पेंच टाइगर रिजर्व के कर्माझिरी कोर क्षेत्र के अलीकट्टा घास मैदान के पास बाघों के आपसी लड़ाई में एक अवयस्क बाघिन की मौत हो गई है। सुरक्षा श्रमिकों ने इस घटना को देखा। मृत मादा बाघ की उम्र लगभग एक वर्ष आंकी गई है।
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पेंच टाइगर रिजर्व के उपसंचालक रजनीश सिंह ने शाम 7 बजे बताया कि इस क्षेत्र में दो अवयस्क बाघों के साथ एक बाघिन और एक अन्य ताकतवर नर बाघ की उपस्थिति है।
कर्मचारियों ने बाघों को संघर्ष करते देखा
4 अगस्त की शाम को कक्ष क्रमांक 585 अलीकट्टा घास मैदान में दो सुरक्षा श्रमिकों ने बाघों के बीच आपसी द्वंद की आवाज सुनी थी। कुछ देर बाद उन्होंने सड़क के पार बाघों को संघर्ष करते देखा।
इस लड़ाई के बाद एक बाघ को मृत बाघ का शव खींचकर जंगल की ओर ले जाते देखा गया। सुरक्षा श्रमिकों ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
हाथियों की मदद से बाघों के पास पहुंचे कर्मचारी
घटनास्थल झाड़ियों से घिरा होने के कारण दूर से कुछ स्पष्ट नहीं दिख रहा था। पैदल जाना खतरनाक था, इसलिए विभागीय हाथियों की मदद से बाघों के पास जाने का निर्णय लिया गया।
हाथियों पर सवार होकर जब अधिकारी पास गए तो पता चला कि मृत बाघ एक अवयस्क मादा थी। दूसरा बाघ भी पास ही था, इसलिए मौके पर कैमरा लगाकर बाघ के शव को वहीं छोड़ दिया गया।
सुबह शव का पोस्टमॉर्टम किया गया
5 अगस्त की सुबह एनटीसीए के प्रोटोकॉल के अनुसार वरिष्ठ वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अखिलेश मिश्रा और पशु चिकित्सक डॉ. अमित रैकवार ने मादा बाघ के शव का पोस्टमॉर्टम किया। क्षेत्र संचालक देवाप्रसाद जे, एनटीसीए के प्रतिनिधि दामोदर शुक्ला, नायब तहसीलदार कुरई और कोथिका कुशराम सरपंच टुरिया की उपस्थिति में पंचनामा बनाया गया।
पोस्टमॉर्टम के बाद भस्मीकरण समिति के समक्ष मादा बाघ के शव को जलाया गया।
पोस्टमॉर्टम के बाद भस्मीकरण समिति के समक्ष मादा बाघिन के शव को जलाया गया। जांच में पाया गया कि ताकतवर नर बाघ ने मृत मादा बाघ के पेट और पिछले भाग का कुछ हिस्सा खा लिया था। मादा बाघ के चेहरे पर भी नर बाघ के हमले के घाव पाए गए हैं।