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Agriculture Tips: मानसून के मौसम में अत्यधिक वर्षा और नदियों का जल स्तर बढ़ने से खरगोन सहित कई जिलों ओर राज्यो में बाढ़ की स्थिति बनी है. जिले में नर्मदा नदी क्षेत्र के खेत बाढ में डूब गए, जिससे कई किसानों की फसलों को नुकसना पहंचा है. ऐसे में जिन किसानों की फसल बाढ़ से प्रभावित हुई है, उन्हें कुछ जरूरी काम करना चाहिए.
मध्यप्रदेश के खरगोन, बड़वानी, और निमाड़ क्षेत्र से लेकर उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में लगातार बारिश से नदियों के उफान ने खेतों को तालाब बना दिया है. नर्मदा के बाढ़ ने खेतों में लगी फसलों को तबाह कर दिया है.

इस बाढ से खरीफ में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली फसलें सोयाबीन, मक्का, मूंग, उड़द, धान और कपास सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं. किसान अब अपनी उपज को लेकर चिंतित है. तो वही कुछ फसलों को बचाने के लिए कई तरह के जतन कर रहे है.

कई किसानों ने खेत तैयार करने से लेकर बोवनी तक में 10-20 हजार प्रति बीघा खर्च किया था, जो अब पूरी तरह डूब गया है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि बीज सड़ गए हैं, जड़ गल गई है और मिट्टी की ताकत भी कमजोर पड़ गई है.

कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि खेत में जितनी देर पानी रुकेगा, उतना ज्यादा नुकसान होगा. इसलिए पहले नालियों की सफाई करें, ऊंची मेड़ काटकर पानी बहाएं और खेत की मिट्टी को खुला छोड़ दें ताकि धूप लगे और खेत सूख सके.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़े किसान तुरंत पटवारी, ग्राम सेवक या कृषि अधिकारी को सूचित करें. खेत का फोटो लें, पंचनामा बनवाएं और क्लेम जमा करें। ध्यान रखें, बीमा क्लेम की समय सीमा 72 घंटे से 7 दिन तक राज्य के अनुसार होती है.

कई इलाकों में खेत सूखने के बाद दोबारा बोवनी संभव है. ऐसे में उड़द, मूंग, तिल, बाजरा सहित सब्जियों की कम अवधि वाली फसलें लगाई जा सकती हैं. कृषि विभाग अल्पकालीन किस्मों के बीज और खाद पर सब्सिडी भी देता है.

बाढ़ से मिट्टी की उर्वरकता कम हो जाती है. इसलिए नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या सहकारी समिति में जाकर मिट्टी की जांच जरूर कराएं. इससे यह पता चलेगा कि किस पोषक तत्व की कमी है और कौन सी खाद डालनी चाहिए.

बाढ़ प्रभावित कुछ इलाकों में सर्वे शुरू हो गए हैं. कई जगह सरकारें राहत देने का एलान कर चुकी हैं. साथ ही बीज वितरण, कीटनाशक स्प्रे और खाद सहायता के भी शिविर लगाए जा रहे हैं. लेकिन ज़मीन पर कई किसानों को अब भी मदद का इंतजार है.

सैकड़ों किसानों की मेहनत बाढ़ में बह गई. लेकिन, अगर सही समय पर कदम उठाए जाएं. बीमा क्लेम करें, खेत सुखाएं, वैकल्पिक फसलें लगाएं और मदद के लिए जुड़ें, तो ये खरीफ सीजन पूरी तरह खाली नहीं जाएगा. फिर से खेत नई फसलों से लहलहा उठेंगे.