे रही है कि सूर्य से दो राशि आगे मंगल का प्रभाव इस दौरान सक्रिय रहेगा। जिससे मैदानी इलाकों में बारिश की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना बनी रहेगी।
विशेष बात यह है कि अश्लेषा नक्षत्र ‘अमृत नाड़ी’ का प्रभाव लिए हुए है, फिर भी यह अधिकतर क्षेत्रों में हल्की और रुक-रुक कर होने वाली वर्षा का ही योग बना रहा है। इस दौरान मौसम में धूप-छांव और फुहारों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। इस प्रकार 3 अगस्त से वर्षा का चौथा चरण आरंभ तो होगा, लेकिन इसके तेवर कहीं नरम और कहीं तीखे रह सकते हैं।