उज्जैन में 2016 में आयोजित पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में अपनी जगह किसी अन्य व्यक्ति को ‘मुन्नाभाई’ बनाकर फर्जी परीक्षार्थी के रूप में परीक्षा दिलवाने वाले अभ्यर्थी को फिंगरप्रिंट मेल नहीं होने पर गिरफ्तार किया गया था।
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मामले में 9 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया है। जिसमें न्यायालय ने परीक्षार्थी को 2 साल के कठोर कारावास और 3,000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
मीडिया सेल प्रभारी कुलदीप सिंह भदौरिया ने बताया कि विजय सनस थाना माधवनगर, उज्जैन में उपनिरीक्षक के पद पर पदस्थ थे। 29 सितंबर 2016 को पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में कंप्यूटर बायोमेट्रिक डेटा एकत्र करने वाली टीम द्वारा अभ्यर्थियों के अंगूठे के निशान (थंब इम्प्रेशन) और अन्य चिन्हों का मिलान किया जा रहा था।
इस दौरान रोल नंबर 212224147 के अभ्यर्थी रामअवतार, ग्राम मांगरोल, सबलगढ़, जिला मुरैना निवासी का थंब इम्प्रेशन मेल नहीं खाया। उसके अंगूठे पर कोई चिपचिपा पदार्थ चिपका हुआ पाया गया था। अभ्यर्थी के व्यवहार को संदिग्ध मानकर पूछताछ की गई, तब उसने बताया कि उसकी जगह विमल नामक युवक ने परीक्षा दी थी।
थाना माधवनगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। प्रकरण में अभियोजन पैरवी अधिकारी हार्दिक देवकर, एडीपीओ के तर्कों से सहमत होकर न्यायालय ने आरोपी को दंडित किया। उज्जैन कोर्ट ने आरोपी रामअवतार रावत, निवासी मुरैना को भारतीय दंड संहिता की धारा 419 और 120-बी के तहत 2 वर्ष के सश्रम कारावास एवं कुल 3,000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।