चांदी की पालकी में महाकाल ने किए नगर दर्शन
श्री महाकालेश्वर मंदिर से सोमवार शाम निकली इस सवारी की शुरुआत मंदिर के सभा मंडप से पूजा-अर्चना के बाद हुई. भगवान को मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल की सलामी दी गई. इसके बाद सवारी गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, कहारवाड़ी, रामघाट, रामानुजकोट, कार्तिक चौक, छत्री चौक, गोपाल मंदिर होते हुए वापस महाकाल मंदिर पहुंची.
इस बार महाकाल की सवारी चार रूपों में निकाली गई, जिन्हें देखकर श्रद्धालु अभिभूत हो गए.
चंद्रमोलेश्वर स्वरूप – चांदी की पालकी में
शिव तांडव – गरुड़ पर
सवारी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे. जगह-जगह पुलिस बल, होमगार्ड और वॉलंटियर तैनात रहे.
देशभर से आए भक्त महाकाल के दर्शन करने पहुंचे. हर कोई बाबा की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतज़ार करता नजर आया. मंदिर और शहर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं. सवारी मार्ग पर जगह-जगह फूल वर्षा और भजन मंडलियों ने भी श्रद्धालुओं को भावविभोर किया.
लोकनृत्य और झांकियों ने बढ़ाई भव्यता
इस अवसर पर जनजातीय लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए नृत्य और मध्यप्रदेश के चार पर्यटन स्थलों की झांकियों ने विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं. पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक रंगों से सजी झांकियों ने सवारी को और भव्य बना दिया.
महाकाल मंदिर समिति के अनुसार, अब सावन के बाद भादौ मास में महाकाल की दो और सवारियां निकलेंगी:
11 अगस्त को पांचवीं सवारी
महाकाल दर्शन से दूर होते हैं कष्ट
मंदिर पुजारी महेश पुजारी के अनुसार “सावन माह भगवान महाकाल के विशेष जागरण का समय होता है. इस दौरान वे अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं. ऐसी मान्यता है कि सवारी के दर्शन मात्र से रोग, भय और संकट दूर होते हैं.”