सावन के अंतिम सोमवार को उज्जैन में निकली बाबा महाकाल की भव्य सवारी, चार दिव्य स्वरूपों में दिए दर्शन

सावन के अंतिम सोमवार को उज्जैन में निकली बाबा महाकाल की भव्य सवारी, चार दिव्य स्वरूपों में दिए दर्शन


शुभम मरमट / उज्जैन: सावन के अंतिम सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल की परंपरागत सवारी नगर भ्रमण पर निकली. भारी बारिश और उमस के बावजूद सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब महाकाल मंदिर परिसर में उमड़ पड़ा. जैसे ही भगवान महाकाल चांदी की पालकी में सवार होकर मंदिर से निकले, जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा.

चांदी की पालकी में महाकाल ने किए नगर दर्शन
श्री महाकालेश्वर मंदिर से सोमवार शाम निकली इस सवारी की शुरुआत मंदिर के सभा मंडप से पूजा-अर्चना के बाद हुई. भगवान को मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल की सलामी दी गई. इसके बाद सवारी गुदरी चौराहा, पटनी बाजार, कहारवाड़ी, रामघाट, रामानुजकोट, कार्तिक चौक, छत्री चौक, गोपाल मंदिर होते हुए वापस महाकाल मंदिर पहुंची.

चार स्वरूपों में दिए दर्शन
इस बार महाकाल की सवारी चार रूपों में निकाली गई, जिन्हें देखकर श्रद्धालु अभिभूत हो गए.

चंद्रमोलेश्वर स्वरूप – चांदी की पालकी में

मनमहेश स्वरूप – हाथी पर

शिव तांडव – गरुड़ पर

उमा महेश – नंदी रथ पर

सवारी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे. जगह-जगह पुलिस बल, होमगार्ड और वॉलंटियर तैनात रहे.

श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब
देशभर से आए भक्त महाकाल के दर्शन करने पहुंचे. हर कोई बाबा की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतज़ार करता नजर आया. मंदिर और शहर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं. सवारी मार्ग पर जगह-जगह फूल वर्षा और भजन मंडलियों ने भी श्रद्धालुओं को भावविभोर किया.

लोकनृत्य और झांकियों ने बढ़ाई भव्यता
इस अवसर पर जनजातीय लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए नृत्य और मध्यप्रदेश के चार पर्यटन स्थलों की झांकियों ने विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं. पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक रंगों से सजी झांकियों ने सवारी को और भव्य बना दिया.

आगे भी निकलेगी दो विशेष सवारियां
महाकाल मंदिर समिति के अनुसार, अब सावन के बाद भादौ मास में महाकाल की दो और सवारियां निकलेंगी:

11 अगस्त को पांचवीं सवारी

18 अगस्त को अंतिम और राजसी सवारी, जिसमें बाबा को राजचिन्हों के साथ नगर भ्रमण कराया जाएगा.

महाकाल दर्शन से दूर होते हैं कष्ट
मंदिर पुजारी महेश पुजारी के अनुसार “सावन माह भगवान महाकाल के विशेष जागरण का समय होता है. इस दौरान वे अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं. ऐसी मान्यता है कि सवारी के दर्शन मात्र से रोग, भय और संकट दूर होते हैं.”



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