ईडी भोपाल की टीम ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 1266 करोड़ का लोन लेकर खुद को एनपीए बताने वाली मेसर्स एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड के यहां सर्चिंग कर 300 करोड़ रुपए से अधिक की प्रापर्टी और नकदी जब्त की है।
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ईडी ने बैंक के साथ फ्रॉड करते हुए कंपनी के डायरेक्टर्स, कर्मचारियों और बेनामीदारों के नाम पर संपत्तियां अर्जित की और बैंक से लिए गए लोन का आपराधिक उपयोग किया। ईडी की जांच में मिले दस्तावेजों से कंपनी द्वारा देश-विदेश में बैंक से लिए गए लोन का उपयोग करने के साक्ष्य मिले हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भोपाल के क्षेत्रीय कार्यालय ने पीएमएलए 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत मेसर्स एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड (एओपीएल) के ठिकानों पर सर्चिंग की है। सर्चिंग के दौरान इन ठिकानों से आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं। इसमें ऐसे दस्तावेज भी शामिल हैं। जो आपराधिक आय को वैध बनाने से संबंधित हैं। साथ ही संदिग्ध लेन-देन के माध्यम से अत्यधिक महंगी प्रापर्टीज को कर्मचारियों और बेनामीदारों के नाम पर रखा गया। इसके लिए बेनामी कंपनियों का भी इस्तेमाल किया गया।
सीबीआई की एफआईआर के आधार पर शुरू की जांच
ईडी ने सीबीआई बीएसएफसी नई दिल्ली द्वारा आईपीसी 1860 की अलग-अलग धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की गई कार्रवाई के आधार पर यह सर्चिंग की है। मेसर्स एडवांटेज ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर्स, संबंधित व्यक्तियों और अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, सिक्योरिटी में जालसाजी आदि के उद्देश्य से आपराधिक साजिश करने की कार्रवाई इसके अंतर्गत की गई है। इस कंपनी द्वारा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को 1266.63 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के आरोप में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। जिसके आधार पर ईडी ने जांच शुरू की है।
100 गुना टर्नओवर बढ़ा बताकर 73 संस्थाओं के माध्यम से लिए लोन
ईडी की जांच से पता चला है कि एओपीएल ने बैंकों से अनुचित लाभ लेने के लिए पहले टर्नओवर को 100 गुना बढ़ाकर बैंक को धोखा दिया। फिर संबंधित पक्ष के साथ लेनदेन किए और 73 विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से खुद को और अपनी सहयोगी कंपनियों को असुरक्षित ऋण की आड़ में बैंक से लिए गए लोन का दुरुपयोग किया। इस मोटी रकम का दुरुपयोग करने के बाद एओपीएल ने खुद को एनपीए बता दिया और इसके बाद एसबीआई ने एओपीएल के खिलाफ एनसीएलटी में आवेदन दायर किया।
तलाशी अभियान के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए। इन दस्तावेजों से पता चला कि निदेशक और उनके सहयोगियों ने भारत और विदेशों में काफी चल और अचल संपत्तियां जुटाई है। अब तक तलाशी के दौरान 300 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति का पता चला है। इसकी जांच अभी जारी है।